गौ-संरक्षण केन्द्रों में सभी रहें व्यवस्थाएं चाक-चैबंद : महेन्द्र बहादुर सिंह

गौशालाओं से 4 गौवंश लें, 3600 रू. महीना पायें – जिलाधिकारी

बेसहारा गौवंशों को सुपुर्दगी में लेने से गौपालकों की आर्थिक स्थिति में होगा सुधार – डीएम

मैनपुरी – जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने गौ-संरक्षण समिति की बैठक में अधिशासी अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री गौेवंश सहभागिता योजना के तहत जनपद में संचालित गौ-संरक्षण केंद्रों में उपलब्ध पशुओं को गौपालकों को लेने के लिए प्रेरित करें, एक पशुपालक को 4 गोवंश तक दिए जाने का प्राविधान है साथ ही प्रत्येक गौवंश के भरण-पोषण हेतु 900 रू. प्रति माह की दर से धनराशि दिए जाने का भी प्राविधान शासन स्तर से किया गया है।

उन्होंने कहा कि गौशालाओं से गोवंश लेने हेतु गौपालकों के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाए, इस कार्य में ग्राम प्रधानों, कोटा डीलरों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए। उन्होने कहा कि कान्हा गौ पशु आश्रय स्थल, गौ-संरक्षण केद्रों से गौपालकों द्वारा लिये गये गौवंश अब उनके रोजगार का साधन बन रहे हैं, दूध के साथ-साथ गोबर से बने खाद, कंडें आदि की बिक्री से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।


डीएम ने कहा कि संचालित सभी गौशालाओं में पर्याप्त मात्रा में भूसा, चारा उपलब्ध रहे, हरे चारे की व्यवस्था सभी गौशालाओं में की जाए, उपलब्ध गौवंश के स्वास्थ्य की नियमित जांच पशु चिकित्साधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में करें, मुंहपका-खुरपका जैसी बीमारियों से बचाव हेतु टीकाकरण किया जाए।

उन्होंने कहा कि अधिशासी अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र की गौशालाओं का समय≤ पर औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखें, गौपालकों द्वारा गौ-संरक्षण केंद्रों से जो गौवंश मुख्यमंत्री गौवंश सहभागिता योजना के तहत लिए हंैं, उन गौपालकों के यहां रैंडम तौर पर निरीक्षण कर योजना के तहत लिए गए गौवंशों की जानकारी की जाए, सत्यापन के उपरांत ही भरण-पोषण योजना का लाभ दिया जाए।


जिलाधिकारी ने जानकारी करने पर पाया कि विकास खंड मैनपुरी में 178, किशनी में 98, करहल में 61, कुरावली में 55, घिरोर में 89, सुल्तानगंज में 35, बेवर में 46, कुल 559 पशुपालकों को 563 गौवंश सुपुर्द किये गये हैं, उप जिलाधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी के सत्यापन के आधार पर सुपुर्द किये गये गौवंशों में से 399 पशुपालकों को 496 गौवंश के भरण-पोषण हेतु लगभग 30 लाख रू. का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से दि. 30 जुलाई 2020 तक सीधे बैंक खाते में भेजा जा चुका है। उन्होने गौपालकों से कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने परिवार की आय बढ़ाने, आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हेतु किसी भी गौ-आश्रय स्थल से अधिकतम प्रति व्यक्ति 4 गौवंश सुपुर्दगी में ले सकता है।


डीएम ने कहा कि सभी गौ-संरक्षण केंद्रों में गोबर से कंडे बनाये जाए और उनकी बिक्री की व्यवस्था की जाए, गौ-मूत्र का प्रयोग जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किया जाए, गौ-संरक्षण केंद्रों से होने वाली आय को संचालित खाते में जमा कराया जाए। गौवंशों से उत्पादित दूध, गोबर, कम्पोस्ट आदि के विक्रय व्यवस्था से आश्रय स्थल को वित्तीय रूप से स्वावलम्बी बनाकर जनमानस को निराश्रित, बेसहारा गौवंश की समस्या से छुटकारा दिलाया जाये।

मैनपुरी से प्रवीण पाण्डेय की रिपोर्ट

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