देश के इन मंदिरों में सिर्फ महिलाएं ही कर सकती हैं पूजा, पुरुषों की है “नो एंट्री”

हमारे भारत देश में ऐसे बहुत से मंदिर हैं जो अपने किसी ना किसी चमत्कार और विशेषता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। भक्त इन मंदिरों में जाते हैं और ईश्वर की पूजा करते हैं। भगवान का दरबार सभी लोगों के लिए खुला रहता है। पुरुष हो या महिला, दोनों ही भगवान के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं। इन मंदिरों से कई धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई परंतु शायद ही किसी को इस बात के बारे में पता होगा कि देश में ऐसे कुछ मंदिर भी है जहां पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है या फिर कुछ खास आयु वर्ग की महिलाओं के आने पर रोक है।

आपको बता दें कि एक सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर काफी वाद-विवाद भी हो चुका है परंतु बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी होगी कि कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां पर पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी है। जी हां, इन मंदिरों में सिर्फ महिलाएं ही पूजा कर सकती हैं। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कुछ ऐसे ही मंदिरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जहां पर पुरुष प्रवेश नहीं कर सकते, उनको लेकर कुछ खास नियम बनाए गए हैं।

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

माता के सभी शक्तिपीठों में से सबसे ऊपर गुवाहाटी में स्थापित मां कामाख्या मंदिर को माना गया है। ऐसा बताया जाता है कि देवी सती के आत्मदाह के बाद भगवान विष्णु जी के सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 भाग एक हो गए थे तब देवी सती का योनि भाग इस स्थान पर गिरा था। ऐसा बताया जाता है कि हर वर्ष जून में मां कामाख्या रजस्वला होती हैं और माता के महामारी के दिनों में यहां पर उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान पुरुषों को इस मंदिर में आने की अनुमति नहीं है। यहां पर इन दिनों में महिला पुजारी ही काम करती है।

भगवती देवी मंदिर, कन्याकुमारी

मां भगवती का ये प्रसिद्ध मंदिर कन्याकुमारी में बना हुआ है। इस मंदिर के बारे में ऐसा बताया जाता है कि भगवान शिव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए देवी भगवती में इस स्थान पर तपस्या की थी। ऐसे में भगवती मां को सन्यासी देवी भी कहा जाता है। इसी वजह से सन्यासी पुरुषों को देवी मां के गेट से उनके दर्शन करने की इजाजत है। मगर शादीशुदा पुरुष मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते हैं। इस मंदिर के अंदर सिर्फ महिलाएं ही प्रवेश करके पूजा करती हैं।

संतोषी माता मंदिर, जोधपुर

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं शुक्रवार का दिन मां संतोषी का दिन माना जाता है। इस मंदिर के अंदर शुक्रवार के दिन पुरुषों को प्रवेश करने पर पाबंदी है। इसके अलावा अन्य दिनों में भी पुरुष इस मंदिर के दरवाजे से ही माता के दर्शन कर सकते हैं।

चक्कुलाथुकावु मंदिर, केरल

आपको बता दें कि माता दुर्गा के इस मंदिर में हर वर्ष पोंगल के समय नारी पूजा होती है और यहां पर 10 दिनों तक यह पूजा चलती रहती है। इस समय के दौरान पुरुषों को मंदिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही पूजा के आखिरी दिन पुरुष महिलाओं के पैर धोते हैं।

ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

आपको बता दें कि भगवान ब्रह्मा जी का यह मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। 14वीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। ऐसा माना जाता है कि देवी सरस्वती के श्राप देने की वजह से इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों को जाने की इजाजत नहीं है। इस मंदिर के अंदर सिर्फ महिलाएं ही जाकर पूजा कर सकती हैं। पुरुष मंदिर के आंगन से ही हाथ जोड़ लेते हैं।

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