औषधि गुणों से भरपूर लहसुन दे रहा कोरोना को मात, आयुर्वेद के धुरंधर विद्वान ने बताया इसे अमृत 

औषधीय गुणों से भरपूर लहसुन के प्रयोग से कोरोनावायरस को मात दिया जा सकता है। आयुर्वेद के धुरंधर विद्वान आचार्य चरक ने भी लहसुन के तमाम फायदे गिनाए हैं। कुल मिलाकर इसे आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। आयुर्वेद एक वेद है। और वेदों में जो निहित है वह और कहीं नहीं है। यह कहना आयुर्वेदाचार्य डॉ नवनीत गुप्ता का है।

डॉक्टर नवनीत गुप्ता मौजूदा समय में फर्रुखाबाद जिले की लिंजीगंज सिविल अस्पताल में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनका कहना है कि लहसुन में तमाम औषधि गुण होने के कारण इसे प्रमुख रूप से सब्जियों में प्रयोग किया जाता है। लेकिन यदि लहसुन को खाली पेट दो या तीन पुथि इस्तेमाल किया जाए तो यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसमें तमाम औषधि गुण होने के कारण सर्दी, जुकाम, खांसी, अस्थमा और निमोनिया में भी रामबाण साबित होता है। डॉ नवनीत गुप्ता का कहना है कि लहसुन के गुण यहीं समाप्त नहीं होते। बल्कि यह बढ़ती उम्र को रोकता है।

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शहद के साथ लहसुन का प्रयोग करने से चेहरे की झुर्रियां तनाव को पूरी तरह से खत्म कर देता है। कैंसर रोग में भी लहसुन गुणकारी है। आयुर्वेद के इतिहास में लहसुन का प्रयोग कई रोगों में लाभकारी बताया गया है। दिल के रोगियों के लिए लहसुन रामबाण है। लहसुन धमनियों में रक्त जमा नहीं होने देता और शरीर मे मौजूद विषाणु को पसीना अथवा मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। लहसुन का प्रयोग उच्च रक्तचाप और डायबिटीज में भी लाभकारी है। खाली पेट लहसुन खाने से यह रोग पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। आयुर्वेद के धुरंधर जानकार चरक ने अपनी संहिता में लहसुन के गुणों को उजागर किया है। जिसमें स्पष्ट कहा है कि लहसुन सभी प्रकार के संक्रमण को दूर करता है। चाहे वह किसी वायरस का संक्रमण हो या फिर अन्य हो। लहसुन हर बीमारी में रामबाण है।

डॉ. नवनीत गुप्ता का कहना है लहसुन में ऐसे तत्व मौजूद है जिनसे सभी प्रकार की रोग दूर हो जाते हैं। उनका कहना है कि सब्जियों के अलावा खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से उसके गुणधर्म 10 गुना और बढ़ जाते हैं। मौजूदा समय में काफी संख्या में लोग नियमित रूप से लहसुन का खाली पेट प्रयोग करके कोरोना जैसे वायरस को मात दे रहे हैं। औषधीय गुणों से भरपूर लहसुन शरीर के अंदर मौजूद विषाणु को बाहर निकाल देता है। कोरोना वायरस भी एक परजीवी विषाणु है। जिसका इलाज लहसुन के प्रयोग से असंभव है। डॉ.नवनीत गुप्ता का कहना है कि हर उम्र के व्यक्ति को लहसुन का प्रयोग मौजूदा समय में करना चाहिए ।इस समय पर्यवरण दूषित हो गया है और तरह-तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं।

इस वजह से लहसुन का प्रयोग करके अपने देश की चिकित्सा पध्दति आयुर्वेद को अपनाएं। आयुर्वेद मैं बहुत शक्ति है। जो अन्य पैथियो में नहीं है। इसलिए तो मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है, है आजकल की डॉक्टरी जिसकी महामाया मई, यह आसुरी नामक चिकित्सा है यहीं से ली गई। थे हार जाते अन्य देशों के वेेद्य जब रोग से, हम भस्म करते थे उसे बस भस्म के ही योग से। अथर्व वेद में भी हमारे ऋषि मुनियों ने घरेलू औषधियों से उपचार करना बताया है।

डाक्टर नवनीत गुप्ता का कहना कि अब मनुष्य को पुरानी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को अपनाना होगा। एलोपैथिक चिकित्सा जिन रोगों को असाध्य बताती है। आयुर्वेद में उनका इलाज संभव है। उनका कहना है कि लंका में राम रावण युद्ध के दौरान लक्षण को शक्ति बाण लगना और लक्षण की बेहोशी को दूर करना आयुर्वेद का ही कमाल था। डाक्टर नवनीत का कहना है कि आयुर्वेद में लहसुन को अमृत मानने का प्रमुख कारण यह भी है।कि पेट से सम्बंधित अधिकांश औषधियों के निर्माण में लहसुन का प्रयोग किया जाता है

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