कानपुर : पुलिस का खुफिया तंत्र फेल होने से शहीद हुए आठ पुलिस कर्मी, एडीजी ने भी मानी चूक

  • लीड कर रहे शहीद हुए सीओ भी नहीं भांप पाये हिस्ट्रीशीटर का प्लान
  • पुलिस कार्रवाई की बदमाशों को थी पल-पल की जानकारी

कानपुर, । थाने में घुसकर राज्य मंत्री की हत्या करने वाले शातिर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की पुलिस में भी अच्छी पकड़ थी। इसी के चलते पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल हो गया तो वहीं पुलिस की कार्रवाई की उसको पल-पल की खबर थी।

हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गयी पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे शहीद सीओ भी उसके प्लान को नहीं भांप पाये और रास्ते में खड़ी जेसीबी को भी अनदेखा कर गांव में घुस गये। यही पुलिस की बड़ी भूल साबित हुई और पूरी तैयारी से लैस बदमाशों ने अधाधुंध गोली बरसाकर सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को शहीद कर दिया। पूरे मामले को लेकर एडीजी लॉ एण्ड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने भी पुलिस की चूक को माना।

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चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरु गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को पकड़ने के लिए देर रात सीओ बिल्हौर देवेन्द्र मिश्रा की अगुवाई में पुलिस टीम गांव गयी थी। पुलिस ने शातिर बदमाश को पकड़ने के लिए बकायदा प्लान बनाया था और कई थानों का फोर्स भी था, लेकिन पुलिस का प्लान बदमाश को पूरी तरह से पता चल गया और वह साथियों संग सावधान हो गया। वहीं पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हो गया। पुलिस को यह भी नहीं पता था कि गांव के बाहर बदमाशों ने रास्ता रोकने के लिए जेसीबी लगा दी है और न तो यह पता था कि बदमाशों के पास किस प्रकार के अत्याधुनिक असलहे हैं।

इसी के चलते टीम को लीड कर रहे बिल्हौर सीओ देवेन्द्र मिश्रा गाड़ी से उतरकर पैदल गांव घुस गये और उनके पीछे टीम भी घुस गयी। पुलिस टीम के गांव में घुसते ही बदमाशों ने अत्याधुनिक असलहों से पुलिस कर्मियों को घेरकर अधाधुंध फायरिंग कर दी और पुलिस टीम न तो मोर्चा ही ले सकी और न ही भाग सकी। इसी के चलते सीओ सहित कई पुलिस कर्मियों को बदमाशों ने पकड़ कर मार दिया। पूरी घटना में आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गये और छह पुलिस कर्मी अभी भी घायलावस्था में अस्पताल में इलाज करा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर एक भी बदमाश नहीं मारा गया। घटना स्थल की तस्वीरें और घायल पुलिस कर्मियों के बयान से पता चल रहा है कि पुलिस का प्लान पूरी तरह से लीक हो गया था और शातिर बदमाश विकास दुबे साथियों संग हमला करने के लिए तैयार था। घटनास्थल पर पहुंचे एडीजी लॉ एण्ड आर्डर प्रशांत कुमार ने भी पुलिस की चूक को माना और कहा कि शातिर बदमाश की पहुंच पुलिस तक थी और पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ। प्रशांत कुमार ने कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी। अब एसटीएफ के साथ कई टीमें लगी हैं। हत्यारे विकास को खोजा जा रहा है। इसके लिए कानपुर शहर के साथ ही देहात तथा पास के जिलों में लगातार छापा मारा जा रहा है। जनपद के सभी बॉर्डर सील करने के साथ हर वाहन की चेकिंग की जा रही है।

रास्ते में जेसीबी देख पुलिस कर्मियों ने अनहोनी की जताई थी आशंका

गांव में घुसते ही पुलिस टीम ने जैसे ही रास्ते में जेसीबी को खड़ा देखा तो अनहोनी की आशंका जताई। (बताते चलें कि जेसीबी को इस तरह से खड़ा किया था कि एक भी गाड़ी गांव के अंदर न पहुंच पाये। सिर्फ गांव के अंदर पैदल ही व्यक्ति पहुंच सके।) इस पर सीओ ने पुलिस कर्मियों की बात को अनदेखा किया और पैदल ही गांव में घुस गये। इसी का बदमाशों ने फायदा उठाया और घेरकर आठ पुलिस कर्मियों को शहीद कर दिया।

राज्यमंत्री की थाने में की थी हत्या

सूत्रों के मुताबिक भाजपा सरकार में राज्य मंत्री रहे संतोष शुक्ला से किसी बात को लेकर विकास दुबे से अनबन हो गयी थी। इसी पर संतोष सन् 2001 में शिवली थाने में विकास की शिकायत करने पहुंचे थे, जिसकी जानकारी विकास को हो गयी और फिल्मी अंदाज में संतोष की हत्या कर दी। हालांकि साक्ष्यों के आभाव में विकास बरी हो गया था। इसके बाद से उत्तर प्रदेश की सभी सत्ताधारी पार्टियों में उसका सिक्का चलता रहा और पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करने से बचने का प्रयास करती थी।

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