साहब! क्या ऐसे ही पंचायत चुनाव में कोरोना गाइड का होगा पालन

पंचायत चुनाव : खुलेआम उड़ रही कोरोना गाइड लाइन की धज्जियां

-नोड्यूज व ट्रेजरी जमा करने के लिये ब्लाक व बैंक में उमड़ी भीड़।
-जनप्रतिनिधि बनने की चाहत, पर माॅस्क लगाना नही समझते मुनासीब
-लंबी कतारों में जूझते रहे दावेदार, मनमाना शुल्क वसूलने की होती रही शिकायत

चित्र परिचय : चुनाव के दावेदार लाइनों में खड़े (फोटो नम्बर-4)
गोरखपुर।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की घोषणा होते ही गोला क्षेत्रों में भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पहले चरण में मतदान के लिए नामांकन तीन अप्रैल से शुरू हो जाएगा। लिहाजा नामांकन के लिए दावेदार जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए भागदौड़ करने लगे हैं। शनिवार को ब्लॉक से लेकर जिले तक संबंधित कार्यालयों में दावेदारों की भीड़ लगी रही। सोशल डिस्टेंसिंग के मानक को भूलकर कोई नो ड्यूज लेने के लिए परेशान दिखा तो कोई जाति-निवास प्रमाण पत्रों के लिए भागदौड़ करता नजर आया। शनिवार से ही नामांकन पत्रों की बिक्री भी शुरू हो गयी है। प्रधान, बीडीसी सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पदों के दावेदारों को सहकारी बैंकों और ब्लॉक से नोड्यूज प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। साथ ही आरक्षित श्रेणी में नामांकन के लिए जाति प्रमाण पत्र भी आवश्यक है।

आरक्षण मे हुए परिवर्तन से दावेदारों मे प्रमाण पत्रों पाने की बेचैनी

वैसे तो ज्यादातर उम्मीदवारों ने पहले ही जाति प्रमाण पत्र जारी करा लिया था, लेकिन ग्राम पंचायतों में ऐन वक्त पर सीट में फेरबदल होने से समीकरण बदले हैं। उनके दावदारों को अब नए सिरे से प्रमाण पत्र पाने में फजीहत झेलनी पड़ रही है। प्रमाण पत्रों को पाने के लिये दावेदारों में बेचैनी देखी जा रही है। नो ड्यूज पाने के लिये सहकारी बैंक और गोला ब्लॉक कार्यालय में भारी भीड़ लगी रही। अलग काउंटर बनाने के बाद भी दावेदार पहले नो ड्यूज के लिए जूझते नजर आए। कर्मचारियों ने भी भीड़ का भरपूर लाभ उठाया। नो ड्यूज देने में मनमानी उगाही की शिकायतें होती रहीं। वहीं दावेदार अतिरिक्त शुल्क देकर भी नो ड्यूज पाने को तत्पर नजर आए।

ट्रेजरी जमा करने के लिये बैंक में उमड़ी भीड़

विभिन्न पदों के लिये ट्रेजरी के माध्यम से शुल्क जमा करना है। गोला उपनगर स्थित स्टेट बैंक में ट्रेजरी जमा करने वालों की भीड़ सुबह से जमा हो गयी। ट्रेजरी जमा करने की होड़ इस कदर रही की कोरोना के गाईडलाईन की जरूरत किसी ने नहीं समझा। देर शाम तक भीड़ बैंको पर जमा रही।

जनप्रतिनिधियों बनने की चाहत रखने वाले भी नही लगा रहे माॅस्क

कोरोना काल के शुरूआती दौर पंचायत चुनाव के बहुत से दावेदार मास्क और सेनेटाइजर बांटते व कोरोना से बचाव के तरीकों को बताते नजर आये थे लेकिन ब्लाक से लेकर बैंक तक यह सभी दावेदार बिना मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग के नजर आयें।

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