दुश्मन नहीं यहाँ दोस्त बने “भारत-पाक” के सैनिक

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के सैनिक अब तक एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे हैं, लेकिन यह पहला मैका है जब दोनों देश के जवान एक साथ युद्धाभ्यास करेंगे। रूस में शंघाई सहयोग संगठन के देशों का मल्टी नेशन कॉउंटर टेरर वॉरगेम प्रोग्राम चल रहा है। दोनों देश इसी क्रार्यक्रम के तहत युद्धाभ्यास करेंगे। कार्यक्रम ‘पीस मिशन 2018’ के तहत चीन, रूस और शंघाई सहयोग संगठन में शामिल अन्य देश संयुक्त युद्धाभ्याम में हिस्सा ले रहे हैं।

रूस के चेबरकुल में इस कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार यानी 24 अगस्त को हो चुकी है। आर्मी के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा कि ये युद्धाभ्यास एससीओ देशों को आतंकवाद से लड़ने में मदद प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम में सभी देशों के सौनिकों के बीच प्रोफेशनल बातचीत, युद्ध की आपसी समझ और प्रोसीजर, ज्वाइंट कमांड और कंट्रोल का ढांचा स्थापित होगा। जिसके आतंक के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि इस युद्धाभ्यास में एससीओ में शामिल सभी आठ देशों की सेनाएं भाग ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास का मूल उद्देश्य एससीओ देशों की सेनाओं को बहुराष्ट्रीय और संयुक्त माहौल के शहरी इलाकों में आतंकवाद से निपटने का प्रशिक्षण प्रदान करना है।

 

इस अभ्यास में रूस, पाकिस्तान, चीन, भारत, किर्गिजिस्तान, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और कजाकस्तान के तीन हजार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। इस युद्धभ्यास में रूस से सबसे अधिक 1700, चीन के 700 और भारत के 200 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। भारत से राजपूत रेजिमेंट और भारतीय वायुसेना के जवान इस अभ्यास में शामिल होंगे।

एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इससे पहले कभी किसी मल्टी लैटरल एक्सरसाइज में हिस्सा नहीं लिया है जिसमें पाकिस्तान भी साथ होगा। हालांकि दोनों देशों की सेना ने यूएन के मिशन और ऑपरेशन में साथ काम जरूर किया है।

तीन हजार से अधिक सैनिक ले रहे हैं भाग
आपको बता दे की इस अभ्यास को पीस मिशन-2018 नाम दिया गया है भारत-पाकिस्तान के अलावा इसमें चीन, किर्गिजिस्तान, तजाकिस्तान, कजाकस्तान, रूस के लगभग तीन हजार से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। दोनों देशों के बीच अविश्वास की बड़ी खाई है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर भारत और पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में कैसे एक दूसरे का सहयोग करेंगे।

इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शांति की स्थापना करना
भारत की ओर से इस अभ्यास में भारतीय थलसेना की 5-राजपूत रेजिमेंट के सैनिकों को भेजा गया है। भारतीय सैन्य टुकड़ी में थलसेना के तकरीबन 167 जवान और वायुसेना के 33 जवान भाग ले रहे है। इस संयुक्त अभ्यास का मकसद शांति की स्थापना करना और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए संगठन के 8 देशों के बीच एक-दूसरे का पूर्ण्तः सहयोग करना है।

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