इस मासूम चेहरे पर न जाना जनाब, इस महिला के खतरनाक काम ने बड़े-बड़ो को किया हैरान..

बार्डर पर 50 ग्राम स्मैक सहित नेपाली महिला गिरफ्तार

रूपईडीहा/बहराइच। रूपईडीहा कस्बा स्मैक का ट्रांजिट प्वाइंट बना हुआ है। बाराबंकी से स्मैक बहराइच, नानपारा व रूपईडीहा तक तस्कर लाते है। रूपईडीहा से स्मैक नेपाल के विभिन्न जिलों सहित काठमांडू तक पहुंच रही है। भारत मे स्मैक के साथ पकड़े गये तस्कर को अदालत से जमानत मिल जाती है।

परन्तु नेपाल मे स्मैक के साथ पकड़े गये तस्कर बिना सजा काटे रिहा नही होते है। पड़ोसी नेपाली जिला बांके की पुलिस ने एक नेपाली महिला के पास 50 ग्राम स्मैक बरामद किया है। बांके जिले के एसपी ओम कुमार राना ने बताया कि सोमवार की शाम 08 बजे एनसीबी व जमुनहां थाने के जवान रूपईडीहा से आने वालें लोगों की जमुनहां चेक पोस्ट पर जांच कर रहे थे। तभी एक महिला रूपईडीहा से आते दिखाई दी।

उसको रोक कर महिला जवानों ने तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास से 50 ग्राम स्मैक बरामद हुआ। पकड़ी गयी महिला संजना देवी 28 वर्ष नेपालगंज उपमहानगर पालिका 3 की निवासिनी है। उसने बताया कि यह स्मैक रूपईडीहा कस्बे से खरीद कर नेपालगंज ले जा रही थी। जमुनहां थाना के इंचार्ज विष्णु गिरि ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते भारत से आने वाले लोगों की संघन जांच की जा रही है। इस लाक डाउन की अवधि मे यह सबसे बड़ी कामयाबी है।

लाक डाउन मे भी स्मैक के कारोबारी कस्बे मे हावी

थोक कारोबारियों के गिराबान तक नही पहुंच रही पुलिस

रुपईडीहा l इस समय कोविड 19 महमारी के चलते भारत नेपाल सीमा सील है। भारत से नेपाल नेपाली नागरिक व नेपाल से भारत भारतीय नागरिक को उनका आईडी देखकर आने व जाने दिया जा रहा है। इस महामारी मे भी स्मैक के कारोबारी पीछे नही है। रूपईडीहा कस्बे मे एक दशक से शुरू हुआ स्मैक का व्यापार दिन ब दिन बढ़ता ही चला गया। आज आलम यह है कि सैकड़ों युवा इस लत के शिकार हो गये है। रूपईडीहा की स्मैक नेपाली पर्वतीय जिलों बांके, बर्दिया, कचंनपुर, कैलाली, दांग और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक पहुंच गया है। भारत से ज्यादा इस संबंध मे नेपाल ज्यादा चिंतित है। क्यो कि इण्डो नेपाल बार्डर पर भारत व नेपाल के सुरक्षा कर्मियों ने अधिक्तर नेपाली युवकों व स्मैक पीने वालों को ही पकड़ा है। स्मैक बाराबंकी जिले के टेपरा सहित आस पास के गांवों से बहराइच आती है।

बहराइच से नानपारा व नानपारा से रूपईडीहा आती है। इस धंधे मे कुछ सफेदपोश का भी हाथ है। जानकार ने यह भी बताया कि इन सफेदपोशों की काली कमाई 20-25 हजार रूपया प्रति दिन है। कुछ दिन पूर्व स्मैक का ट्राजिंट प्वाइंट नानपारा हुआ करता था। अब स्मैक कारोबार का हब रूपईडीहा बन चुका है। पुलिस व एसएसबी फुटकर स्मैक के खरीद-फरोख्त करने वालों को पकड़ कर अपनी पीठ थपथपा लेती है। जब तक सफेदपोश स्मैक के बड़े कारोबारी नही पकड़े जायेगे। तब तक स्मैक की बिक्री जारी रहेगी। एक उपाय यह भी है कि एसपी की स्पेशल टीम के जवान सादी वर्दी मे आकर कस्बे मे घूमे और यहां की सुरक्षा एजेंसियों की भनक न लगे। तभी बड़े मगरमच्छ पकड़े जा सकते है। 

स्मैक पीने से आधा दर्जन युवाओं की मौत
जानकार लोगों ने बताया कि स्मैक की लत के कारण रूपईडीहा के टिल्लू, पप्पू तेली, निसार, बचऊ, यादव, इम्ताज अली, मर्जीना, शमीम व इसी की पत्नी, झल्लू, मजनू का लड़का, मोटे गोढ़िया, दिनेश की मौत स्मैक पीने से हुई है।

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