बांदा : एक हफ्ते से खराब पड़ी अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन

मरीज परेशान, चांदी काट रहे प्राइवेट सेंटरों के संचालक

भास्कर न्यूज

बांदा। जिले के लोगों को सुलभ व नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बना जिला अस्पताल बदहाली की कगार पर हैं। यहां आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों की तरह ही महंगी जांच व दवाओं का बोझ उठाना पड़ता है। जिला अस्पताल में सप्ताह भर से डिजिटल एक्सरे मशीन खराब है। अभी तक इसे दुरूस्त नहीं किया जा सके। नतीजतन राहत की उम्मीद लेकर आने वाले रोगियों के जेब पर भार बढ़ गया है। अपनों को दर्द से कराहता देख तीमारदार विवश होकर निजी सेंटरों की ओर रुख कर रहे हैं।

जिला अस्पताल में इन दिनों व्यवस्था पटरी से उतरती जा रही है। भीषण गर्मी में एसी खराब पड़े हैं। वहीं अब डिजीटल एक्स-रे मशीन में खामी आ गई। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 से 150 एक्स-रे होते हैं। रोगियों को कोई असुविधा न हो इसके लिए जिला अस्पताल में डिजिटल और पोर्टेबल दो मशीनें लगवाई गईं हैं। करीब सप्ताह भर पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब हो गई है। बड़ी और आधुनिक मशीन होने के नाते इसी से सबसे अधिक जांचें होती थी। जबकि दूसरी पोर्टेबल काफी दिनों से कबाड़ बनी है। रोगियों की बढ़ती संख्या के कारण जांच पूरी हो नहीं हो पा रही है। नतीजतन हर रोज तमाम रोगी यहां से बैरंग वापस जा रहे हैं। निजी सेंटर संचालक इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। एक्स-रे के लिए मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इससे सबसे अधिक गरीबों की मुश्किल बढ़ती जा रही है। कई बार शिकायत के बाद भी एक्स-रे मशीन दुरुस्त नहीं कराई गई। जिससे दुर्घटना में घायल व चोटहिल होकर आने वाले मरीजों के एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। मजबूरी में लोग 400 से 600 रुपये देकर बाहर से एक्स-रे कराने को मजबूर हैं। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.एसएन मिश्रा का कहना है कि डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब होने के लिए कार्यदाई संस्था को पत्र लिखा गया है। जल्द ही एक्स-रे मशीन को दुरुस्त कराया जाएगा।

शोपीस बनी पोर्टेबल एक्स-रे मशीन

जिला अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में लगी पोर्टेबल मशीन लगभग तीन साल से शोपीस बनी है। जिला अस्पताल में उपचार कराने वाले मरीजों को इसकी सुविधा मिल सके, इसके लिए पोर्टेबल एक्स-रे मशीन लगाई गई थी। डिजिटल पोर्टेबल मशीन आने से लोगों को अस्पताल में ही एक्स-रे की सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन पिछले तीन साल से पोर्टेबल मशीन शोपीस बनी है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कई बार इंजीनियर इसे बनाकर गए, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर मशीन पुराने ढर्रे पर लौट आई। मरीजों को पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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