काम की बात : जानिए शादी की पहली रात दूध के गिलास का मतलब

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प्यार के बारे में कहा जाता है कि यह हर इंसान के लिए बहुत जरुरी होता है। बिना प्यार के जीवन अधुरा सा लगता है। इसी वजह से हर कोई जीवन में प्यार की तलाश में रहता है। प्यार कई तरह के होते हैं। जैसे माँ-बाप का प्यार, भाई-बहन का प्यार, प्रेमी-प्रेमिका का प्यार। आज हम यहाँ किसी और प्यार के बारे में नहीं बल्कि प्रेमी-प्रेमिका और जीवनसाथी के प्यार के बारे में बात कर रहे हैं। अगर जीवन के कठिन रास्तों पर चलने के लिए कोई जीवनसाथी होता है तो ये कठिन राहें आसान हो जाती हैं।

बताते चले भारत में शादी करना एक बड़ी ही शुभ घटना मानी जाती है, जिसमें दो आत्‍माओं का मिलन होता है। शादी की पहली रात को सुहागरात बोलते हैं, जिसमें पति पत्‍नी दोनों एक हो जाते हैं। इस रात को यादगार बनाने के लिये दुल्‍हे के परिवार वाले पति-पत्‍नी का कमरा फूलों से सजाते हैं और दुल्‍हन को दूध और केसर से भरा गिलास दुल्‍हे को देने के लिये कहते हैं।

शादी की पहली रात यानी सुहागरात में अधिकतर शादी-शुदा जोड़ों को केसर और बादाम मिला दूध पीने को दिया जाता है। क्‍या आप जानते हैं सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे कौन सा धार्मिक महत्‍व है?

ज्‍योतिष में दूध को शुक्र और चंद्रमा दो ग्रहों का प्रतीक माना जाता है। दुल्‍हन का दूध के गिलास को ले जाने का प्रभाव इन दोनों ग्रहों पर पड़ता है जो इन्‍हें बेहतर बनाता है और ये वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाते हैं। शुक्र पुरुषों में शुक्राणु और कामेच्‍छा का प्रतीक माना गया है और चंद्रमा मन का प्रतीक है। इन दोनों ही ग्रहों में संतुलन स्‍थापित करने के लिए इस दूध की रस्‍म का निर्माण किया गया है।

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