बारह बरस से खाना बदोसो जैसी जिंदगी जी रहे हैं घाघरा के ये कटान पीड़ित !

न प्रशासन को इनकी सुध आई न शासन को,जन प्रतिनिधि भी नही दे रहे ध्यान

अशोक सोनी/ कुतुब अंसारी

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जरवल बहराइच।”नर्म बिस्तर की जगह,खुद को बिछा लेते है लोग। बाजुओ को मोड़ कर तकिया बना लेते है लोग।। “ताहिर फ़राज रामपुरी” का ये शेर घाघरा के उन कटान पीड़ितों पर तो पूरी तरह सटीक बैठ रहा है जिनका सब कुछ घाघरा मइया ने छीन लिया इस तरह के नदी के कटान पीड़ितों के पास अब सर छिपाने का कोई सहारा तक नही है कई-कई दिन तक उनके चूल्हे नही जलते पूरी-पूरी रात पूस की ठिठुरन भारी सर्द हवाओ मे कैसे रात गुजारते है प्रस्तुत है”दैनिक भास्कर”की खास रिपोर्ट*

जरवल से लखनऊ की ओर हाइवे की सड़क अठ्ठेसा से झुकिया तक रोड के किनारे पटरी के नीचे सैकड़ो से ऊपर घाघरा के कटान पीड़ितों ने वर्ष 2007 से खाना बदोसो की तरह अपने सर को छिपाने के लिए फूस की झोपड़ी बना कर रह रहे हैं जिनके सामने दो वक्त की रोटी के लाले है।पूस की हांड कपा देने वाली रात इन कटान पीड़ितों के लिए काल से कम कतई नही होती पीड़ितों की इस दुर्दशा को प्रशासनिक अमला हर रोज देखता हुआ इस हाइवे पर गुजर जाता है जनप्रतिनिधियो की लग्जरी गाड़ियों के बंद शीशे मे बैठे सफ़ेद पोश भी कभी इन पीडितो की सुध नही ली कि इनके भी चूल्हे जल भी रहे हैं या नही इनके तन पर कपड़े है भी की नही शीत लहरी मे ये लोग कैसे रात गुजारते है का दर्दे-ए-हाल तक जानने की जहमत नही करते जो घाघरा के इन कटान पीडितो के लिए यक्ष प्रश्न बन चुका है आखिर कौन करेगा इनकी मदद कब उठेगे लोगो के हाथ जब ये खाना बदोस भी सकूँन से सो पावेगे।

दैनिक भास्कर के इन पत्रकारों ने कुछ और जानने का प्रयास किया तो न्यामत पुर दृतीय के विश्राम,सोहं ल,जानकी,इंदर,झमेला,मूर्ति देवी,मिश्री लाल ने बताया कि साहिब हम पंच भी लम्बी कास्तकारी के मालिक थे 2007 मा घाघरा मइया ने सब कुछ छीन लिया लहलहाती फसल खेत घर कुरिया सब कुछ घाघरा मइया मे समाय गया बारह साल गुजर गए न तौ सरकार को हमारी सुध आई है न सांसद व विधायको को पी एम आवास से लेकर शौचालय तक हम सबन के लिए सपना से कम नाही कुछ आवासीय पट्टा जो मिला भी हम पंच काबिज न होई पाय दबंगन के ऊपर कब्जा है जैसी तमाम बाते बता कर रोने लगे  ये कहानी इन चन्द लोगो तक नही है बल्कि सैकड़ो कटान पीड़ित इसका रोना रो रहे हैं

जिनकी चीख पुकार कोई सुनने वाला नही है।भास्कर की इस पड़ताल से पता चला कि वर्ष 2007 मे जब घाघरा की तेज काटन हुई तब न्यामत पुर प्रथम,दृतीय,रेती हाता,नासिर गंज,अहाता,दिकौली खुरर्द,भदरासी आदि तमाम गाँवो के लोगो को घाघरा मइया ने पूरी तरह तबाह कर दिया।आज ये पीड़ित जन अठ्ठेसा से झुकिया तक सैकड़ो परिवार आदम पुर नहर के पटरी से लेकर मतरे पुर पुरैनी तीन सौ तक घाघरा घाट के फार्म हाउस फसल अनुसंधान केन्द्र तक आदम पुर तट बंध पर दो सौ के करीब लोग खाना बदोसो जैसी जिन्दगी जीने को मजबूर है पर इनकी सुध जिम्मेदारो को कब आवेगी एक यक्ष प्रश्न बन कर रह गया है।

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