भाजपा नेता का बड़ा बयान, रिपोर्ट लागू हुई तो बहुरेंगे किसानो के दिन

योगेश श्रीवास्तव 

लखनऊ। किसानों की दशा सुधारने एवं उन्हें समृद्घि करने के लिए बीते 12 साल धूल फांक रही स्वामी नाथन रिपोर्ट का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। विपक्षी दल जरूर इस रिपोर्ट को लागू करने का सत्ता पक्ष  पर दबाव बनाते थे। वही दल सत्ता में आने पर इस रिपोर्ट को लेकर चुप्पी नहीं तोड़ते थे। अब भाजपा नेता ही इस रिपोर्ट के जल्द लागू होने का आश्वासन देने लगे हैं। किंतु सवाल यह है कि इस रिपोर्ट को लागू करना तो दूर अब तक अधिकांश राज्यों में किसान आयोग का गठन नहीं हो पाया। जिससे बिना किसानों की मौजूदगी के अधिकारी उनके भविष्य की योजनाएं तैयार करते है।

मालूम हो कि भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह मस्त ने आज यहां राजधानी में मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को स्मृद्घ बनाने के लिए जल्द ही स्वामी नाथन रिपोर्ट को लागू करने जा रही है। यदि वास्तव में केन्द्र सरकार इस रिपोर्ट को पूरे मनोयोग से लागू कर देता है तो निश्चित ही किसानों की दशा एवं दिशा में सुधार होगा। सवाल यह है कि भाजपा ने 2014 एवं 2017 के आम चुनाव में प्रदेश स्तर पर किसान आयोग का गठन करने का वायदा अपने लोक संकल्प पत्र के माध्यम से किया था। आज तक इस आयोग के गठन को लेकर केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा कोई पहल नहीं की गयी। जबकि देश के 21 राज्यों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं। ऐसे में भाजपा नेता द्वारा इस रिपोर्ट को लागू करने का अश्वासन लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

स्वामी नाथन रिपोर्ट की बात करें तो 18 नवम्बर 2004 को राष्टï्रीय किसान आयोग का गठन किया गया जिसकी जिम्मेदारी एमएस स्वामीनाथन को सौंपी गयी। उन्होंने किसानों की दशा सुधारने एवं आत्म हत्या के लिए विवश न होने के लिए एक रिपोर्ट अक्टूबर 2006 में केन्द्र सरकार को सौंप दी। यह रिपोर्ट बीते 12 साल से धूल फांक रही है किसी भी सरकार ने इसे लागू करने की जहमत नहीं उठायी। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वन एवं कृषि भूमि का उपयोग किसी भी दशा में गैर कृषि कार्य के लिए न किया जाए।

वन भूमि का किसानों का अधिकार होगा वह यहां पर पशु चराने के साथ ही अनावश्यक वन संपदा का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही कृषि भूमि की बिक्री न हो इस पर सरकार को प्रभावी नियंत्रण लगाना होगा। किसानों को अधिकतम 4 प्रतिशत की ब्याज दर पर लोन और कर्ज लौटाने में अक्षम किसान की कर्जमाफी का अधिकार दिया गया है। महिला किसानों को क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लेने की सुविधा देने का प्राविधान किया गया है।

इस रिपोर्ट में किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी वह भी मुफ्त, राज्य स्तर पर किसान जोखिम फाण्ड, फसलों का कम कीमत पर बीमा, उन्नति किस्म का सस्ता बीज
गांव का समूचित विकास, ग्रामीण क्षेत्र में आवश्यकता के अनुरूप खाद्यान्न की व्यवस्था मुहैया करना। कुपोषित क्षेत्रों में स्वास्थ्य की बेहतर इंतजाम, कम दर पर किसानों का स्वास्थ्य बीमा आदि शामिल है।
ऐसे में यदि यह रिपोर्ट ईमानदारी से लागू करने की हिम्मत केन्द्र सरकार उठाती है तो निश्चित ही किसानों की दशा एवं दिशा दोनों में अपेक्षाकृत परिवर्तन होगा। किंतु सवाल यह है कि भाजपा ने किसान आयोग के गठन करने का जो वायदा किया था वह अब तक पूरा नहीं हो सका।

फिर स्वामी नाथन रिपोर्ट लागू करने का भाजपा द्वारा अब तक कोई वायदा नहीं किया गया। ऐसे में यह रिपोर्ट कैसे लागू होगी। फिर भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार किये जाने वाले वीरेन्द्र सिंह मस्त का आश्वासन कितना असरदार होगा यह तो भविष्य ही बतायेगा।

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