यूपी वालो जरा आप भी जान लीजिये : कुर्सी पर बैठे है ऐसे साहब, जिन्हें इस कदर गुस्सा आता है..

-मुजफ्फरनगर की डीएम सेल्वा कुमारी ने एसडीएम को चौपाल में लगाई फटकार
-अमेठी के डीएम रहे प्रशातशर्मा के हाथ गिरेबा तक पहुंचे तो सीएम ने हटाया
-सेल्फी लेने की गुस्ताखी करने पर आईएएस बी.चन्द्रकला ने युवक को जेल भिजवाया
-एक आईएएस की फटकार पर अनुभाग अधिकारी को पड़ा हार्टअटैक

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योगेश श्रीवास्तव

लखनऊ। गुस्सा किसकों नहीं आता है तो इससे प्रशासनिक अधिकारी कैसे बरी हो सकते है। शासन से लेकर जिलों तक में बैठे अधिकारी कभी-कभी इस कदर अपना आपा खो बैठते है कि वे न सिर्फ सुर्खियों में आ जाते है बल्कि उन्हे निलंबन जैसी कार्रवाई का सामना तक करना पड़ता है। शासन से जिलो तक में बैठे अधिकारियों का गुस्सा कभी सरकार के लिए दुश्वारी का सबब भी बन जाता है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की समीक्षा बैठक में अफसरों से अपना व्यवहार सही रखने की जो नसीहत देते है वह भी बेमानी साबित हो रहे है। मुख्यमंत्री की नसीहत के बावजूद पिछले दिनों अमेठी के डीएम प्रशांत शर्मा द्वारा जनता के बीच एक फरियादी का गिरेबां पकड़ लिए जाने का जो वीडियों वायरल हुआ तो बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गयी। मुख्यमंत्री ने बिना देर किए पूरी ब्यूरोक्रसी को मैसेज देने की गरज से उन्हे हटा दिया।

आईएएस अधिकारी प्रशांत शर्मा इसके पहले भी अपने व्यवहार के कारण कोर्ट की अवमानना के चलते चर्चा में आ चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अमेठी के जिलाधिकारी प्रशांत शर्मा को एक अवमानना मामले में कड़ी फटकार लगायी। मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासनिक अधिकारियेां के खिलाफ की गयी कार्रवाई के बावजूद इसके उनकी कार्यशैली में कोई सुंधार नहीं आ रहा है। हाल ही में मुजफ्फरनगर के सौरम गांव में जनचौपाल के दौरान किसान सम्मान निधि के किसानों की सूची उपलब्ध नहीं होने पर वहां डीएम साहिबा सेल्वा कुमारी जे अपना आपा खो बैठी और एसडीएम दीपक कुमार को न सिर्फ बुरी तरह फटकारा बल्कि उन्हे पैदल भी कर दिया।

गुस्से लाल-ताल डीएम साहिबा ने एसडीएम से सरकारी गाड़ी और फ ाइलें वहीं छोड़कर बस से जिला मुख्यालय जाकर आमद करने के लिए कहा। डीएम साहिबा का गुस्सा यहीं नहीं थमा उन्होंने एसडीएम के खिलाफ की गयी कार्रवाई के साथ ही लेखपाल और सप्लाई इंस्पेक्टर को प्रतिकूल प्रविष्टि भी जारी कर दी। डीएम ने एसडीएम दीपक कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश भी जारी कर दिया। इसी तरह की एक बानगी और सुनिए बाराबंकी के जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह अभी कुछ दिनों पहले ही भरी मीटिंग में अधिकारियों की जमकर लताड़ लगाई और कहा कि प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है जिसकी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।।  जिन अधिकारियों को ईमानदारी से काम करने में रूचि नहीं है वो रिटायरमेंट ले लें अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यही नहीं पिछले साल ही एनेक्सी सचिवालय मे ंविभागीय बैठक के दौरा आईटी इलेक्ट्रानिक विभाग के विशेष सचिव आंद्रा वामसी की फटकार के बाद ही इसी विभाग के अनुभाग अधिकारी विमल चंद्र को दिल का दौरा पड़ा था। वामसी ने फ टकार ने के दौरान विमल चंद्र से इस्तीफा लिखकर लाने के साथ ही यहां तक कहा था कि देखते हैं कि कैसे तुम सकुशल सेवानिवृत्ति पाते हो। फ टकार खाने के बाद विमल चंद्र हांफ ते हुए अपने अनुभाग पहुंचे थे और चक्कर खाकर अनुभाग में ही गिर गए थे। इसी तरह इस समय खनन मामले में विवादों में फं सी आईएएस अधिकारी बी चन्द्रकला जब कुछ साल पहले जब बुलन्दशहर की डीएम थी तो उन्होंने एक पत्रकार पर अपना गुस्सा निकालते हुए उसे जमकर खरी खोटी सुनाई। मामला ये था कि बी. चंद्रकला ने अपने साथ सेल्फ ी खिंचवाने की कोशिश करते एक युवक के खिलाफ  केस कर उसे जेल भिजवा दिया था। लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो उसे माफ करके रिहा कर दिया गया। वह युवक किसी काम से बुलंदशहर कलेक्ट्रेट गया था। आरोप लगा कि इसी बीच वह डीएम चंद्रकला के दफ्तर में पहुंच गया और उनके साथ सेल्फ ी लेने की कोशिश करने लगा था।

इलाहाबाद में कुछ साल पहले एक महिला आईएएस और एसडीएम सदर हर्षिता माथुर को इस कदर गुस्सा आया कि उन्होंने ज्ञापन देने आए एक आप नेता सुनील चौधरी को पुलिस को सौंप दिया।  जेल भेजने से पहले पुलिस ने थाने पर आप नेता की जमकर पिटाई भी की और उनके समर्थन में आए आप के दूसरे कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की कर उन्हें वहां से जबरन भगा दिया। इस नेता का बस इतना कुसूर था कि  वह नेता ज्ञापन देते समय एसडीएम के साथ अपनी फ ोटों खिचवाने लगा था।

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