ये कैसा सिस्टम है : इंसान को इलाज नहीं, मुर्दे को अंतिम यात्रा नसीब नहीं ; देखे इंसानियत को शर्मसार करने वाली 3 तस्वीरें

ये इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीरें हैं। जिंदा इंसान को इलाज नहीं मिल रहा और मुर्दे को अंतिम यात्रा नसीब नहीं। किस दुनिया में हम जी रहे हैं…? इस महामारी ने हम सभी को अपनों से दूर कर दिया, लेकिन इतना दूर? ये कैसा सिस्टम है जो अपनों को मरने के बाद भी सम्मान नहीं दे पा रहा? मौत के बाद शव की अंतिम यात्रा निकाली जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में जो तस्वीरें आईं हैं वो सिस्टम की अंतिम यात्रा है…

केस-1 : चार कंधे नहीं मिले तो, लाश को कूड़े की गाड़ी में डाल दिया

ये घटना शामली की है। यहां जलालाबाद में प्रमिला नाम की महिला ने ब्रेन हैमरेज के चलते दम तोड़ दिया। शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए घर में कोई नहीं था। आस-पास के लोगों ने भी मदद नहीं की। पड़ोस के एक डॉक्टर ने इसकी सूचना नगर निगम को दी। निगम ने लाश को ढोने के लिए कूड़े की गाड़ी भेज दी। नगर निगम प्रशासन की ये करतूत अब लोगों के सामने है। फिलहाल ये तस्वीर पूरी दुनिया में सिस्टम की पोल खोल रही है। डीएम जसजीत कौर कहती हैं कि वायरल फोटो के मामले में जांच कर रहे हैं। जो भी दोषी मिलेगा उस पर कार्रवाई करेंगे।

केस-2 : गोरखपुर में एंबुलेंस की जगह ठेले पर शव यात्रा

गोरखपुर के बड़हलगंज कस्बे में मंगलवार को 100 साल के भागवत गुप्ता का निधन हो गया। उनका शव ठेले पर श्मशान पहुंचा। गुप्ता अपनी बेटी के पास रहते थे। तीन दिन पहले इन्हें खांसी और बुखार हुआ। डॉक्टर ने दवा दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार को उनका निधन हो गया। दामाद पारसनाथ गुप्ता ने एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन नहीं मिली। मजबूरन दामाद ने ठेला उठाया और शव लेकर श्मशान घाट पहुंच गए। यहां दो लोगों ने उनकी मदद की और लाश को नीचे उतारा।

केस-3 : इतना समय नहीं कि पूरी लाशें जल सकें

ललितपुर के सुरईघाट शमशान घाट पर इन दिनों दिल दहला देने वाला माहौल है। यहां एक लाश सही से जल भी नहीं पाती कि दूसरी पहुंच जाती है। इस आपाधापी में कई लाशें अधजली रह जाती हैं। फिर इन्हें कुत्ते नोंचने लगते हैं। सरकारी आंकड़ों में यहां एक महीने के अंदर कोरोना से 48 मौतें दर्ज हैं, लेकिन श्मशान घाटों पर हर रोज 7-8 लोगों के शव पहुंच रहे हैं।

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