बहराइच : जंगल मे ही मंगल मनाने की जिद्द पर अड़े वनग्राम वासी…

वन ग्रामों में  चौपाल लगाकर वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने सुनी समस्याएं

क़ुतुब अंसारी / ज़ैद खान
बहराइच (मिहीपुरवा )  जनपद के मिहीपुरवा पुरवा विकासखंड के  वनग्रामों में ग्रामीणों से पुनर्स्थापन के मुद्दे पर बात करने के लिए राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों ने
चौपाल लगाकर  वन ग्रामों के ग्रामीणों से बात की।
कतर्निया घाट वन्य जीव प्रभाग के उप प्रभागीय वन अधिकारी यशवंत ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार लोगों को जंगल से विस्थापित होने के एवज में प्रति परिवार दस लाख रुपए का मुआवजा अथवा दो हेक्टेयर जमीन दिए जाने की बात रखी, जिसे वन ग्रामीणों ने अमान्य कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि वह वनों के भीतर वन्यजीवों के साथ वन संपदा की सुरक्षा करते हुए बेहतर जीवन जी रहे हैं। वन ग्रामीणों ने विस्थापन से इंकार करते हुए कहा कि विस्थापन नीति  मंजूर नहीं है।
वन ग्रामीणों ने मांग रखी कि सरकार उनके वन ग्राम को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करे।मुख्यमंत्री जी के द्वारा दिनांक 29 नवंबर 2018 को  वन ग्राम गोकुलपुर को राजस्व ग्राम का दर्जा दे दिया था। किंतु शेष चार वन ग्रामों को वन विभाग की टिप्पणी के बाद राजस्व ग्राम में  परिवर्तित नहीं किया गया । ग्रामीणों का कहना है कि जब लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क में कोर जोन में बसे सूरमा गांव को राजस्व ग्राम घोषित किया गया और उनमें आवास तथा शौचालय सहित संपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं।ऐसे में बहराइच के वन ग्रामों को उपेक्षित किए जाना असमानता का व्यवहार है और संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें वन विभाग द्वारा जारी किया गया अभिमत स्वीकार नहीं है।और इस पर पुनः विचार किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि अभिमत जारी करने वाले फील्ड डायरेक्टर दुधवा रमेश पांडे तथा वन सचिव आशीष तिवारी कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में पूर्व से प्रभागीय वन अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने वन अधिकार कानून को लागू करने में वनवासियों के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं रहे हैं।इस नाते पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर उन्होंने इस प्रकार का नकारात्मक व्यवहार बहराइच के वन ग्रामों के वन निवासियों के साथ किया है ।
बैठक में उप जिलाधिकारी मोतीपुर कीर्ति प्रसाद भारती ने कहा कि लोगो ने वन ग्राम में ही रहने की और उसे वन ग्राम से राजस्व ग्राम किए जाने की इच्छा जाहिर की है जिससे शासन को अवगत करा दिया जाएगा।
 बैठक में तहसीलदार मोतीपुर, उप प्रभागीय वन अधिकारी कतरनिया घाट, समाज सेवी जंग हिंदुस्तानी सहित वन विभाग एवं राजस्व विभाग के  समस्त अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
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