कोरोना के बढ़ते मामले : संघर्ष अभी जारी है, सजग और सहयोगी बनें, अपना दायित्व समझें आमजन

डॉ. मोनिका शर्मा

                                             

देश के कई  हिस्सों  से सामने आ रहे कोरोना के नए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है |  केरल, महाराष्‍ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़  और मध्‍य प्रदेश में पिछले 7  दिनों में कोरोना संक्रमण  के मामले तेजी से बढ़े हैं |    महाराष्ट्र में ही सक्रिय मामले   करीब 29 फीसदी तक बढ़ गए हैं | हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़  महाराष्ट्र के छह जिलों रत्नागिरी, बीड, सिंधुदुर्ग, रायगढ़, सतारा और अमरावती में कोरोना का खतरा  काफी बढ़ गया है।  इतना ही नहीं  मुंबई में  भी कोरोना के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं | अधिकारियों ने चेताया है कि  मायानगरी के  लिए अगले 15 दिन काफी महत्वपूर्ण हैं | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय  के अनुसार  देश भर में  इस वायरस से संक्रमित लोगों के बढ़ते आँकड़े बताते हैं कि कोरोना मामलों में बड़ा उछाल  आया है |   देश में  फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण के उपचाराधीन रोगियों का आँकड़ा 1,45,634 है |  यह कुल मामलों का 1.32  फीसदी है। ग़ौरतलब है कि हमारे यहाँ  पिछले महीने 29 जनवरी को 18,855 नए दैनिक मामले सामने आए थे।  चिंतनीय है कि  संक्रमण का गिरता ग्राफ फिर बढ़ गया है |  इन दिनों करीब  28 दिन के बाद  24 घंटे में  14264 नए मरीज सामने आये हैं |  

बीते एक साल से इस महामारी से जूझ रहा प्रशासनिक अमला पूरी तरह  मुस्तैद  है | जन-जागरूकता लाने से लेकर वैक्सीनेशन तक, जीवन सहेजने का संघर्ष हर स्तर  पर जारी है पर इस सामुदायिक संकट से लड़ने में आमजन  की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है |  कोरोना महामारी से  लड़ी जा रही इस जंग में जन मानस की सजगता और सहयोग  ही सबसे अहम्  हैं  |  खासकर उन  राज्यों के लोगों को  ज्यादा सजग सजग रहने की दरकार है जहाँ संक्रमण की रफ़्तार ज्यादा है |   फिलहाल देश के 75 प्रतिशत  एक्टिव केस केरल और महाराष्ट्र में हैं | मुंबई में   कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से  मुंबई महानगरपालिका ने 1,305 इमारतों को सील कर दिया है |  साथ ही क्वारेंटाइन के नियमों की पालना  ना  करने पर कानूनी कार्रवाई करने की  बात भी कही है |  यह सख्ती जरूरी भी  है क्योंकि आपदा की  गंभीरता को समझने के  बजाय  लोग नियमों की अवलेहना करने भी से नहीं चूक रहे |  

वैश्विक स्तर पर इंसान के मन-जीवन को हिला रख देने वाली कोरोना महामारी का फिर से बढ़ता प्रकोप  बता  रहा है कि इस विपदा से संघर्ष अभी जारी है |  असल में देखा जाय  बीते एक वर्ष में संक्रमण के  शिकार हुए लोगों के अनुभव हों या इस बीमारी से जुड़ी जानकारियाँ, यह स्पष्ट  हो गया है कि इससे लड़ने के लिए सेहत की संभाल, स्वच्छता और सरकारी  दिशा-निर्देशों के पालन  को लेकर  सतर्कता बरतना ही बचाव का उपाय है | बचाव के लिए ही देशवासियों ने  लॉकडाउन का समय भी देखा |   धीरे-धीरे लॉकडाउन के नियमों में  छूट मिली और जीवन पटरी  पर आया |  देश में बनी वैक्सीन और टीकाकरण की  सही रफ़्तार के साथ ही  कम होते संक्रमण के आंकड़ों से आम जीवन सहज हो चला था |  लेकिन अब  संक्रमण  खतरा  फिर बढ़ गया है | इन हालातों में नागरिकों की ज़िम्मेदारी भी बढ़ी है |  विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि भारत में कोरोना का नया स्‍ट्रेन पहले से ज्‍यादा संक्रामक हो सकता है |  बचाव के लिए जरूरी सजगता और समझ से काम  लेना बेहद जरूरी है |  

कोरोना  काल के  बीते एक साल में जीवन कमोबेश हर पहलू पर बदल  गया है |  रहन-सहन, खान-पान और साफ़-सफाई ही नहीं घर से बाहर निकलने और बाहर से घर आने तक के लिए भी कई नियम हमारी जीवनशैली का  हिस्सा बन गये |   ऐसे में अब फिर से बढ़ रहे कोरोना के  प्रकोप  के दौर में सेहत सहेजने के लिए  सतर्क रहने  के लिए जरूरी है कि आम जन उन बदलावों को बंधन नहीं बल्कि  आम जिन्दगी का हिस्सा समझें | गौरतलब है कि   संक्रमण से बचाव के लिए  जीवनशैली में आये नए बदलावों को अब न्यू नॉर्मल कहा जा रहा है |  ऐसे में मास्क पहनने की बात हो या साफ़-सफाई को लेकर सचेत रहने का मामला | अब तक हम देख-समझ चुके हैं कि न्यू नॉर्मल को अपनाना और नियमों का पालन करना  ही जिन्दगी बचा सकता है |  ऐसे समय पर  शिकायती  विचार और व्यवहार सिर्फ उलझनें  बढाने वाले साबित होते हैं |  दिशानिर्देशों की अनदेखी संकट को काबू करने में बाधा बनती है | 

इसीलिए सावधानी, सतर्कता और आत्म नियमन बेहद जरूरी है  |  आम लोगों  को सरकार की पाबंदियां नहीं बल्कि खुद अपनी समझ की गाइडलाइंस भी काम में लेनी होगीं |  खासकर तब जबकि यह भी पता नहीं कि परेशानी कब तक हमें घेरे रहेगी  ? हालांकि इससे जूझने को हर मोर्चे पर जंग जारी है |   टीकाकरण अभियान  के तहत  एक महीने के भीतर 1 करोड़ से ज्यादा लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है |  भारत  अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश बन गया है, जहाँ टीकाकरण अभियान में इस मुकाम पर पहुंचा है  | केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के  अनुसार  1,01,88,007 स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना वायरस का वैक्सीन लगाया गया है | ऐसे में वायरस के संक्रमण की थर्ड वेव चिंता  बढ़ाने वाली  तो जरूर है पर टीकाकरण की रफ़्तार और अच्छे   रिकवरी रेट के  आमजन का सहयोगी व्यवहार भी हो तो इस जंग को जीतना मुश्किल नहीं होगा |       

 कोरोना संक्रमण से जूझने में आम लोगों की भागीदारी जरूरी है |  किसी एक  की असावधानी कई लोगों के लिए मुसीबत  बन जाती है |  बचाव  के नियमों की पालना के प्रति लापरवाही  बरतने वाला व्यवहार दूसरों का जीवन भी जोखिम में  डालता है |  इसीलिए बिना जरूरत  घर से न निकलने, मास्क लगाने, दो गज की दूरी  बनाये रखने  दिन में कई बार हाथ धोने को लेकर  को  अब फिर से सतर्क फिर से सतर्क हो जाना आवश्यक  है | नागरिकों को  यह याद रखना  होगा कि  मौजूदा समय में जिंदगी बचाने वाले नियमों का पालन करना हमारी व्यक्तिगत ही नहीं  मानवीय   ज़िम्मेदारी  भी है |   विश्व स्वास्थ्य संगठन के  प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने कुछ समय पहले  कोविड-19 को लेकर कहा था कि ‘हम सभी चाहते हैं कि कोरोना वायरस जल्द से जल्द खत्म हो जाए। हम सभी अपनी आम दिनों की जिंदगियों में वापस लौटना चाहते हैं, पर खतरा अभी टला नहीं है |  ऐसे में अगर सही ढंग से नियमों का पालन नहीं किया जाएगा तो यह वायरस लोगों को और तेजी से संक्रमित कर सकता है।’  डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस  के मुताबिक़  ‘यह एक कटु सत्य है कि यह महामारी अभी खत्म  होने के करीब भी नहीं पहुंची है। ऐसे में  इस आपदा को हराने के लिए हमें एक-जुट होकर नियमों का पालन करने की दरकार  है।’ 

दुनिया के किसी भी देश में  ऐसे संकट के समय आमजन की  भूमिका अहम हो जाती है, जिसे सुलझने में कुछ वक्त लग सकता है |  किसी भी आपदा से जूझकर बाहर आने में  जितना  लंबा  समय लगता है, उससे जुड़ी समस्याएं भी उतनी ही बढती जाती हैं | जिंदगी का हर पक्ष उसकी गिरफ़्त में आता जाता है |  कोरोना संकट ने भी आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक और भावनात्मक हर पहलू पर तकलीफें खड़ी कर दी हैं | ऐसे में  फिर से दस्तक दे रही इस  विपदा से सरकार और समाज को मिलकर ही जूझना होगा | कोविड-19 की लड़ाई में देश के नागरिकों के हिस्से सही ढंग से गाइडलाइंस का पालन करने और सुरक्षित रहने  की ज़िम्मेदारी  है |  कोरोना  के खिलाफ जारी इस  लंबी लड़ाई में  आज भी उसी जज़्बे की  दरकार है जो शुरुआत में था | 

Back to top button
E-Paper