राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट : इंटरनेट के इस्तेमाल में पीछे महिलाएं

 डॉ. मोनिका शर्मा     

वैश्विक स्तर पर लोगों को जोड़ने वाली  इंटरनेट की  दुनिया में भी भारतीय महिलाएं काफी पीछे हैं | डिजिटल इंडिया के हर मुट्ठी में मौजूद स्मार्ट फोन और सस्ते डेटा की उपलब्धता वाले दौर में भी आधी आबादी की इंटरनेट के इस्तेमाल  से दूरी बनी हुई है | यह वाकई विचारणीय है कि हमारे यहाँ  जागरुकता, जुड़ाव, विचार विमर्श और पल-पल अपडेट होती सूचनाओं से जोड़ने वाले साइबर संसार में देश की आधी आबादी आज भी अपनी पूरी मौजूदगी दर्ज नहीं करवाई पाई है | 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2019-20 में किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की हालिया  रिपोर्ट   के मुताबिक भारत में इंटरनेट के इस्तेमाल में महिला और पुरुष के बीच बड़ा अंतर है |  देश के कुल 28 राज्यों और 8  केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 राज्यों और 5  केंद्रशासित प्रदेशों में इंटरनेट के इस्तेमाल   को लेकर हुआ  सर्वेक्षण  बताता है कि देश के 10  प्रान्तों और 2  केंद्रशासित प्रदेशों  में औसतन हर 10 में से 6 महिलाओं ने अपने पूरे जीवन में इंटरनेट का इस्तेमाल कभी नहीं किया |  विचारणीय यह भी है इन्टरनेट की दुनिया में मौजूदगी    से जुड़ी ऐसी स्थितियां बिहार से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक, सभी प्रान्तों में देखने को मिल रही हैं | सर्वेक्षण बताता है कि महाराष्ट्र में औसतन हर 10 में से लगभग 4 महिलाओं और गुजरात में औसतन हर 10 में से 3 महिलाओं ने इंटरनेट का इस्तेमाल कभी नहीं किया तो बिहार में 10 में से 8 महिलाएं इस डिजिटल दुनिया से दूर हैं | खासतौर पर ग्रामीण महिलाएँ  इस मामले में काफी पीछे हैं | गौरतलब है कि निल्सन होल्डिंग्स के साथ इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की  बीते साल की रिपोर्ट ‘इंडिया इंटरनेट 2019’ बताती है कि भारत में  इंटरनेट  उपयोग  की  बढ़ती रफ्तार के बावजूद इंटरनेट के इस्तेमाल में लैंगिक तौर पर काफी अंतर है | 

इस रिपोर्ट में सामने आया था कि देश में जहां 25.8 करोड़ पुरुष इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वहीं महिलाओं की संख्या इसके मुकाबले आधी  ही है |   हमारे यहाँ 67 फीसदी पुरुषों के मुकाबले  केवल 33 प्रतिशत महिलाएं ही इंटरनेट उपयोग करती हैं | शहरी  क्षेत्रों में 62 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 38 प्रतिशत महिलाएं और ग्रामीण क्षेत्रों  में 72 फीसदी  पुरुषों की तुलना में महज 28 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं |  ऐसे में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5  की  रिपोर्ट  के ताज़ा आंकड़े भी इसी बात को पुख्ता कर रहे हैं | सर्वेक्षण में शामिल  प्रदेशों और केंद्रशासित प्रदेशों की फेहरिस्त में आंध्र प्रदेश, असम,  बिहार, गुजरात,  कर्नाटक,  महाराष्ट्र,  मेघालय,  तेलंगाना,   त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल,  दादरा एवं नागर हवेली, दमन एवं दीव और अंडमान निकोबार द्वीप समूह  ऐसे राज्य हैं जिनमें  40 प्रतिशत से कम महिलाओं ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है |   

बीते कुछ बरसों में दुनिया के हर कोने में  इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ी है |  हमारे देश में भी महानगरों से लेकर गाँवों-कस्बों तक वर्चुअल दुनिया से जुड़ने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़ा है |  हर उम्र, हर तबके के लोग साइबर संसार से जुड़ रहे हैं | मौजूदा समय में देश में करीब  74 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं |   इतना ही नहीं हमारा देश दुनिया के सबसे तेज़ रफ़्तार से इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़ने वाले देशों में  भी शामिल है |  ग़ौरतलब है कि  इंटरनेट उपयोग के मामले में  में भारतीय चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं | बावजूद इसके यह भी सच है कि इन यूजर्स में महिलाओं का आंकड़ा काफी कम है |  कमोबेश देश के हर हिस्से में     महिलाओं की तुलना में पुरुष यूजर्स अधिक हैं |  लैंगिक भेद वाली यह स्थिति भी विचारणीय है क्योंकि देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने इंटरनेट का कभी इस्तेमाल नहीं किया है |   

भारतीय महिलाओं  की  डिजिटल दुनिया में मौजूदगी से जुड़ी ऐसी स्थितियाँ वाकई विचारणीय हैं |  हालिया  बरसों में  महिलाओं में  साक्षरता ही नहीं उच्च शिक्षा के आंकड़े भी बढे हैं |  देश में महिलाओं की औसत साक्षरता दर 87 प्रतिशत है |  ऐसे में आंकड़ों से परे  इंटरनेट के इस्तेमाल से  जुड़ी यह संख्या महिलाओं  की शैक्षिक स्थिति को भी सामने  रखती है |  सर्वेक्षण के अनुसार जिन राज्यों में महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल कम करती हैं,वहां पर आधी आबादी की साक्षरता दर भी कम है |  जिसका सीधा सा अर्थ यह है कि  शिक्षा और इंटरनेट के इस्तेमाल के बीच भी सीधा संबंध है |  बिहार में महिलाओं की औसत साक्षरता दर केवल 57  फीसदी है और  इंटरनेट इस्तेमाल करने में यहाँ की महिलाएं अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे हैं | सर्वेक्षण में बताया गया है कि जिन राज्यों और  केंद्र शासित प्रदेशों में 40 प्रतिशत से कम महिलाओं ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है, उनमें बिहार 20.6 फीसदी के साथ आखिरी पायदान पर है जबकि 38 फीसदी  उपयोग  के साथ महाराष्ट्र  पहले स्थान पर है | 

दरअसल, आभासी दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में भी आधी आबादी को वास्तविक धरातल से जुड़ी बातों और हालातों के चलते  भी पीछे रहना पड़ता है |  महिलाओं और पुरुषों के बीच मौजूद इस ऑनलाइन गैप के पीछे  छुपे कारणों में  कई सामाजिक-पारिवारिक वजहें भी शामिल हैं |   जिनके चलते हर तरह की  खबरें पाने और पल भर में जरूरी जानकारियां  जुटाने  वाली इंटरनेट की दुनिया में महिलाओं का दखल कम है |  हमारे  यहाँ घर-बाहर दोनों मोर्चों पर जदोज़ह्द में  जुटी महिलाओं की प्राथमिकताएं पुरुषों से काफी अलग  हैं |

  ग्रामीण महिलाओं में  डिजिटल साक्षरता की कमी तो शहरी महिलाओं का साइबर उत्पीड़न, उन्हें इस दुनिया से दूर करता है | इंटरनेट की दुनिया में होने वाला अभद्र व्यवहार और सुरक्षा से जुड़े कारण भी महिला  यूजर्स के लिए बड़ी समस्या हैं | देश के कई हिस्सों में घंटों पैदल चलकर पीने का पानी जुटाने या खेती-किसानी से लेकर घरेलू जिम्मेदारियों तक को संभालने वाली श्रमशील जीवनशैली महिलाओं को इंटरनेट से जुड़ने का मौका ही नहीं देती | इतना ही नहीं बड़ी संख्या में महिलाएं अशिक्षित और आर्थिक रूप से परिवारजनों  पर निर्भर भी हैं | सामाजिक रूप से कई घरों में  महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र ही नहीं हैं।  कई  गाँवों-कस्बों में  तो बेटियों को स्मार्ट फ़ोन इस्तेमाल नहीं करने देने के पंचायती फरमान तक जारी किये गए हैं | 

मौजूदा दौर में  इंटरनेट  से दूरी कई मायनों में जागरुकता और सजगता से जुड़ी सूचनाओं से दूर होने जैसा है | यही वजह है कि देश की आधी आबादी को पूरी तरह  इंटरनेट का  इस्तेमाल करने  की सुविधा और मौका मिले बिना  उनके कई मोर्चों पर पीछे छूटने की परिस्थितियाँ बनी हुई  हैं |  कहना गलत नहीं होगा कि  सूचनाओं और सजगता के इस दौर में एक इंटरनेट  एक साथी की तरह है | जो  सर्च और अपडेट की  कड़ियों के जरिये लोगों को दुनिया से जोड़े  रखता है |  ख़बरों की पहुँच और खैरियत लेने-देने का सक्रिय जरिया बनता है |  जानकारियों तक यूजर्स की  पहुंच बढ़ाता है | गौरतलब है कि #मीटू कैंपेन जरिये शोषण की आवाज़ उठाने वाली महिलाओं  के स्वर को  इंटरनेट ने ही दुनियाभर में पहुंचाया था |  

ऐसे में  कमोबेश हर मोर्चे पर असमानता और उपेक्षा झेलने वाली स्त्रियों का इंटरनेट की दुनिया से जुड़ने में पीछे रह जाना भी चिंतनीय है | खासकर तब जब हमारे देश में इंटरनेट सेवायें तेज़ी से विस्तार पा रही हैं | पिछले साल की  निल्सन होल्डिंग्स के साथ इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ‘इंडिया इंटरनेट 2019’ के मुताबिक  देश में 45.10 करोड़ मासिक सक्रिय इंटरनेट यूजर  थे | देश के सक्रिय इंटरनेट यूजर्स की संख्या पर  इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इस  रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था कि पुरुषों के मुकाबले इंटरनेट इस्तेमाल में महिलाएं काफी पीछे हैं | यही वजह है कि ग्रामीण भारत में  डिजिटल दुनिया में    लैंगिक असंतुलन को दूर करने के लिए  गूगल और टाटा ट्रस्ट ने  ‘इंटरनेट साथी’ प्रोग्राम के तहत इंटरनेट इस्तेमाल के लिए महिलाओं को शिक्षित करने की शुरुआत की थी | डिजिटली साक्षर ये महिलाएं  अपने समुदाय और आसपास के गांवों की अन्य  महिलाओं को प्रशिक्षित करती हैं | 

 जरूरत इस बात की है कि देश के हर हिस्से , हर तबके में  इस माध्यम की अहमियत के प्रति जागरुकता लाने के प्रयास तेज किये जाएँ | आज में दौर में  अपनी बात कहने और जानकारियाँ  हासिल करने के लिए महिलाओं का इंटरनेट से जुड़ना आवश्यक है |  महिलाओं और बेटियों को  शिक्षा और स्वास्थ्य से  जुड़ी जरूरी योजनाओं और संस्थानों  की जानकारियाँ डिजिटल माध्यमों के  जरिये हासिल करने में आसानी होती है  | यह संपर्क और सूचनाओं का सहज और त्वरित माध्यम  है |  यही वजह है कि इस डिजिटल दुनिया में महिलाओं का पीछे रहना चिंतनीय है |  

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