बिहार में गृह मंत्री की वर्जुअल रैली : अमित शाह ने कहा-इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की थी, अब वो नहीं हैं, लेकिन

पटना. भाजपा नेता और गृह मंत्री अमित शाह रविवार को बिहार में वर्चुअल रैली की। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की थी। इंदिरा अब नहीं हैं, लेकिन गरीबी वहीं की वहीं है। अमित शाह ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि विपक्ष को ये पता नहीं है कि हमारे नेता नरेंद्र मोदी जो कहते हैं वो करते हैं। आयुष्मान भारत योजना इस बात का गवाह है। एक करोड़ लोगों ने पीएम मोदी की वजह से बगैर किसी खर्च के अपनी बीमारियों से जुड़ा ऑपरेशन कराया। उज्जवला योजना के तहत 8 करोड़ महिलाओं को LPG गैस की वजह से चूल्हे से मुक्ति मिली।

शाह के भाषण की अहम बातें

बिहार में ही सबसे पहले लोकतंत्र आया
करोड़ों कोरोनावॉरियर्स को समर्पण और सेवा के लिए धन्यवाद करना चाहता हूं। बिहार की जनता का भी धन्यवाद देता हू्ं, जिसने एनडीए को दूसरी बार जनादेश दिया। बिहार ही है, जहां सबसे पहले दुनिया को लोकतंत्र का अनुभव हुआ। यहां मगध साम्राज्य की नींव पड़ी। बुद्ध, महावीर, चंद्रगुप्त और चाणक्य की इस भूमि ने हमेशा ही नेतृत्व किया है। भारत के लोकतांत्रिक मूल्य जब भी हाशिये पर गए तब यहां की धरती से ही बिगुल बजा।  जय प्रकाश नारायण, जगजीवन राम के योगदान को कैसे भूल सकते हैं। आपातकाल में जब इंदिरा गांधी ने जनता का गला घोंटने का काम किया, तब जेपी के नेतृत्व में बिहार के लोगों ने ही आवाज उठाई।

बिहार ने ही वंशवाद और जातिवाद की लड़ाई लड़ी
बिहार की जनता ने वंशवाद और जातिवाद के खिलाफ हमेशा लड़ाई लड़ी। लोग इसे बिहार की चुनावी रैली कह रहे हैं। इस रैली का चुनावों से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा जनसंवाद, जनसंपर्क और जनतंत्र में विश्वास रखती है। कोरोना काल में कैसे संपर्क करेंगे। हम अपना संस्कार गंवा दें। मैं जेपी नड्डा जी को बधाई देता हूं कि 75 वर्चुअल रैलियों के जरिए वे देशभर की जनता से संपर्क करने का जरिया दिया है। ये राजनीतिक दल का गुणगान गाने के लिए,चुनाव के लिए नहीं है। देश की जनता को कोरोना के खिलाफ जंग में जोड़ने और उनके हौसले को बढ़ाने के लिए है।

जो लोग इस रैली को राजनीति से जोड़ रहे हैं, उनसे पूछना चाहता हूं कि आपको किसने रोका था। दिल्ली में बैठे रहने की बजाय आप रैली ही कर लेते। पर ऐसे लोगों पर मैं वक्त जाया नहीं करूंगा। कुछ लोगों ने (राबड़ी और तेजस्वी यादव) थाली बजाकर इस वर्चुअल रैली का विरोध किया। ऐसे लोग कहीं ना कहीं मोदीजी के अभियान में जुड़ ही गए। 

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