
औरैया। सदर कोतवाली क्षेत्र के जिला अस्पताल के सामने एक निजी अस्पताल में युवक की अचानक मौत होने पर उसके परिजनों ने जमकर हंगामा काटा वहां मौजूद मिले अस्पताल कर्मियों से हाथापायी की। मौत की सूचना पर पहुंची पुलिस व सीएमओं ने अस्पताल को सील कर पुलिस ने मृत युवक के भाई की तहरीर पर अस्पताल संचालक व डॉक्टर समेत तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव मधुवापुर निवासी धर्मेंद्र कुमार पुत्र कृपा शंकर सविता ने बताया कि शनिवार को दोपहर तीन बजे छोटे भाई जितेंद्र को मामूली बुखार व पैरों में ऐठन होने के चलते शहर के गोविन्द हास्पिटल में भर्ती कराया था। वहां मौजूद डॉक्टर ने 10 हजार रुपये जमा कराए। रात में डॉक्टर ने पूरी तरह से ठीक करने का आश्वासन देते हुए सुबह 10 हजार रुपये जमा करने को कहा। भाई धर्मेंद्र ने बताया कि सुबह वह अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने पहले 10 हजार रुपये जमा कराए। बाद में हालत गंभीर बता कानपुर ले जाने को कहा। लेकिन जब उसने अपने भाई को देखा तो उसकी सांसे बंद थी। इस पर उसने डॉक्टर से कहा कि उसके भाई की तो मौत हो चुकी है। इतना सुनते ही डॉक्टर व अन्य अस्पताल कर्मी वहां से भाग गए। उधर, युवक की मौत की खबर सुनते ही परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर गलत इलाज का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर कोतवाली रामसहाय सिंह मौके पर पहुंचे। थोड़ी देर बाद सीओ सिटी सुरेंद्र नाथ यादव, तहसीलदार सदर राजकुमार चैधरी ने अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली। इसके बाद सीएमओ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव व एसीएमओ डॉ.अशोक कुमार ने पहुंचकर अस्पताल को मानक विहीन बताते हुए सील कराया। मृतक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने डॉ.रोहित मिश्रा, कंपाउंडर जीतू राजपूत व अस्पताल के संचालक गोविंद पाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
उधर,गोविंद हास्पिटल के संचालक गोविंद पाल का कहना है कि सब कुछ ठीक था। मरीज को सुबह अचानक हार्ट अटैक पड़ा और उसकी मौत हो गई। उधर, इस संबंध में सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि दो दिन पहले डिलीवरी के दौरान एक नवजात की मौत की जानकारी पर अस्पताल प्रशासन को तत्काल बंद करने के निर्देश दे दिए गए थे। इसके बाद भी अस्पताल कैसे संचालित हुआ। इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही इस पूरे प्रकरण की जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।