विश्व पर्यावरण दिवस पर जिलाधिकारी ने मेडिकल कालेज परिसर में किया पौधरोपण

क़ुतुब अन्सारी

बहराइच । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी शम्भु कुमार ने प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच मनीष सिंह, ज्वाईन्ट मजिस्ट्रेट प्रशिक्षु आई.ए.एस. सूरज पटेल, मेडिकल कालेज के प्राचार्य डाॅ. अनिल के. साहनी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. डी.के. सिंह, क्षेत्रीय वनाधिकारी दीपक कुमार सिंह व अन्य अधिकारियों के साथ महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज बहराइच के परिसर में औषधीय पौध (मौलश्री) का पौध रोपण कर लोगों का आहवान किया कि अधिकाधिक पौधरोपण कर धरती को हरा भरा बनाये रखें। श्री कुमार ने कहा कि वनों, वन्य जीवों, जल संचयन तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर इस सुन्दर धरती को मानव जाति के रहने के अनुकूल बनाये रखा जा सकता है।


इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच मनीष सिंह ने बताया कि औषधीय पौध मौलश्री एक सुपरिचित वृक्ष है इसे संस्कृत में केसव, हिन्दी में मोलसरी या बकुल, बंगाली में गांछ, गुजराती में बालेसरी, पंजाबी में मोलसरी, तमिल में अलांगु केसारम तथा लेटिन में माईमोसाप्स इलेजाई कहते हैं। श्री सिंह ने बताया कि औषधीय पौध मौलश्री का सदियों से आयुर्वेद में उपयोग होता आ रहा है। इसके चमकीले हरे पत्ते वृक्ष की सुन्दर वनावट मन को मोह लेते हैं।


औषधीय पौध मौलश्री के महत्व के सम्बन्ध में श्री सिंह ने बताया कि मौलश्री वृक्ष घर की सीमा के अन्दर लगाने से वास्तुदोष का प्रभाव कम हो जाता है। इसके अलावा आंव-दस्त दूर करने के लिए इसके बीजों के तेल की दो बंूद बताशे में डालकर सेंवन करने से शीघ्र ही रोग दूर हो जाता है। मौलश्री के अर्क को सिर पर लगाने से सिरदर्द से आराम मिलता है। वहीं छाल के काढ़े से दांतो के दर्द से आराम मिलता है। जबकि मौलश्री के फल, फूल व छाल को सुखाकर घी में मिलाकर लगाने से फोड़े़, फुंसी घाव आदि जल्द ठीक होता है।

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