5 देश vs चीन! लड़ाई दिलचस्प है!

वुहान वायरस की महामारी फैलने के पश्चात चीन के बारे में ऐसी-ऐसी बातें खुलकर सामने आ रही हैं, जिसके बारे में सोचकर भी कोई व्यक्ति सिहर उठेगा। चाहे सप्लाई चेन पर वर्चस्व हो, या फिर लगभग हर पड़ोसी देश के ज़मीन पर कब्जा जमाने की मंशा, चीन की पोल एक-एक करके पूरी दुनिया के समक्ष खुल रही है, और अब चीन को इसी दिशा में मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अमेरिका ने एक और क्षेत्र में कमर कस ली है।

जापान की क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार अभी हाल ही में अमेरिका के उप विदेश मंत्री स्टीफेन बीगन की 5 दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों के साथ हाल ही में एक विशेष बैठक है, जिसमें एक बार फिर से चीन निशाने पर है। परंतु आखिर समस्या क्या है? दरअसल, इन पाँच दक्षिण पूर्वी एशियाई देश, जिनमें वियतनाम, थायलैंड, लाओस, और कंबोडिया जैसे देश शामिल है, जो चीन के साथ मेकोंग नदी के मुद्दे पर कई वर्षों से जूझ रहे हैं।

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दरअसल, 4,350 किलोमीटर लंबी मेकोंग नदी दक्षिण पूर्व एशिया की ओर बहने वाली एक अहम नदी है, जिसके संसाधनों का उपयोग वियतनाम, थायलैंड, लाओस और कंबोडिया कई वर्षों से करता आया है। लेकिन सत्ता के नशे में चूर कम्युनिस्ट चीन को इस बात से भी दिक्कत है कि कोई देश उसके चीन के जरिये बहती नदी के संसाधनों का भी उपयोग करे।कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध संभवत पानी के विषय में छिड़ सकता है, और शायद ऐसा शुरू भी हो चुका है। अप्रैल माह में Eyes on Earth नाम की एक रिसर्च कंपनी ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि इन सभी देशों में बहने वाली मेकोंग नदी में जल स्तर 50 सालों के निम्न स्तर पर आ चुका है, जिसके कारण इन देशों में किसानों को बड़ी तबाही का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि कुछ जगहों पर तो यह नदी सूखने की कगार पर पहुँच चुकी है। और इसका एक ही कारण है: चीन द्वारा इस नदी पर बनाए जा रहे एक के बाद एक बांध! इतना ही नहीं, Eyes on Earth संस्था के अध्यक्ष Alan Basist’s ने दावा किया है कि- “अगर चीन ऐसा कहता है कि मेकोंग बेसिन के देशों में सूखे का कारण वह नहीं है, तो आंकड़े इस बात का समर्थन नहीं करते हैं”। इस विषय पर TFIPost ने प्रकाश भी डाला था।

परंतु अब चीन की दादागिरी अब और नहीं चलेगी। जापान के ही एक अन्य न्यूज़ पोर्टल निक्केई एशियन रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और पाँच दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों के बीच अभी जो बैठक हुई है, उसमें अमेरिका ने इस बात का आश्वासन दिया कि चीन द्वारा वियतनाम, लाओस, कंबोडिया और थायलैंड जैसे देशों को हो रहे नुकसान की अमेरिका न सिर्फ भरपाई करेगा, अपितु चीन के विरुद्ध अपनी लड़ाई में इन देशों की हरसंभव सहायता भी करेगा। इसके अलावा निक्केई एशियन रिव्यू की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि मीकोंग बेसिन में चीन के कारण होने वाले नुकसान के लिए 153 मिलियन डॉलर के राहत पैकेज की घोषणा भी की है।

उक्त निर्णय से अमेरिका ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। एक तो वर्षों से इन देशों के साथ चीन ने जो अन्याय किया, उसके विरुद्ध अमेरिका ने इन्हे आशा की एक किरण प्रदान है। दूसरा, यह चारों देश हिन्द प्रशांत क्षेत्र के आसपास स्थित हैं, जहां चीन अपना वर्चस्व जमाना चाहता है। ऐसे में इन देशों का साथ मिलने से अमेरिका को न केवल हिन्द प्रशांत क्षेत्र में बढ़त मिलेगी, अपितु चीन को उसी की भाषा में माकूल जवाब भी मिलेगा। दिलचस्प बात तो यह है कि वियतनाम, लाओस, कंबोडिया और थायलैंड भारत के भी मित्र देशों में गिने जाते हैं, और ऐसे में अमेरिका का यह दांव हिन्द प्रशांत क्षेत्र में भारत और अमेरिका, दोनों के लिए भविष्य में काफी लाभकारी सिद्ध होगा।

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