मिलिए इन राजनेताओं से जो चीफ मिनिस्टर बनने के बाद बने मिनिस्टर

-यूपी रामनरेश और पंजाब भ_ïल सीएम के बाद डिप्टी सीएम
-तामिलनाडु में सीएम रहे पन्नीरसेल्वम कई बार बने मिनिस्टर
-गुजरात में भी सुरेश मेहता सीएम बनने के बाद मंत्री
-मध्यप्रदेश में बाबूलाल भी सीएम बनने के बाद रहे मंत्री

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-योगेश श्रीवास्तव

लखनऊ। सियासत में कुछ भी असंभव नहीं है। कब कौन कहां से कहां आ जाए और कब कोई कहां से कहां पहुंच जाए कह नहीं सकते। हाल ही में महाराष्टï्र में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को देखकर तो ऐसा ही लगा। महाराष्टï्र के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक शंकरराव चव्हाण वहां कीउ मौजूदा गठबंधन सरकार के मुखिया उद्वव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने है। अशोक शंकरराव चव्हाण महाराष्टï्र में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार का नेतृत्व कर चुके है। वे महाराष्टï्र के मुख्यमंत्री रह चुके शंकरराव चव्हाण के पुत्र है।

26/11 के मुंबई हमलों के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने इस्तीफ ा दे दिया था, तब अशोक शंकर राव चव्हाण को सीएम बनाया गया था, 2009 में फि र से चुनाव हुए और इस बार भी अशोक चव्हाण ही सीएम बने, हालांकि महज़ साल भर तक ही रह पाएं, आदर्श सोसायटी स्कैंडल के बाद उन्हें इस्तीफ ा देना पड़ गया था, अब यहीं अशोक चव्हाण उद्धव ठाकरे की सरकार में कैबिनेट मंत्री है।

अशोकशंकर राव चव्हाण को महाराष्टï्र में दो बार मुख्यमंत्री रह चुके है। महाराष्टï में वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री नहीं है जो मुख्यमंत्री से मंत्री बने है। इस तरह के कई उदाहरण देश के दूसरे राज्यों से भी मिलते है जहां मुख्यमंत्री रहने के बाद उपमुख्यमंत्री या मंत्री बने। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ऐसा ही कुछ हुआ था। 1977 में प्रदेश में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार के मुखिया रामनरेश यादव बने थे।

राजनीति उठापटक के चलते उन्हे पद से हटाकर बनारसीदास गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया। बनारसीदास गुप्त की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रह चुके रामनरेश यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। प्रदेश में इस तरह का अभी तक यह पहला और आखिरी उदाहरण देखने सुनने को मिलता है। इसी तरह यूपी के पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में उमा भारती के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बाबू लाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया। बाबूलाल गौर भी तकरीबन साल भर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके है। 2004 में उमा भारती के खिलाफ हुबली दंगे के केस में अरेस्ट वॉरंट निकला था, उसके बाद उन्होंने इस्तीफ ा दे दिया,तब मुख्यमंत्री बने बाबूलाल गौर, जो अगस्त 2004 से नवंबर 2005 तक मुख्यमंत्री रहे, उनके बाद शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने बाबूलाल गौर शिवराज सिंह सरकार में मंत्री पद पा गए।

ऐसा ही राजनीतिक घटनाक्रम पंजाब में भी देखने को मिला जहां मुख्यमंत्री रह चुकी राजिन्दर कौर भ_ïल बाद में उपमुख्यमंत्री बनी। राजिन्द्रर कौर भ_ïल पंजाब की पहली महिला मुख्यमंत्री थी। मुख्यमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 21 नवंबर से 11 फरवरी 1997 तक रहा जबकि इससे पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 6जनवरी 2004 से एक फरवरी 1997 तक ही रहा। वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष भी रही। राजिन्द्रर कौर भ_ïल किसी प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने वाली आंठवी नेत्री थी। इसी तरह तामिलनाडु में मुख्यमंत्री रहे पन्नीरसेल्वम को ही वहां की छह बार मुख्यमंत्री रही जयललिता का उत्तराधिकारी माना जाता था।

पनीरसेल्वम का केस बड़ा दिलचस्प है। ये सीएम की कुर्सी पर चढ़ते-उतरते रहे, और मंत्री की कुर्सी पर भी आराम फ रमाते रहे, सबसे पहले पनीरसेल्वम सीएम बने सितंबर 2001 में, जब जयललिता को सुप्रीम कोर्ट ने सीएम पद छोडऩे के लिए कहा था, उस वक्त वो तकरीबन छह महीने तक सीएम रहें,जयललिता लौटीं और उन्होंने अपनी सीट संभाल ली, पनीरसेल्वम ने विभाग संभाला दूसरी बार भी ऐसा ही कुछ हुआ,जयललिता को आय से ज़्यादा संपत्ति के मामले में सज़ा हुई, उनकी गैरमौजूदगी में फि र से पनीरसेल्वम सीएम बने, इस बार भी महीना सितंबर का ही था, तारीख थी 29 सितंबर 2014 मई 2015 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जयललिता को बरी कर दिया,पनीरसेल्वम को फि र से गद्दी खाली करनी पड़ी, साल भर बाद उन्होंने जयललिता कैबिनेट में फि र से मंत्रीपद सुशोभित किया, तीसरी बार वो तब सीएम बने जब जयललिता की दिसंबर 2016 में जयललिता की मौत हो गई। इसी तरह का किस्सा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में भी हो चुका है।

जहां सुरेश मेहता गुजरात के सीएम रहे थे, 1995 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने अपने साथी शंकरसिंह वाघेला की बग़ावत के बाद इस्तीफ ा दे दिया था,उसके बाद सुरेश मेहता को मुख्यमंत्री बनाया गया, अक्टूबर 1995 से सितंबर 1996 तक वो गुजरात के सीएम रहे,1998 में जब बीजेपी फि र से सत्ता में लौटी और केशुभाई पटेल फि र से सीएम बने, सुरेश मेहता को फि र से कैबिनेट मिनिस्टर बन गए।

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