गांवों में कोरोना : लखनऊ के आस-पास के गांवों में स्थिति हो रही विकराल, देखे पूरी रिपोर्ट

यूपी के गांवों में कोरोना संक्रमण की हकीकत भले ही कागज पर उतनी नहीं दिख रही है, लेकिन जमीन पर स्थिति भयावह है। यहां कोविड जैसे लक्षणों के साथ लोगों की मौत हो रही है। लेकिन सरकारी इंतजाम इतने नाकाफी हैं कि न ठीक से जांच हो रही है और न ही अस्पताल में इलाज मिल पा रहा है। सीएचसी-पीएचसी केवल रेफरल सेंटर रह गए हैं। हल्की सी स्थिति असमान्य होने के बाद यहां इलाज के लिए हाथ खड़े कर लिए जा रहे हैं और जिला अस्पतालों में रेफर कर दिया जा रहा। गांव में मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।

गोसाईंगंज के रहमतनगर का हाल, लगातार मौतों से दहशत में ग्रामीण

लखनऊ के आस-पास के गांवों में स्थिति विकराल है। गोसाईंगंज के रहमतनगर गांव के हालात यह हकीकत साफ बयां कर रहे हैं। यहां पिछले महीने 14 दिनों के भीतर सात लोगों की मौत हुई। इनमें सिर्फ दो में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो सकी थी। ग्रामीणों के मुताबिक, बाकी को भी कोरोना जैसे लक्षण थे। इसके अलावा गांव के कई घरों में बुखार, जुकाम और सांस की समस्या के मरीज हैं, लेकिन कोई भी टीम यहां एक बार भी जांच करने नहीं आई और न ही सैनिटाइजेशन करवाया गया है।

सिर्फ दो को हुई थी कोरोना की पुष्टि

रहमतनगर के पूर्व ग्राम प्रधान उमेश वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों रामू गुप्ता, मंशाराम वर्मा, अरविंद कुमार वर्मा, परमहंस वर्मा, दयाराम गुप्ता, प्रदीप और सिराज अहमद की मौत हो गई। इनमें रामू और मंशाराम को ही कोरोना की पुष्टि हुई थी। वहीं, गांव में लगातार हो रहीं मौतों से लोग दहशत में हैं। ब्लॉक अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई तो जिम्मेदारों ने सैनिटाइजर थमाकर पल्ला झाड़ लिया। आखिर में ग्रामीणों ने अपने खर्च पर छिड़काव करवाया।

​गोसाईंगंज सीएचसी पर सिर्फ एक घंटे जांच

गांवों में संक्रमण बढ़ने की आशंका के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रहीं। गोसाईगंज सीएचसी पर दिन में सिर्फ दोपहर 12 से एक 1 बजे तक ही कोरोना जांच होती है। इस सीएचसी पर रहमतनगर, गोसाईंगंज कस्बा, गंगागंज, खुर्दही, सलेमपुर, मीसा, चुरहिया, कबीरपुर, मोअज्जम नगर, अमेठी समेत कई गांवों में हजारों लोग आते हैं। इसके बावजूद सिर्फ एक घंटे जांच हो रही है। गोसाईगंज सीएचली पर एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड भी मुमकिन नहीं है। यहां लंबे समय से रेडियोलॉजिस्ट तैनाती नहीं है। ऐसे में लोगों को इन जांचों के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है।

​नहीं खुलती सरसवां पीएचसी

लखनऊ के सरोजनीनगर स्थित सरसवां को हाल ही नगर निगम सीमा में शामिल किया गया है। इसके बावजूद यहां की पीएचसी महीने में एक या दो दिन ही खुलती है। ऐसे में यहां आने वाली गर्भवतियों को या तो निजी अस्पताल जाना पड़ता है, या 10 किी दूर गोसाईंगंज सीएचसी आना पड़ता है। लखनऊ के सीएमओ डॉ. संजय भटनागर कहते हैं, ‘सभी सीएचसी प्रभारियों को अपने-अपने इलाकों में जांच करवाने के आदेश दिए गए हैं। टेस्टिंग नहीं हो रही तो जांच करवाई जाएगी। सीएचसी पर टेस्टिंग का भी बढ़ाया जाएगा।’

रायबरेली के गांव में एक महीने में 17 मौतें

रायबरेली के सुल्तानपुर खेड़ा गांव बीते एक महीने में 17 लोगों की मौत हो गई तब प्रशासनिक अमला जागा और डोर टु डोर टेस्टिंग करने पहुंचा। गांव में आना-जाना बंद कर दिया गया है। जिन लोगों की मौत हुई, सभी में कोरोना जैसे लक्षण थे लेकिन बुखार, खांसी, सर्दी, सिरदर्द और सांस फूलना। 17 में से 15 का न तो कोविड टेस्ट हुआ था और न ही उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया। इस वजह से सरकारी आंकड़ों में इस गांव में सिर्फ 2 मौतें दिखा रहा है। हरदोई जिले की संडीला तहसील के गोड़वा गांव में पांच दिन में 11 लोगों की मौत हो चुकी है।

​रिपोर्ट बिना इलाज नहीं

गांवों में बिना रिपोर्ट के लक्षण वाले मरीजों को कोई देखने तक को तैयार नहीं है। जबतक जांच की रिपोर्ट आ रही है, तबतक व्यक्ति या तो ठीक हो जा रहा, या बच ही नहीं रहा। गांवों में रिपोर्ट औसतन 8 से 13 दिन के भीतर आ रही है। सुलतानपुर जिले के रूहट्टा गली निवासी शिवाजी सलूखे को बुखार और खांसी की शिकायत हुई तो उन्होंने 1 मई को आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाया और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी तबियत बिगड़ने लगी। कोरोना रिपोर्ट के अभाव में ज्यादातर डॉक्टर उनसे दूरी ही बनाए रखे। उधर संक्रमण से उनकी एक सप्ताह में मौत हो गई। अंतिम संस्कार भी हो गया उनका, उसके बाद 9 मई को शिवाजी की कोरोना रिपोर्ट आई, जिसमें वह पॉजिटिव थे।

​सीएचसी-पीएचसी पर सिर्फ दो घंटे जांच

गांव में इलाज के लिए सीएचसी और पीएचसी हैं। हालत यह है कि यहां डॉक्टरों की मर्जी पर एक-दो घंटे ही कोरोना के टेस्ट हो रहे हैं। वह भी इसलिए कि कागज का पेट भर सकें कि कितने सैंपल लिए। बाराबंकी की बनी कोडर सीएचसी पर केवल दो घंटे के लिए जांच होती है। रायबरेली की सभी पीएचसी पर केवल दोपहर दो बजे तक जांच होती हैं। अयोध्या की खंडासा पीएचसी केवल एक घंटे के लिए खुलती है। सीतापुर की लहरपुर पीएचसी केवल एक घंटे के लिए सैंपल लेती है। जांच का यह हाल है, इलाज की भी स्थिति कोई अच्छी नहीं। सामान्य सर्दी-खांसी-बुखार है तब तो दवा मिल जाएगी। स्थिति असमान्य है तो यहां दवाई नहीं केवल कागज मिलता है कि जिला अस्पताल जाओ।

ग्रेटर नोएडा के गांव में दो सगे भाई समेत 20 की मौत

ग्रेटर नोएडा वेस्ट एरिया के खैरपुर गुर्जर गांव के बाद रोजा जलालपुर पिछले 11 दिनों में दो सगे भाई समेत 20 लोगों की मौत हो गई है। जलपुरा गांव के रविंद्र भाटी ने बताया कि गांव में रहने वाले अतर सिंह का तो परिवार कोरोना ने उजाड़ दिया। शनिवार को दो बेटों को बुखार आया। बड़े बेटे दीपक (25) की रविवार सुबह मौत हो गई। गांव व परिवार के लोग बेटे का अंतिम संस्कार कर घर वापस लौटे थे। घर पर बीमार छोटे बेटे पंकज (23) भी मौत हो गई। हालांकि अभी तक पता नहीं चल सका है कि गांव में लोगों की मौत कोरोना से हो रही है या और किसी बीमारी है।

सरकार का आदेश है कि अगर कहीं पर ज्यादा संक्रमित लोग हों तो वहां जाकर टेस्ट किया जाए। लेकिन गांवों में इस आदेश का पालन होता नहीं दिख रहा। संक्रमितों को भी सीएचसी तक पहुंचकर जांच करवानी पड़ रही है, भले ही उन्हें किसी गैर संक्रमित के साथ जाना पड़े, जिससे उसके भी संक्रमित होने का खतरा बना रहे। अगर सीएचसी पर सैंपल नहीं लिया गया तो उसके पास कई किलोमीटर की दूरी तय करके जिला अस्पताल पहुंचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है

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