गाजियाबाद से एक पैर से रिक्शा चलाने पर दिव्यांग को मिली मंजिल, साढ़े छह सौ किमी तक चलते-चलते पैर में पड़े छाले


हमीरपुर। लॉकडाउन में इन दिनों मजदूरों की बेबसी और लाचारी पूरे भारत में कही भी देखी जा सकती है लेकिन एक पैर से साढ़े छह सौ किमी तक रिक्शा चलाने वाले एक दिव्यांग को यहां देख लोगों की आंखें ही भर आयी है। इसके बाद भी उसमें देश प्रेम का जज्बा अभी भी कायम है।

हमीरपुर जनपद के मौदहा कस्बे के हुसैनियां मुहाल निवासी राजू वर्मा पुत्र राज नारायण वर्मा वर्ष 2010 में बीमारी के कारण अपना एक पैर गवां बैठा था। उसका एक पैर जांघ से काट दिये जाने के बाद वह काफी दिनों तक घर में बैठा रहा। बच्चों का पेट भरने के लिये उसने कुछ समय बाद रिक्शा चलाने लगा। लेकिन चार साल पहले यहां रिक्शे का चलन समाप्त होने के बाद वह बेकार हो गया। इसके बाद भी उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और वर्ष 2016 में वह रोजीरोटी के लिये गाजियाबाद चला गया। वहां उसने रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करने लगा।

कोरोना वायरस महामारी के पैर पसारने पर पूरा देश लॉकडाउन हो गया तो इसका काम धंधा भी ठप हो गया। पिछले दस दिन पूर्व इसने गाजियाबाद से रिक्शा लेकर अपने घर के लिये चल पड़ा। करीब साढ़े छह सौ किमी तक ये दिव्यांग एक पैर से रिक्शा चलाते हुये अपनी ससुराल बांदा पहुंचा जहां अपने बच्चों से मिला फिर आज ये वहां से रिक्शा लेकर अपने घर मौदहा पहुंचा। एक पैर से रिक्शा चलाकर इतनी लम्बी यात्रा पूरी करने पर यहां के लोग हैरान हो गये।

इसने बताया कि संकट की घड़ी में कभी भी किसी को अपनी हिम्मत नहीं छोडऩी चाहिये। संकट का डटकर मुकाबला करने से ही मंजिल मिलती है। इस दिव्यांग ने कहा कि लाँक डाउन में गाजियाबाद में काम धंधा बंद होने के कारण मन ऊब गया था इसलिये वहां से घर आना पड़ा। उसका कहना है कि देश में कोरोना महामारी से विजय पाने के लिये लाँक डाउन करना सरकार का सही कदम है।

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