Waqf Amendment Bill:   संसद में रातभर की बहस के बाद अब राज्यसभा की बारी! जानें NDA और विपक्ष का नंबरगेम

Waqf Amendment Bill: लोकसभा में लंबी और तीखी बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो गया और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि करने वाला प्रस्ताव भी मंजूर हो गया. यह सब तब हुआ जब संसद का सत्र रात 2:40 बजे समाप्त हुआ. अब सारी निगाहें राज्यसभा पर हैं, जहां यह विधेयक और प्रस्ताव पेश किए जाएंगे.

लोकसभा में विपक्ष ने इस बात पर आपत्ति जताई कि सरकार अपने एजेंडे को जबरन आगे बढ़ा रही है और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है. वहीं, सत्ता पक्ष ने विधेयक को पारित कराने में सफलता पाई. अब देखना यह होगा कि राज्यसभा में क्या समीकरण बनते हैं और विपक्ष क्या रणनीति अपनाता है. 

लोकसभा में पास हुआ वक्फ बिल

गुरुवार तड़के 2:40 बजे तक चली मैराथन बहस के बाद लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक को 288 मतों के समर्थन और 232 मतों के विरोध के साथ पारित किया गया. जब सभी को लगा कि सदन की कार्यवाही समाप्त होने वाली है, तभी रात करीब 2 बजे मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि का प्रस्ताव पेश कर दिया गया.

गृह मंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव को सदन में रखा, जिस पर चर्चा शुरू हुई. इस दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आश्चर्य जताते हुए कहा, “सर, क्या आप सच में चाहते हैं कि इस समय इस मुद्दे पर चर्चा हो?” हालांकि, बहस आधे घंटे में समाप्त हो गई और प्रस्ताव पारित कर दिया गया. विपक्ष ने सरकार पर जल्दबाजी में फैसले लेने और उन्हें चर्चा से दूर रखने का आरोप लगाया.

राज्यसभा में NDA और विपक्ष का गणित

राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पुष्टि का प्रस्ताव अगले चरण में पेश किया जाएगा. यहां बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 125 सांसद हैं, जिसमें बीजेपी के 98, जेडीयू के 4, एनसीपी के 3, टीडीपी के 2 और 6 नामित सदस्य शामिल हैं.

विपक्षी इंडिया गठबंधन की तुलना में ये संख्या मजबूत नजर आती है. इंडिया गठबंधन के पास 88 सांसद हैं, जिनमें कांग्रेस के 27 और टीएमसी के 13 सांसद शामिल हैं. भले ही बीजद (7 सांसद) विपक्ष के साथ आ जाए, तब भी यह संख्या एनडीए के खिलाफ कमतर रहेगी.

विपक्ष के बीजेपी पर आरोप

लोकसभा में देर रात लिए गए फैसलों से विपक्ष खासा नाराज है. उसने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को रोकने में असफल रही है. इसके अलावा, विपक्ष का आरोप है कि सरकार विपक्षी मुद्दों को नजरअंदाज कर अपनी प्राथमिकताएं थोप रही है. मंगलवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से विपक्षी दलों ने इसी मुद्दे पर विरोध जताते हुए वॉकआउट किया था.

राज्यसभा में विपक्ष की रणनीति

राज्यसभा में विपक्ष की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं. खासकर, बिहार चुनाव के नजदीक होने के कारण राजनीतिक दल इस मुद्दे को जनता तक ले जाने की योजना बना सकते हैं. वहीं, वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर कानूनी लड़ाई भी शुरू होने की संभावना है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुसलमानों का अपमान बताते हुए उनकी स्थिति को कमजोर करने वाला बताया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी विधेयक को ‘काला कानून’ बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने और देशव्यापी विरोध अभियान छेड़ने का ऐलान किया है.

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