हुजूर!ये कुर्सी चेयरमैन साहिबा की है ?

(क़ुतुब अंसारी/अशोक सोनी)
जरवल(बहराइच) दिन ब दिन जरवल नगर पंचायत मीडिया की सुर्खियों में आती जा रही है अब तो यहाँ की चेयरमैन तस्लीम बानो की कुर्सी पर बैठ कर उनके पति इंतजार अहमद उर्फ मिथुन निकाय के अभिलेखों तक को खंगाल कर अपना रौब कर्मचारियों के साथ जनता पर ग़ालिब करते देखे जा रहे हैं जब कि ये अधिकार उन्हे मिला ही नही।सूत्रों की माने तो सुबह पौने दस बजे से देर रात्रि तक चेयरमैन पति मिथुन कार्यालय मे चेयरमैन की कुर्सी पर बैठ कर अपना ही सिक्का कायम करने के लिए जायज व नाजायज तरीके से लोगो से पेश आ रहे हैं
जिससे जनहित के सारे कार्य प्रभावित हो चुके हैं जिसकी शिकायत भी शासन व प्रशासन मे सभासदो ने कर रखी है।दूसरी तरफ चेयरमैन पति अब तो सरकारी अभिलेखो के साथ कर्मचारियों की उपस्थिति मे भी दखल देने लगे है जिससे कर्मचारी भी दहशदजदा दिखाई दे रहे हैं पर डर के मारे कुछ कह नही पा रहे हैं।बताते चले कि यहाँ की अशिक्षित चेयरमैन तस्लीम बानो चुनाव जीतने के बाद हस्ताक्षर किसी तरह बनाना सीख सकी और यही हाल इनके पति मिथुन की भी है पर इनके द्वारा सरकारी अभिलेखों को खंघालना अपने हिसाब से  आदेश पारित करना कस्बे की भगौलिक स्थित को भी चुनौती दी जा रही है।
जिस पर शासन व प्रशासन को जनहित मे ध्यान देना चाहिए।लोगो मे कई कर्मचारियों के साथ तमाम पीड़ित जनता ने नाम न छापने के अनुरोध पर कहा साहब इस निकाय के जिम्मेदार लोगो के तुगलकी फरमान से आजिज आ चुके हैं कर्मचारी कहते है कुछ करू तो आफत न करूं तो आफत एक तरफ खाई तो दूसरी तरफ कुआ दिखाई दे रहा है लगता है कि बी आर एस लेना पड़ेगा तो इलाकाई लोग दाखिल खारिज, वरासत आदि के लिए चक्कर लगा रहे हैं जिन्हे महीनों से टरकाया जा रहा है।जिससे जनहित के कार्यो पर पूरी तरह ग्रहण लग चुका है विकास का सपना तो यहाँ कोसो दूर है जिससे जनता ने जो चुनाव के दौरान तस्लीम बानो के प्रति सहानुभूति दिखाई थी  विकास का सपना देखा था उस पर पानी फिरता नजर आ चुका है।
बोर्ड गठन के तकरीबन आठ महीने बीतने को है यहाँ की चेयरमैन तस्लीम बानो का शायद ही कोई मोबाईल नंबर जान सका हो सारा कुछ निकाय का संचालन उनके पति मिथुन द्वारा किया जाता है जिससे नगर के तमाम जनहित के कार्य भी विवाद की स्थित मे आ चुके हैं जो कस्बे के लिए शुभ संकेत बिल्कुल नही है।चेयरमैन की कुर्सी पर उनके पति मिथुन का दखल काफी चर्चा का विषय भी बन चुका है।इसके बावजूद भी चेयरमैन का कार्यालय न आना तमाम सवालों को जन्म दे रहा है।
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