आंखें बताती हैं व्यक्ति का स्वभाव, जानिए क्या कहता है आपका…

नई दिल्ली (ईएमएस)। व्यक्ति के बारे में उसके शरीर से भी राज पता चलते हैं। आंखों के रंग और बनावट से व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा है। इसका पता चलता है। बहुत कुछ कहती हैं, बस आंखों की भाषा समझने वाला चाहिए। आंखों से व्यक्ति के चरित्र, सोच और स्वभाव की जानकारी प्राप्त करने का विवरण ग्रंथों में भी है। आंखें आत्मा का सच्चा प्रतिबिम्ब है। किसी व्यक्ति की आंखों को देखकर उसके मन की स्थिति को जाना जा सकता है।

प्रत्येक व्यक्ति की आंखों में स्नेह विश्वास या निराशा आदि में से कई एक प्रवृत्तियां पाई जाती हैं जो उचित समय पर तथा उचित परिस्थिति आने पर स्पष्ट रूप से व्यक्ति के व्यवहार में देखने को मिलती है। अन्तर्मन में क्रोध रखने वाले की आंखें अक्सर लाल दिखाई पड़ती हैं इसी प्रकार आंखों में अन्य मनोभाव जैसे दिल के अन्दर का प्रेम, करूणा, वात्सल्य इत्यादि का पता स्वतः चलने लगता है। इन्हीं सब आंखों के लक्षणों के अनुसार व्यक्ति की मनःस्थिति का रहस्य उजागर होता है। आंखों की पुतलियों का रंग आईने की तरह इंसान के व्यक्तित्व को दर्शाता है। काली और भूरी आंखें ज्यादातर मनुष्यों की होती हैं कुछ लोगों की आंखों का रंग धुंधला, हरा, नीला, ग्रे अथवा मिश्रित होता है। नीली आंखों वाले गंभीर एवं शांतिप्रिय, तेज दिमाग के होते हैं। वहीं हरी आंखों वाले अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक बुद्धिमान होते हैं। हरी आंखों का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में आंखों की बनावट, आकार-प्रकार, चेहरे पर उनकी स्थिति, रंग और चंचलता, दृष्टि के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है।
बादाम के आकार के नेत्र अथवा कमलपत्र के समान नेत्र बेहद शुभ माने जाते हैं। ऐसे लोग जीवन में यश, स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख और सफल जीवन व्यतीत करते हैं। इसके विपरीत तोते की तरह की गोलाकार आंखे व्यक्ति के स्वकेंद्रित, स्वार्थी व चंचल होने का संकेत देती है। कमल के समान आंखें होने पर व्यक्ति भाग्यशाली होता है।

हिरण अथवा खरगोश जैसी आंखों वाला व्यक्ति जीवन भर सुख पाता है। नीली आंखें शनि प्रधान व्यक्तित्व को दर्शाती हैं। हरी आंखें बुध प्रधान व्यक्ति की होती हैं। काली आंखें शनि की स्थिति को दर्शाती हैं। ग्रे आंखें राहु, केतु की स्थिति का आकलन करती हैं। चन्द्रमा प्रधान आंखें चंचल एवं अस्थिर होती हैं। पलके बार-बार झपकने लगती हैं। आंख का महत्व सर्वोपरि है। बिना आंखों के चल पाना बड़ा मुश्किल होता है इसलिए मार्गदर्शन करने वाले ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र कहा गया है।

जो मार्गदर्शन आंखें करती हैं वही मार्गदर्शन अंधेरे में राह दिखाकर ज्योतिष शास्त्र करता है। आंखों के अच्छे स्वास्थ्य और दूसरों की नज़र से बचने के लिए अगर रोज सूर्य को अर्घ्य दिया जाए या भगवान सूर्य के आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया जाए तो आंखों की रोशनी एवं चमक बड़ने लगती है। वस्तुतः कोई भी कथ्य, तथ्य अथवा सत्य अंतिम नहीं होता है।

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