फ्रांस में मुस्लिमों के पहनावे पर विवाद, महिलाओं को स्विमसूट बुर्किनी पहनने की मिली छूट

फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं के पहने जाने वाले स्विमसूट बुर्किनी को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। दरअसल, फ्रांस के ग्रेनोबल शहर के मेयर ने स्विमिंग पूल नियमों को बदल दिया है। नए नियमों के मुताबिक, महिलाओं को सरकारी स्विमिंग पूल में बुर्किनी समेत सभी तरह के स्विमसूट पहनने की छूट दे दी गई है।

गृह मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने विरोध जताया

इसे लेकर फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने विरोध किया। उन्होंने कहा- ये अस्वीकार्य है और वो सरकारी स्विमिंग पूल में बुर्किनी पहनने के फैसले को उलट देंगे। बुर्किनी, एक तरह का स्विमसूट है जिसे मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं। फ्रांस में आलोचक इसे देश के इस्लामीकरण के प्रतीक के रूप में देखते हैं और ये हमेशा से एक विवादित मुद्दा रहा है।

जानिए कब पहनते थे पारंपरिक स्विमसूट

समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेनोबल के मेयर ने कहा- सरकारी स्विमिंग पूल में महिला-पुरुष अपनी पसंद से कपड़े, जिसमें बुर्किनी भी शामिल है, पहनकर नहा सकेंगे। महिलाओं के लिए पहले स्विमिंग पूल में एक तरह का पारंपरिक स्विमसूट और पुरुषों के लिए ट्रंक पहनना अनिवार्य था लेकिन अब ये नियम बदल दिया गया है। इसे गृह मंत्री गेराल्ड डारमैनिन ने भड़काऊ बताया। उन्होंने कहा कि ये फ्रांस के सेक्युलिरज्म के विपरीत है और वो इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे।

कौन सा बना कानून

पिछले साल फ्रांस की संसद में ‘इस्लामी अलगाववाद’ का मुकाबला करने के लिए एक कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत सरकार उन फैसलों को चुनौती दे सकती है, जो फ्रांस के सख्त धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करने की ताकत रखते हैं। ये कानून राज्य को धर्म से अलग करने पर जोर देता है।

नए फैसले पर मिला खूब समर्थन

ग्रेनोबल के मेयर एरिक पिओल इस फैसले को शहर की बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं। पियोल ने फ्रांस के ब्रॉडकास्टर रेडियो RMC को बताया- हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि महिलाएं और पुरुष अपनी मर्जी से कपड़े पहन सकें।

फ्रांस की EELV पार्टी के प्रमुख जूलियन बेउ ने फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया- इस फैसले का धर्मनिरपेक्षता कानूनों से कोई लेना-देना नहीं है। यही कानून नागरिकों के अधिकारों की गारंटी देते हैं ताकि वे किसी भी धर्म को स्वतंत्र रूप से मान सकें। उन्होंने कहा- मैं चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाएं अपने धर्म का पालन करने में सक्षम हों। उन्हें तैरने से न रोका जाए। उनसे ये अपेक्षा न की जाए कि वो दूसरों की मर्जी से कपड़े पहनें

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