कोरोना संकट : असली नायक ने खोल दी महानायक अमिताभ बच्चन की आंखें


.यूपी के प्रवासियों के लिए पांच बसे ही जुटा पाएं अमिताभ बच्चन
.एक लाख लोगों को घरों तक भिजवा चुके है सोनू
.चालीस हजार से ज्यादा लोगों का करा रहे भोजन
.उड़ीसा में प्रवासियों को चार्टर प्लेन से भेजा
.अनिल क पूर केवल अपील तक ही सीमित

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योगेश श्रीवास्तव
लखनऊ। वैश्विक महामारी को लेकर मुंबई सहित अन्य राज्यों से प्रवासी श्रमिकों के पलायन पर केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा उन्हे गंतव्य तक पहुंचाने की सरकारी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच जिस तरह बालीबुड के सोनू सूद ने आगे बढ़कर मुंबई में काम कर रहे दूसरे राज्यों के  श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए लक्जरी बसों और उनके खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था की आज उसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। यह सारा पुनीत कार्य वह अपने निजी व्यय पर कर रहे है। यही नहीं उन्होंने उड़ीसा के कई छात्रों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए चार्टरप्लेन तक की व्यवस्था की।

उनके इस काम से प्रभावित होकर ही पिछले दिनों एक मां ने वीडियों वायरल करते हुए उन्हे अपना भाई बताते हुए कहा था कि सोनू ने उन्हे बेशकीमती तोहफा दिया है इसे वे जीवन भी नहीं भूलेगी। सोनू ने उक्त महिला के पुत्र को सकुशल उसके घर पहुंचाया था। उनके इस कार्यो से फिल्म इंडस्ट्री से लेकर समाज के हर वर्ग में सोनू सूद चर्चा का विषय बने हुए है। उनकी देखादेखी अभिनेता अमिताभ बच्चन ने लाँकडाउन खुलने के बाद मुंबई से यूपी के प्रवासी श्रमिकों को घरों तक पहुंचाने के लिए पांच बसों की व्यवस्था की है। सोनू सूद की उक्त पहल के बाद फिल्मउद्योग के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन की आंखो खोल दी है। निश्चित रूप से सोनू सूद ने प्रवासियों को उनके घरों तक पहुंचाने का काम करके असली नायक का खिताब हासिल कर लिया है। हालांकि अमिताभ बच्चन अभिनय के साथ-साथ सामाजिक कार्यो के लिए फिल्मइंडस्ट्री में खास पहचान रखते है।

उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों के बैंको के कर्ज भी अमिताभ बच्चन ने चुकाए है। लेकिन प्रवासियों श्रमिकों को उनके घरों तक भेजने में हुई देरी से उनसे एक चूक जरूर हुई। इस बारे में उनसे निर्णय में कैसे और क्यो चूक हुई यह अलग चर्चा का विषय है लेकिन जिस तरह लाँकडाउन के दौरान कड़ी और चिलचिलाती धूप में सरकार भी प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने में सोनू सूद ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया उससे फिल्म उद्योग के अलावा अन्य क्षेत्रों में सामाजिक कार्य कर रहे लोगों को भी सबक लेना चाहिए।

हालांकि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए फि ल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम के कोविड केयर फंड में पच्चीस करोड़ दिए। लेकिन जो पहल सोनू सूद ने वह सबकी नजऱ में है। सोनू सूद की माने तो इस संकट के खत्म होने तक वे लगभग एक लाख लोगों को उनके घर पहुंचा चुके है। इसी के साथ वे इस समय चालीस हजार से ज्यादा लोगों को रोजाना भोजन भी करा रहे हैं। सोनू सूद के पिता एक छोटी दुकान चलाते हैं और अपनी इस दुकान के माध्यम से वे रोज भूखे

लोगों को लंगर खिलाते हैं। पिता के इन्हीं संस्कारों के कारण सोनू सूद मजदूरों का यह दर्द महसूस कर सके और उनकी मदद करने सड़कों पर उतर आए। सोनू सूद ने एक अन्यंत्र दिए गए साक्षात्कार में कहा कि अगर वे सड़कों पर न जाते तो यह संदेश लोगों के बीच न जा पाता कि कोई उनके जैसा है जो उनकी मदद कर रहा है। यही कारण है कि उन्होंने स्वयं मजदूरों के बीच जाने का फैसला किया। सूद ने कहा कि सड़कों पर अपने पूरे परिवार के साथ भटकते मजदूरों को देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई।

सोनू ने पहली बस मजदूरों को लेकर कर्नाटक भेजी थी। सोनू सूद के काम से प्रभावित होकर एक महिला ने अपने बच्चे का नाम सोनू सूद रख लिया था। सलमान के साथ अभिनीत फिल्म दबंग में छेदी सिंह की भूमिका निभाकर बालीबुड में धूम मचाने वाले सोनू सूद ने कहा कि वे स्वयं मुंबई में एक प्रवासी बनकर आए थे। आज जब दूसरे प्रवासी तकलीफ से गुजर रहे हैं तो उनके अंदर उन्हें भी अपना अक्स दिखाई पड़ता है और यही कारण है कि वे लगातार उनकी मदद कर रहे हैं।


अभिनेता सोनू सूद से सबक लेते हुए अमिताभ बच्चन ने यूपी के प्रवासी श्रमिकों के पांच बसे भेजी तो बालीबुड से जुड़े बाकी लोग केवल आकाशवाणी पर लोगों से अपील करके ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे है। अभिनेता अनिल कपूर ने भी लाकडाउन समाप्त होने के बाद लोगों से कोरोना से बचने के लिए अपील कर रहे है।

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