आईएएस और आईआरएस अधिकारी ने बिना दान दहेज कोर्ट मैरिज कर कायम की मिसाल

अतुल शर्मा

गाजियाबाद। राजनेताओं व बड़े-बड़े उद्योगपतियों के परिवार में होने वाली शादी,विवाह में दिखावे के नाम पर पैसे को पानी की तरह बहाया जाता है। वही आज गाजियाबाद में एक आईएएस और आईआरएस जोड़े ने समाज को आईना दिखाते हुए एक मिसाल कायम की। दोनों अधिकारियों ने सदर तहसील में पहुंचकर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में कोर्ट मैरिज की। इस अधिकारी जोड़े ने कोर्ट मैरिज करने का सबसे बड़ा कारण समाज में फिजूलखर्ची रोकने का प्रयास बताया। राजस्थान की रहने वाली आईआरएस रंजना और गाजियाबाद के कविनगर निवासी आईएएस नवीन चंद्र ने सामान्य परिवार से होते हुए भी बिना दान दहेज के शादी करने का बीड़ा उठाया।

शादी के पवित्र बंधन में बंधने वाले नव दंपति आईएएस व आईआरएस मसूरी स्थित आईएएस अकैडमी में अभी ट्रेनिंग कर रहे हैं और दोनों 2017 बैच के अधिकारी है जिन्हें अभी पोस्टिंग नहीं मिली है। इस मामले में दंपति ने 10:30 बजे तहसील परिसर में पहुंचकर अपने शादी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया, रजिस्ट्रेशन के बाद दोनों ने कोर्ट मैरिज कर समाज को एक अलग ही संदेश दिया है।

दोनों अधिकारियों ने कहा कि शादी में फिजूलखर्ची खर्ची का एक चलन सा चल गया। अक्सर हम लोग हजारों ऐसे लोगों को दावत देते हैं जो पहले से ही संपन्न है और अपने पैसे से हर चीज उपलब्ध कर सकते हैं जबकि समाज में गरीब तबके के लोगों को अपनी बेटियों की शादी करने में काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं। यहां तक कि कई तो अपनी बेटियों की शादी तक नही कर पाते है। इसी की समाज की ऐसी कुप्रथा को रोकने के लिए बिना दान दहेज के दोनों ने अपनी रजामंदी व परिवार की सलाह मशवरा के बाद कोर्ट मैरिज की है।

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