शिक्षक दिवस : अधिक राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण शिक्षकों का अस्तित्व खतरे में है”

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किसी भी देश के विषय के लिए विकास की बुनियाद एक शिक्षक द्वारा ही रखी जाती है परंतु आज हम एक और अपने देश के विकास और अच्छे भविष्य की कामना करते हुए आगे बढ़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर भविष्य के विकास की बुनियाद को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षकों का अस्तित्व खतरे में है

आखिर ऐसा क्यों है?
हमारे जीवन में शिक्षा की जितनी महत्ता है उससे ज्यादा शिक्षक की महत्ता है आज जब हम बड़े-बड़े व्यापारियों राजनेताओं समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को देखते हैं तो उन जैसा बनने की इच्छा होती है परंतु हम यह नहीं सोचते हैं कि उनको उस मुकाम पर पहुंचाने के लिए प्रेरित व सहायता करने वाला भी कोई शिक्षक ही रहा होगा लेकिन आज लोगों को ना जाने क्या होता जा रहा है उनकी सोच वह विचार शिक्षकों के खिलाफ क्यों हो रहे हैं ? ” आखिर क्यों शिक्षकों को हर मोड़ पर सिर्फ और सिर्फ नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है? क्यों जब हमारे बच्चे हमारे सामने अपने अध्यापक को सरना कहकर उनको उनके नाम से पुकारते हैं तो हम उनको नहीं रोकते है? क्यों सरकारी नई नई नीतियां केवल शिक्षकों पर ही लागू करती हैं जिस पर कुछ शासन पलित पत्रकार देवता अपने अखबारों वह न्यूज़ चैनलों की हैडलाइन मैं लिखते हैंअब गुरुजी का बचना होगा मुश्किल क्या व्यवस्था के सबसे बड़े चोर शिक्षक ही हैं?


कुछ कामयाब लोग जब आज विपद में शिक्षकों से बड़े हो गए हैं जबकि अगर शिक्षक ना होता तो शायद उस कामयाबी और उस पद पर पहुंच भी ना पाते वह क्यों भूल जाते हैं कि उनको वहां तक पहुंचाने में एक शिक्षक का भी योगदान है और जब वह आज काबिल हो चुके हैं तो वह भरी सभा में सरेआम लोगों के सामने किसी छोटी सी बात पर शिक्षकों को अपमानित कर देते हैं और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करके उनको गन भी दे देते हैं|


हमारे समाज में अधिक राजनैतिक हस्तक्षेप के कारण शिक्षकों का अस्तित्व खतरे में है पहले के समय में शिक्षकों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किया जाता था परंतु आज शिक्षकों को पढ़ाने से ज्यादा एमडीएम खुलवाने सूचना बनवाने ऑडिट करवाने पौधे लगवाने पुस्तकालय चलवा ने जूते मौजे ड्रेस किताबें सब्जी मसाले दूध गैस सिलेंडर धोने दबाव इंजेक्शन लगवाने के लिए और इतने सबके बावजूद ना जाने किस ऊल जलूल बात पर सस्पेंड कर देने के लिए नियुक्त किया जाता है|
शिव परमात्मा इस सृष्टि का रचयिता है वैसे ही शिक्षक भी इस समाज का रचयिता है हम परमात्मा जितना नहीं परंतु समाज रचीयता का आदर तो कर ही सकते हैं और कहा जाता है कि शिक्षक ही समाज की आधारशिला है एक शिक्षक अपने जीवन के अंत तक मार्गदर्शन की भूमिका अदा करता है और समाज को सही मार्ग दिखाता है

तभी शिक्षक को समाज में उच्च दर्जा दिया जाता रहा है वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है बिना किसी भेदभाव के एक शिक्षक ही अपने शिष्य को जीवन में सही रास्ता दिखा सकता है प्राचीन काल से ही शिक्षक का दर्जा बहुत ही उच्च वहम रहा है वह समाज का आदर्श होता था शिक्षक के स्वरूप में ईश्वर दत्त की कल्पना की गई है “गुरु ब्रह्मा:गुरुविष्णु: गुरुर्देवो महेश्वरा: |गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मे श्री गुरुवे नमः||”
भावार्थ:- ” गुरु ब्रह्मा है गुरु विष्णु हैं गुरु ही शंकर है गुरु ही साक्षात परब्रह्मा है उन गुरुओं को प्रणाम है”
जिस प्रकार ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है उसी प्रकार शिष्य के संपूर्ण जीवन के निर्माण की बागडोर शिक्षक के हाथों में होती है इसलिए नई शिक्षा नीति के साथ-साथ हमें शिक्षकों के प्रति अपना नजरिया बदलना भी जरूरी है|

विपुल मोहन
नगीना जनपद बिजनौर।

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