नरेंद्र सिंह तोमर हो सकते हैं मुख्यमंत्री? जानिए क्यों हैं दावेदार

-केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का दावा, लग चुकी है नाम पर मोहर
-ग्वालियर में लगे बधाई और शुभकामनाओं वाले पोस्टर
-शिवराज और वीडी शर्मा ने पहले ही कर लिया था सीएम की दौड़ से खुद को बाहर

भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर से पर्दा बहुत जल्द उठने वाला है। केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नरेंद्र सिंह तोमर का नाम तय हो चुका है। उनके नाम पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मोहर लगा दी है, बस पर्यवेक्षकों को बैठक कर औपचारिक घोषणा करना शेष है।


इस बात पर यकीन इसलिए भी किया जा सकता है, क्योंकि आगामी मुख्यमंत्री की कौन होगा के सवाल पर वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पहले ही कह चुके हैं कि वो इस दौड़ में शामिल नहीं हैं। उन्होंने खुद ही अपने नाम को इससे अलग कर रखा है।
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित जीत हासिल होने के बाद से ही मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन लगातार जारी है। इसके लिए प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेताओं के नामों की चर्चा बराबर होती रही है। मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर दिल्ली में जारी मंथन के बीच में से सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री का नाम तो तय कर लिया गया है, बस घोषणा की औपचारिकता बची है। इसके लिए पर्यवेक्षक बैठक करेंगे और नाम की घोषणा कर देंगे। इससे पहले ही ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मुख्यमंत्री बनाए जाने संबंधी पोस्टर लगा दिये गए हैं और उन्हें बधाई व शुभकामनाएं देने का सिलसिला शुरु हो गया है। एक पोस्टर जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ उसमें उन्हें ‘बॉस‘ लिख कर संबोधित किया गया है।


– तोमर की संगठनात्मक क्षमता का कोई सानी नहीं
मध्य प्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर जैसी संगठनात्मक क्षमता का कोई सानी नहीं है। उनकी छवि प्रशासन पर मजबूत पकड़ वाली और कुशल रणनीतिकार के तौर पर उनकी पहचान होती है। केंद्रीय मंत्री तोमर पहली दफा मध्य प्रदेश के मुरैना संसदीय क्षेत्र से वर्ष 2009 में लोकसभा सदस्य निर्वाचित होकर संसद पहुंचे थे। वे इसके पहले प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी थे। वर्तमान में भी वो ग्वालियर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाए गए।


– युवाओं की पहली पसंद हैं तोमर
तोमर छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय भूमिका में आ गए थे। वो महाविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। शिक्षा पूरी कर ग्वालियर नगर निगम के पार्षद पद पर निर्वाचित हुए। 1977 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष बनाए गए। केंद्रीय मंत्री तोमर युवा मोर्चा में विभिन्न पदों पर बखूबी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनकी क्षमता को देखते हुए ही वर्ष 1996 में युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए थे। ऐसे में तोमर वर्तमान में न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि छत्तीसगढ़ के जिला व ब्लॉक स्तर तक में अच्छी पकड़ रखते हैं।


– जब विधायक बने
ग्वालियर से तोमर पहली बार 1998 में विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद वर्ष 2003 में दूसरी बार यहीं से उन्होंने चुनाव जीता। इस दौरान वे सुश्री उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री भी बनाए गए थे।
तोमर ने वर्ष 2008 में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए और उसके बाद वे 15 जनवरी 2009 में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री पद की जिम्मेदारी को भी उन्होंने निभाया। तोमर दोबारा 16 दिसम्बर 2012 को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए।


– दौड़ में शामिल नेताओं के बीच बनी सहमति
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में जो नेता शामिल थे।केंद्रीय हाई कमान ने सभी नेताओं से चर्चा कर सहमति बनाने का प्रयास किया। अंतोगत्वा तोमर के नाम पर सभी दावेदार सहमत होते हुए नजर आए। विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक के माध्यम से चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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