नागरिकता संशोधन कानून यानी सिटीज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के हिंसक विरोध प्रदर्शन की लपटें अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात तक फैल चुकी हैं। गुजरात के मुख्य शहर अहमदाबाद के कुछ इलाकों में गुरुवार को हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके दौरान सिटी बस पर पथराव करके बसों को नुकसान पहुँचाने की खबर सामने आई है। एहतियात के तौर पर कई इलाकों में एएमटीएस और बीआरटीएस बसों का संचालन रोक दिया गया है। शहर के शाहआलम और मिर्जापुर इलाकों में कश्मीर की तर्ज पर मुँह पर कपड़ा बांधे उपद्रवियों की ओर से पुलिस पर पथराव किये जाने की घटना सामने आई है। पुलिस की ओर से भीड़ को तितर-बितर करने के लिये लाठीचार्ज किया गया और आँसू गैस का भी प्रयोग किया गया। शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। हिंसक प्रदर्शन की ख़बरों के बाद शहर के अन्य इलाकों में भी वातावरण तनावपूर्ण हो गया है, हालाँकि पुलिस मुस्तैदी से सुरक्षा व्यवस्था में तैनात है। इसके अलावा बनासकांठा में भी चक्काजाम किया गया था।
पूर्वोत्तर से उठी थी विरोध की लपटें
#WATCH Gujarat: Police resort to lathi-charge during protest called by different Left parties, over #CitizenshipAmendmentAct, in Ahmedabad. The protesters were allegedly blocking police vehicle when the the police resorted to lathi charge to disperse them. pic.twitter.com/tTIWJXsf8T
— ANI (@ANI) December 19, 2019
11 दिसंबर को राज्य सभा में भी पास होने के बाद नागरिकता संशोधन बिल राष्ट्रपति की मुहर लगने से कानून बन गया। संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ-साथ पूर्वोत्तर के राजनीतिक दलों ने इस बिल का विरोध किया था। कानून बन जाने के बाद पूर्वोत्तर के असम-मेघालय में स्थानीय नागरिकों और छात्रों ने विरोध की शुरुआत की थी। विरोध के दौरान हिंसा की भी ख़बरें आई थी। इसके बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन की लपटें पश्चिम बंगाल से होते हुए दिल्ली पहुँची थीं, जहाँ जेएनयू के बाद जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन करते हुए आगजनी और पुलिस पर पथराव की घटनाओँ को अंजाम दिया था, जिसके बाद पुलिस की ओर से कुछ छात्रों के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने से राजनीतिक दलों को विरोध जताने का मौका मिला और फिर नागरिकों के विरोध प्रदर्शन का राजनीतिकरण हो गया। इसके बाद इन लपटों ने उत्तर प्रदेश को भी अपनी चपेट में ले लिया और विरोध प्रदर्शन की आग आगरा, अलीगढ़ होते हुए प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँच गई। मऊ और संभल समेत राज्य के अन्य इलाकों में भी यह लपटें फैली। इसके अलावा देश के अन्य कई हिस्सों तक भी यह लपटें पहुँच चुकी हैं।
वामपंथियों के भारत बंद को कांग्रेस ने दिया समर्थन
वामपंथी दलों की ओर से गुरुवार को भारत बंद का आह्वान किया गया, जिसे गुजरात और बिहार समेत कई राज्यों में कांग्रेस समेत कई विपक्षी राजनीतिक दलों और गैर राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिला। जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों में कांग्रेस और वामपंथियों की एक मिनट नहीं बनती है। वही नागरिकता कानून को लेकर मोदी विरोध का मौका हाथ से न जाने देने के लिये न सिर्फ विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं, बल्कि हिंसक प्रदर्शन करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने पर उनके समर्थन में उतर कर परोक्ष रूप से हिंसक प्रदर्शन की हिमायत कर रहे हैं और हिंसक प्रदर्शनों को हवा देने का काम कर रहे हैं।
अहमदाबाद में कश्मीरी तर्ज पर मुँह बाँधे प्रदर्शनकारियों का पुलिस पर पथराव
अहमदाबाद में पुलिस पर पथराव की जो घटना घटित हुई है, उसका तरीका आगामी दिनों में बड़ी बहस का मुद्दा बन सकता है। क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है, जब अहमदाबाद में कश्मीर की तर्ज पर मुँह बाँधे हुए प्रदर्शनकारी दिखे हैं, शहर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच घर्षण के मामले पहले भी हुए हैं, परंतु जिस तरह से इस बार कपड़े से मुँह बाँधे हुए कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया है, वह काफी गंभीर मामला है। क्योंकि ऐसा अभी तक कश्मीर के मामले में ही होता था, जहाँ कपड़े से मुँह को ढँक कर प्रदर्शनकारी पुलिस पर पथराव करते थे। इससे एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये नौजवान कश्मीरी उपद्रवियों से प्रेरित थे या कश्मीरी उपद्रवी भीड़ में शामिल होकर पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। देश भर में जिस तरह से प्रदर्शन को हिंसक रूप दिया जा रहा है, वह भी पहली बार देखने को मिल रहा है। इससे पहले तीन तलाक बिल का भी जगह-जगह विरोध किया गया था, परंतु उसमें हिंसा को कोई जगह नहीं दी गई थी। यहाँ तक कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी जिस समुदाय ने शांतिपूर्वक फैसले को स्वीकार किया। वही समुदाय सीएए को लेकर जिस तरह से हिंसक हो रहा है, वह शंका पैदा करता है।