लॉकडाउन : घर से निकलते समय अगर नहीं पहना मास्क तो पैसे रखें तैयार, लगेगा भारी जुर्माना 

लखनऊ । कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अब सरकार के आदेशों का पालन नहीं करना लोगों को भारी पड़ेगा। सरकार ने एपेडेमिक एक्ट को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें नियमों के उल्लंघन पर अब जुर्माना वसूला जा सकेगा।

प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित मोहन प्रसाद ने शनिवार को बताया कि एपेडेमिक एक्ट को लेकर अधिसूचना जारी होने के बाद अब सार्वजनिक स्थानों पर बिना मास्क, रूमाल या मुंह ढके ​बाहर निकलने पर जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसमें पहली बार नियमों का उल्लंघन करने पर 100 रुपये, दूसरी बार में भी 100 रुपये और तीसरी बार के साथ हर बार उल्लंघन करने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

लॉकडाउन के उल्लंघन पर 1,000 रुपये तक जुर्माना

इसी तरह अगर कोई व्यक्ति संक्रमित नहीं है, स्वस्थ है और लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहा है तो उस पर पहली बार 100 रुपये का जुर्माना, जो बढ़ाकर 500 रुपये तक किया जा सकता है, लगाया जायेगा। दूसरी बार में जुर्माना की राशि 500 रुपये है, जिसके बढ़ाकर 1,000 रुपये तक किया जा सकता है। वहीं इसके बाद हर बार 1,000 रुपये के जुर्माना का प्रावधान है।

दोपहिया वाहन में दो सवारी बैठने पर लाइसेंस हो सकता है निरस्त

प्रमुख सचिव ने बताया कि अधिसूचना जारी रहने तक दोपहिया वाहन में एक ही व्यक्ति के चलने की इजाजत है। इस दौरान अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो और दो सवारी दोपहिया वाहन में बैठी मिलती हैं तो पहली बार में 250 रुपये, दूसरी बार में 500 रुपये और तीसरी बार में 1,000 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बाद लाइसेंस निलम्बन या निरस्त करने की कार्यवाही की जा सकती है।

कार्यस्थल जाने वाली महिलाओं को लेकर छूट

उन्होंने बताया कि हालांकि कार्यस्थल जाने वाली कोई महिला अगर वाहन चलाना नहीं जानती है और परिवार का कोई सदस्य उसे छोड़ने जा रहा है तो कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से ऐसे दोपहिया वाहन में दो लोग जा सकेंगे। हालांकि पीछे बैठने वाले को हेलमेट, मास्क, ग्लव्स का प्रयोग करना होगा।

सार्वजनिक स्थल पर थूकने पर 500 रुपये तक जुर्माना

उन्होंने बताया कि इसी तरह सार्वजनिक स्थल पर थूकने से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इसलिए पहली बार ऐसा करने पर 100 रुपये, दूसरी बार भी 100 रुपये और तीसरी बार के साथ हर बार 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। कार्यपालक मजिस्ट्रेट या इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी द्वारा इसे लगाया जा सकेगा।

21 दिन तक नया मामला नहीं आने पर जोखिम क्षेत्र होगा समाप्त

प्रमुख सचिव,स्वास्थ्य ने बताया कि वहीं अब जोखिम क्षेत्र (कंटेन्मेंट जोन) में 21 दिन तक कोई संक्रमित मामला नहीं आने पर वह हॉट स्पॉट बन्द कर दिया जायेगा तथा जोखिम क्षेत्र की कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी। भविष्य में कोई नया पुष्ट केस आने पर फिर से कार्यवाही की जाएगी। जिन जनपदों में पिछले 21 दिनों से कोरोना का कोई पुष्ट रोगी चिह्नित नहीं हुआ है, ऐसे जनपदों को ग्रीन जोन के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

घर में एक से अधिक शौचालय होने पर भेजे जा सकेंगे घरेलू एकांतवास पर

उन्होंने बताया कि घरेलू एकांतवास (होम क्वारंटाइन) को लेकर अब जिला प्रशासन नई गाइडलाइन के मुताबिक ऐसे लोगों को घर भेज सकेगा,जिनका घर बड़ा है और वहां एक से अधिक शौचालय हैं। इसमें सम्बन्धित व्यक्ति को प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। घर में जिस शौचालय का वह प्रयोग करे, उसे परिवार के अन्य सदस्य इस्तेमाल नहीं करेंगे। उससे दूरी बनाये रखेंगे। कमरा और शौचालय एक दूसरे से लगे होने पर सम्बन्धित व्यक्ति को वहीं रखा जाए और घर के अन्य सदस्य निर्धारित समय तक उसके सम्पर्क में न आएं।

लक्षणरहित प्रवासियों के लिए 21 दिनों का घरेलू एकांतवास

उन्होंने बताया कि लक्षणरहित प्रवासी श्रमिकों के लिए 21 दिनों के घरेलू एकांतवास की व्यवस्था की गई है। यदि उनमें कोई लक्षण पाए जाते हैं तो उनकी जांच कराई जाती है, संक्रमित होने पर उन्हें अस्पताल में रखकर उनकी चिकित्सा की जाती है। लक्षण उपस्थित होने की स्थिति में अगर वे संक्रमित नहीं पाए जाते हैं तो भी उनको 7 दिनों तक रोका जाता है और उसके बाद पुनः जांच करके 14 दिनों के घरेलू एकांतवास के लिए भेजा जाता है।

लक्षण महसूस होने पर तत्काल हेल्पलाइन नम्बर का करें प्रयोग

प्रमुख सचिव,स्वास्थ्य ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का हेल्पलाइन नम्बर 1800 180 5145 है। यदि किसी में खांसी, बुखार या सांस फूलने जैसे लक्षण हैं तो तत्काल इस नम्बर पर काॅल करें, विशेषज्ञ आपको सलाह देंगे कि आप घर में ही आराम करें अथवा अपनी जांच करवाएं। यदि हमारे विशेषज्ञ काॅल पर किसी को सलाह देते हैं कि उन्हें अपनी जांच करवानी चाहिए, तो नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाएं और जांच करवाएं।

सामने आकर करवाएं अपनी जांच

संक्रमण होने पर जांच और उपचार की व्यवस्था सरकार द्वारा निःशुल्क की जाएगी। इस बीमारी से बिल्कुल न घबराएं, सामने आएं और अपनी जांच करवाएं। अधिकांश लोग अस्पताल से ठीक होकर अपने घर जा रहे हैं इसलिए किसी भी प्रकार से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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