सिर्फ एक हफ्ते के लिए खिलता है दुनिया का सबसे बड़ा फूल, देता है सड़े मांस की बू

चौकिंए मत, हम बात कर रहे हैं संसार के सबसे बड़े फूल रेफ्लीसिया आरनॉलडी की। कहने को रेफ्लीसिया का शुमार संसार के सबसे बड़े फूल के तौर पर किया जाता है, लेकिन इस फूल की त्वचा छूने पर मांस जैसी प्रतीत होती है और इसके फूल से सड़े मांस की सी बदबू आती है। असल में मलेशिया और इंडोनेशिया के जंगल में पाया जाने वाला रेफ्लीसिया एक परजीवी पौधा है, जिसका आकार वनस्पति जगत के सभी पौधों के फूलों से बड़ा लगभग 1 मीटर व्यास का होता है और इसका वजन करीब करीब दस किलोग्राम तक भी हो सकता है।

सबसे पहले डॉक्टर जोसेफ अर्नाल्ड ने इंडोनेशिया के वर्षा वन में इस पौधे की खोज की और अपने खोजी दल के नेता सर थॉमस स्टैमफोर्ड रेफ्लस के नाम पर इस पौधे का नामकरण रेफ्लीसिया कर दिया। रेफ्लीसिया की अब तक करीब 26 प्रजातियां खोजी जा चुकी हैं। यह पौधा इंडोनेशिया और मलेशिया के अलावा सुमात्रा और फिलीपीन्स में भी पाया जाता है।

ये एक परजीवी पौधा है जो अपने भोजन के लिए अन्य पौधों पर आश्रित रहता हैमाना जाता है कि रेफ्लीसिया किसी संक्रमित पेड़ की जड़ से अपने आप जन्मता है। सबसे पहले संक्रमित पेड़ की जड़ में एक गांठ बनती है और जब यह बड़ी होकर बंदगोभी के आकार की हो जाती है तब इसकी पंखुडि़यां खुल जाती है और पूरा फूल आकार ले लेता है। इस पौधे में केवल फूल ही एक ऐसा भाग है जो जमीन के ऊपर रहता है शेष सब भाग कवक जाल की भांति पतले-पतले होते हैं और जमीन के अन्दर ही धागों के रूप में फैले रहते हैं। यह दूसरे पौधे की जड़ों से भोजन चूसते हैं।

चूंकि रेफ्लीसिया एक परजीवी पौधा है जो अपना भोजन दूसरे पौधों से प्राप्‍त करता है। इसका तना सफेद रंग का होता है, जो भूमि की ऊपरी सतह पर कुछ दूर जाकर फूल का रूप धारण करता है। इस फूल में पत्तियां नहीं होती। यह फूल अक्तूबर में खिलना शुरू होता है और मार्च तक इसमें फूल आते हैं यह फूल केसिरया आसमानी और सफेद रंग का होता है। नर और मादा फूलों की संरचना लगभग एक जैसी ही होती है। पूरा फूल दल चक्रों के पांच खंडों में होता है। दल चक्र के बीच में प्यालीनुमा पुष्पनाल होती है जो आधार पर अंडाशय से जुड़ी होती है। नर फूल में पुष्पमाल एक ठोस रचना होती है जिसके ऊपरी सिरे पर एक चौड़ी कोर प्लेट होती है। प्लेट के किनारे पर परागकोष होते हैं। यह फूल लगभग एक हफ्ते तक खिला रहता है।

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