क्या ट्रम्प सरकार की टैरिफ पॉलिसी खुद अमेरिका पर पड़ेगी भारी, क्या बाजार में महंगे हो जाएंगे प्रोडक्ट्स !

US Tariffs Policy: अमेरिका के राष्ट्रीय डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अपनी टैरिफ पॉलिसी को लागू कर दिया है. हर आयात पर 10 प्रतिशत टैक्स लगेगा. अमेरिकी सरकार ने भारत, चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया समेत अन्य देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ सहित 60 से अधिक देशों पर भारी टैक्स लगाने की घोषणा की.

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कई एक्सपर्ट का मनाना है कि अमेरिकी की टैरिफ पॉलिसी खुद इसी पर भारी पड़ने वाली है. हालांकि राष्ट्रपति ने कहा है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मदद के लिए किया. इससे अन्य देशों के व्यापार पर असर देखने को मिल सकता है. 

टैरिफ का अमेरिका पर कैसे पड़ेगा असर?

  • अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही भारी पड़ सकती है. क्योंकि अमेरिकी कंपनियों ने देशों में अपनी विनिर्माण फैक्ट्री स्थापित की हैं.
  • ये कंपनियां अमेरिकी में अपने प्रॉडक्ट को बेचने के लिए टैरिफ लगे देशों से आयात करती हैं. जिन कंपनियों को ऐसे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, वे या तो ज्यादा टैक्स का भुगतान करने के लिए अपने उत्पादों की कीमत बढ़ा देंगी. नहीं तो आयात बंद करने का फैसला करेंगी. इससे प्रोडक्ट्स की कमी होगी और अमेरिकी बाजार में बढ़ी हुई कीमत पर सामान बेचे जाएंगे.
  • कैटो इंस्टीट्यूट के बिजनेस एक्सपर्ट स्कॉट लिनसीकोम और कॉलिन ग्रेबो ने कहा, अमेरिकी परिवारों के लिए कीमतें बढ़ेंगी, विकास और व्यापार निवेश में कमी आएगी और निर्यात और विनिर्माण उत्पादन में कमी आएगी, क्योंकि देश के कारखानों को विदेशों में प्रतिशोध का सामना करना पड़ेगा और घरेलू स्तर पर इनपुट महंगा हो जाएगा.
  • अमेरिका ने चीन और भारत दोनो पर ही भारी टैरिफ लगाया है. इन दोनों देशों में iPhone के पार्ट्स का प्रोडक्शन किया जाता है. अब टैक्स लगने से यूएस में आईफोन महंगा हो जाएगा.
  • कई कार निर्माता कंपनियां अपने देशों में गाड़ियों के पुर्जे बनवाकर अपने यहां इस्तेमाल करती हैं. आयात टैक्स से कंपनियों को 25 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा. फिर अमेरिका में कार भी महंगी हो जाएगी.
  • अमेरिकी बाजार में वॉलमार्ट, टारगेट ब्रांड के कपड़े बिकते हैं, जो कि अमेरिका में नहीं बनते. चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देश उन्हें निर्यात करते हैं, और ये सभी उच्च अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहे हैं. इसलिए इनकी कीमत बढ़ सकती है.
  • अमेरिका में 64.1 प्रतिशत सॉफ्ट ड्रिंक डिब्बे में पैक किए जाते हैं, इसलिए मॉडलो जैसी बीयर पर भी एल्युमीनियम टैरिफ लग सकता है. इस टैरिफ में डिब्बाबंद बीयर भी शामिल है. यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम भी टैरिफ लगा है. इसलिए इटालियन, फ्रेंच, स्पेनिश वाइन, जर्मन बीयर और स्कॉटिश व्हिस्की जैसी यूरोपीय बीयर महंगी हो सकती हैं.
  • अमेरिका के टैरिफ से कॉफी, चॉकलेट और एवोकाडो की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, अमेरिका ब्राजील और कोलंबो से कॉफी बीन्स का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. इन देशों पर भी टैरिफ लगाया गया है इसलिए उनकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है.

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