कानपुर में किडनैपिंग के बाद मर्डर: 30 लाख की फिरौती देने के बाद भी नहीं बची बेटे की जान, आईपीएस समेत 11 पुलिसवाले सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के कानपुर में किडनैपिंग के बाद मर्डर का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक महीना पहले  लैब टेक्निशियन संजीत यादव का अपहरण उसके ही दोस्तों ने किया था। गुरुवार को इस मामले में दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपहरण के चार दिन बाद ही संजीत की हत्या कर दी थी और लाश को पांडू नदी में फेंक दिया था। लैब टेक्नीशियन संजीत के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पुलिस की जानकारी में अपहरणकर्ताओं को तीस लाख की फिरौती दी, लेकिन फिर भी उनका बेटा नहीं बचा। जिसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एक आईपीएस समेत 11 लोगों को सस्पेंड कर दिया है।    

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अब एडीजी करेंगे मामले की जांच
एक महीने तक इस मामले की तह तक न पहुंच पाने और परिवार द्वारा फिरौती के आरोपों के बाद कानपुर की एएसपी आईपीएस अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, अपहरण के समय डिप्टी एसपी रहे मनोज गुप्ता,  चौकी इंचार्ज राजेश कुमार समेत 5 और पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। 6 सिपाहियों को भी सस्पेंड किया गया है।  चौकी इंचार्ज चरणजीत राय पहले ही सस्पेंड हो चुके हैं। एडीजी बीपी जोगदंड पूरे मामले की जांच करेंगे। वह परिवार के उन आरोपों की भी जांच करेंगे, जिसमें परिजनों ने कहा था कि पुलिस के सामने 30 लाख रुपए की फिरौती दी थी। एडीजी को तुरंत कानपुर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। 

एक महीने पहले हुआ था अपहरण

शहर के बर्रा इलाके में रहने वाले संजीत का 22 जून को अपहरण किया गया था। 29 जून को उसके परिवार वालों के पास फिरौती के लिए फोन आया। 30 लाख रुपए फिरौती मांगी गई की थी। परिवार ने पुलिस को सूचना दी तो जिस नंबर से फोन आया था उसे सर्विलांस पर लगा दिया गया, लेकिन संजीत या आरोपियों का पता नहीं चल सका।

घर-जेवर बेचकर फिरौती की रकम जुटाई
संजीत के परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने घर, जेवर बेचकर और बेटी की शादी के लिए जमा किए पैसे मिलाकर 30 लाख रुपए जुटाए थे। 13 जुलाई को पुलिस के साथ अपहरणकर्ताओं को पैसे देने गए। अपहरणकर्ता पुलिस के सामने से 30 लाख रुपए लेकर चले गए। इसके बाद भी बेटा नहीं मिला तो परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना के बाद एसएसपी ने बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत रॉय को सस्पेंड कर दिया था।

पैथोलॉजी लैब खोलने की योजना बताना भारी पड़ा
पुलिस के मुताबिक, संजीत के साथ एक लैब में काम कर चुके उसके 2 दोस्त 22 जून को उससे मिले थे। वे संजीत को पास के ढाबे पर खाना खिलाने ले गए। वहां तीनों ने शराब पी। नशे की हालत में संजीत ने दोस्तों को बताया कि मैं खुद पैथोलॉजी खोलने वाला हूं। सभी तैयारियां कर ली हैं। संजीत की बात सुनने के बाद उसे ढाबे से ही अपहरण कर लिया गया। पनकी में रहने वाले कुलदीप ने पूरी साजिश रची। इसमें कुलदीप की गर्लफ्रेंड और कुलदीप के दोस्त ज्ञानेंद्र, रामजी शुक्ला समेत 3 अन्य लोग भी शामिल थे।

बाइक झाड़ियों में छिपाई, ताकि सुराग न मिले
दोस्तों ने संजीत की बाइक रामादेवी में झाड़ियों के बीच छिपाई थी। कुलदीप ने अपनी गर्लफ्रेंड को पत्नी बताकर रतनलाल नगर में किराए का रूम लिया था। संजीत को रतनलाल नगर में रखा था, उसे नींद और नशे का इंजेक्शन देते थे। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती मांगने के लिए सिम कार्ड खरीदे थे। संजीत आरोपियों को पहचानता था, इसलिए पकड़े जाने के डर से उन्होंने 26 जून को उसकी हत्या कर दी थी। एसएसपी दिनेश कुमार के मुताबिक, संजीत का अपहरण करने वालों में उसके 2 खास दोस्त थे।

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