विधानसभा चुनाव: क्या है बिहार का जातीय समीकरण, कौन किसकी तरफ?

बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए वोटिंग शुरू होने में मात्र चंद दिन बाकी रह गए हैं और सभी पार्टियां अपने पूरे दमखम के साथ लोगों को लुभाने में लगी हुई हैं।  चुनाव में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन के बीच है और चुनाव बाद इनमें से किसकी सरकार बनेगी, इसमें जातीय समीकरण एक बड़ी भूमिका निभाएगा। चलिए फिर बिहार के जातीय समीकरण और कौन किस तरफ है, इस पर एक नजर डालते हैं।

बिहार में चीन चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव

बिहार में 28 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच तीन चरणों में वोटिंग होगी। 28 अक्टूबर को 71 सीटों पर, दूसरे चरण में 3 नवंबर को 94 सीटों और तीसरे चरण में 7 नवंबर को 78 सीटों पर वोटिंग होगी। नतीजे 10 नवंबर को आएंगे।दलित

राज्य में 16 प्रतिशत दलित; कौन किसे देता है वोट?

सबसे पहले बात दलितों की। बिहार में करीब 16 प्रतिशत दलित वोट हैं और इनमें से लगभग पांच प्रतिशत पासवान हैं जो पारंपरिक तौर पर स्वर्गीय रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को वोट देते हैं।

बाकी दलितों का 11 प्रतिशत वोटबैंक हैं और इन्हें महादलित के तौर पर भी जाना जाता है। ये महादलित जातियां नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) को अपना वोट देते रहे हैं नीतीश कुमार का समर्थन करते रही हैं अति पिछड़ी जातियां

अब बात अति पिछड़ी जातियों (EBC) की। इन जातियों का वोटबैंक 26 प्रतिशत है और 2005 के बाद से इनमें से अधिकांश लगातार नीतीश कुमार को वोट दे रहे हैं।

हालांकि, नरेंद्र मोदी के उभार के बाद EBC का झुकाव भाजपा की तरफ हुआ है। नीतीश के लिए राहत की बात ये है कि वह भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे में इस वोटबैंक का फायदा अंत में उन्हें ही होना है।

किसके पीछे खड़े हैं OBC?

अगर अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) की बात करें तो उनके 26 प्रतिशत वोट हैं। इनमें से लगभग 15 प्रतिशत यादव हैं जो पारंपरिक तौर पर लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कट्टर समर्थक रहे हैं।

इसके अलावा 8 प्रतिशत कुशवाहा हैं जिनमें से कुछ पर उपेंद्र कुशवाहा और कुछ पर नीतीश का प्रभाव है।

नीतीश कुमार की खुद की कुर्मी जाति के 4 प्रतिशत वोट हैं और ये पूरा वोट उन्हें ही जाता रहा है।

किसकी तरफ है उच्च जातियों का पलड़ा?

बिहार की आबादी में उच्च जातियों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है और पारंपरिक तौर पर ये वोटबैंक भाजपा और कांग्रेस के बीच शिफ्ट करता रहा है।

अभी ज्यादातर उच्च जातियां भाजपा को वोट देती हैं और अपने इस आधार को बनाए रखने के लिए पार्टी ने अपनी कुल 110 टिकटों में से 51 उच्च जाति के उम्मीदवारों की दी हैं।

पार्टी ने राजपूतों को सबसे अधिक लुभाने की कोशिश की है और उन्हें 22 टिकट दी गई हैं।

मुस्लिमों का झुकाव किसकी तरफ?

धार्मिक समीकरण की बात करें तो बिहार में लगभग 17 प्रतिशत मुस्लिम हैं और ये मुख्यतौर पर RJD को वोट देते रहे हैं।

यादव और मुस्लिम यानि MY फैक्टर के कारण ही RJD इतने साल तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही है और ये उसकी मुख्य ताकत है।

नीतीश मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन नागरिकता कानून (CAA) जैसे विवादित कानून को उनके समर्थन के बाद उन्हें मुस्लिम वोट मिलेंगे, इसकी संभावना नगण्य है।

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