कुंभनगरी में ठण्ड की ठिठुरन पर भारी पड़ी आस्था…

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कुंभनगरी(प्रयागराज) । मौनी अमावस्या की पर संगम की रेती पर पहुंचे करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा ठण्ड की ठिठुरन पर भारी पड़ती नजर आयी। लाखों श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर सबसे पहले स्नान करने के लिए बीती रात खुले आसमान के नीचे संगम की रेती को ही अपना विछौना बना लिया। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को परेशानियां होने के बाद भी उनके दृढ़ संकल्प और भक्ति भावना के सामने सब कुछ बौना सिद्ध हुआ। किन्तु इन परेशानियों के बाबजूद उनके चेहरे पर शिकन नहीं आई।
आस्था और आध्यात्म की धरती तीर्थराज प्रयाग पर यूं तो श्रद्धालु पूरे वर्ष भर आकर संगम स्नान कर पुण्यफल प्राप्त करते हैं। किन्तु कुंभ के पावन पर्व पर यहां स्नान करने का महत्व हजारों गुना बढ़ जाता है। लोग अमृत पान करने की लालसा में कुंभ के दौरान यहां स्नान करते हुए गंगा की रेती पर अपने भाग्य को धन्य करते हैं। इसके इतर जब शाही स्नान होता है तब लोगों का हुजूम एकत्र होता है। कुंभ के दौरान स्नान का मुख्य पर्व मौनी अमावस्या को माना जाता है।
इस स्नान पर डुबकी लगाने के लिए कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए हैं, अभी आने वालों का सिलसिला जारी है। मौनी अमावस्या से दो दिन पूर्व ही लोग अपनी गृहस्थी बांधकर परिवार समेत यहां आना शुरु हो गए थे। रविवार की सुबह से यह भीड़ सैलाब में तब्दील हो गई। आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का आंकलन भी लगाना संभव न हो सका। हालांकि प्रशासन ने यह संख्या दो करोड़ बता दी थी। रविवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं की परीक्षा लेने के लिए शीत लहर ने भी मुहिम छेड़ दी।

जहां शनिवार को लोग गर्मी महसूस करते हुए अंदाजा लगा रहे थे कि मौनी अमावस्या पर गर्मी ही होगी। वहीं रविवार की सुबह से ही सर्द हवाओं ने अठखेलियां करते हुए श्रद्धालुओं को परेशानियां बढ़ाना शुरु कर दिया। रविवार की रात सर्द हवाओं के बीच संगम क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु गंगा की गोद में रेत को अपना बिस्तर बनाए सो रहे थे। उन्हें इसकी चिंता नहीं थी कि ठंठ की ठिठुरन कितनी है। उन्हें चिंता सिर्फ इस बात की थी कि सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में सर्व प्रथम संगम में स्नान करने का सौभाग्य कितने जल्द आएगा। यही नहीं इसका भी वे इंतजार पूरी रात करते रहे कि सुबह होते ही सनातनी सेना कहे जाने वाले 13 अखाड़ों समेत दुर्लभ साधु-संतों का उन्हें दर्शन कैसे मिलेगा। इन्हीं स्वप्नों ने उन्हें रात में सोने भी नहीं दिया। 

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