
नेपाली व्यापार मंडल नेपाली अफसरशाही के साथ मिलकर बार-बार रच रहा है चक्रव्यू
प्रोपेगेंडा में फंस जाते हैं भारतीय सशस्त्र सीमा बल के सुरक्षाकर्मी
रूपईडीहा/बहराइच । भारत नेपाल सीमा की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल 42 वी वाहिनी पर सवालिया निशान उठ रहे हैं ।
जब भी नेपाल की तरफ से कोई चिट्ठी वायरल होती है तो सबसे पहले सशस्त्र सीमा बल 42 वी वाहिनी चेक पोस्ट पर तैनात सुरक्षाकर्मी उसे फॉलो करते नजर आते हैं मानो ऐसा लगता है कि भारत सरकार ने कोई फरमान जारी किया हो। बताते चलें कि विगत 1 सालों से भारत नेपाल सीमा कोरोना महामारी के कारण सील है दोनों देशों के उच्च अधिकारियों की बैठक के बाद आवागमन में सहूलियत के साथ जरूरतमंद दोनों देशों के लोगों को आने-जाने इजाजत दी गई थी ।
मालवाहक वाहनों को छोड़कर किसी भी सवारी साधन को आने-जाने की इजाजत नहीं है ऐसा बताया जाता है अगर इस बात को सच मान लिया जाए तो दिन भर नेपाल के अफसरशाही के लोग रूपईडीहा बाजार में गाड़ियों से फर्राटा भरते रहते हैं ।
दूसरी बात जो नेपाली जरूरतमंद भारतीय बाजार रुपईडीहा से खरीदारी करने आता है उससे सशस्त्र सीमा बल के जवान रोक कर परेशान करते हैं ।
बार-बार चिट्टियां वायरल होने की वजह से जो बात सामने निकल कर आ रही है उससे यह पता लगता है कि नेपाल का व्यापार मंडल नहीं चाहता है कि बॉर्डर खुले व आवागमन सामान्य हो । इसका सीधा मतलब यह है कि बॉर्डर पर कड़ाई अगर रहेगी तो नेपाली जरूरतमंद खरीदारी करने के लिए भारतीय बाजार रूपईडीहा नहीं आ सकेगा ।
अब आपको बताते हैं कि इस खेल का फायदा क्या है 2 लीटर की कोल्ड ड्रिंक भारतीय बाजार रुपईडीहा में 120 रुपया नेपाली करेंसी में मिलती है जबकि वही कोल्ड ड्रिंक नेपाल के अंदर नेपाली व्यापारी 280 रुपया नेपाली करेंसी में बेचता हैं स्वाभाविक है जब बॉर्डर पर सख्ती होगी तो नेपाल के अंदर सामान का डिमांड बढ़ेगा फिर चालू होता है लूटने का खेल ।
भारतीय व्यापारी जीएसटी टैक्स भारत सरकार को देते हैं जिससे सरकार को फायदा होता है लेकिन वही नेपाल को एक्सपोर्ट होने वाली वस्तुओं पर टैक्स न के बराबर है साथ ही भारत सरकार नेपाल को सब्सिडी भी देती है ।
मसलन चीनी भारत में कहीं से भी खरीदेंगे लगभग 36 से 38 रुपए में मिल ही जायेगी वही नेपाल को एक्सपोर्ट होने वाली चीनी 22 से 28 रूपये में नेपाल को एक्सपोर्ट होती है वो इस लिए की भारत सरकार सब्सिडी देती है ।
उसके बाद भी नेपाल में चीनी भारतीय बाजारों से महंगी बिकती है
इसलिए जब भारत सरकार को फायदा हो रहा है तो सशस्त्र सीमा बल के सुरक्षाकर्मी भारतीय बाजार रुपईडीहा से बिक्री हुए सामानों को क्यों रोकता है । कहीं ऐसा तो नहीं कि नेपाली व्यापार मंडल ने जिस तरह से नेपाली अफसरशाही को अपने कंट्रोल में ले रखा है जिसकी वजह से सशस्त्र सीमा बल इन लोगों के ट्रैप का शिकार हो जाती हैं ।