भाजपा से राजनीतिक पारी की आगाज़ करने वाले पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की दूसरी पारी की शुरुआत कांग्रेस से हुई. भाजपा से लोकसभा का सांसद बने तो कांग्रेस से पंजाब में मंत्री. मंत्री पद त्यागने के बाद से ही उनके AAP ज्वाइन करने की अटकलें तेज हैं. अटकलें इसलिए भी तेज हो गई है, क्योंकि उनसे जुड़े सोशल मीडिया पेज फिर से एक्टिव हो गए हैं.
सिद्धू से जुड़े एक सोशल मीडिया पेज पर लिखा गया है कि कुछ देर की खामोशी है, अब कानों में शोर आएगा, तुम्हारा तो सिर्फ वक्त है अब सिद्धू का दौर आएगा.
ऐसे में सिद्धू के आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की अटकलों के बीच कांग्रेस चौंकन्ना हो गई है. सिद्धू के सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी हो रही है. कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू को स्टार प्रचारक की लिस्ट में जगह दी थी, लेकिन उन्होंने प्रचार नहीं किया. गौरतलब है कि कांग्रेस को दिल्ली में करारी हार मिली है और वह एक भी सीट नहीं जीत सकी है.
खबर है कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) चीफ प्रशांत किशोर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और सिद्धू के बीच नजदीकी बढ़ाने के लिए एक ‘ब्रिज’ का काम कर सकते हैं. प्रशांत किशोर ने दिल्ली चुनाव में आप के लिए रणनीति तैयार की थी. वहीं ऐसा माना जा रहा है कि पंजाब में आप को मुख्यमंत्री के चेहरे के लिए एक पॉपुलर नाम की जरूरत है, ऐसे में नवजोत सिंह सिद्धू एक्स-फैक्टर साबित हो सकते हैं.
कैप्टन के हाथों किनारे किए जाने के बाद, पंजाब सरकार से इस्तीफा दे चुके सिद्धू सरकार से नाराज होकर लंबे समय से घर पर बैठे हैं. पूर्व कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने लौटने से भी साफ इंकार कर दिया है. उन्होंने कांग्रेस संगठन के एक वरिष्ठ नेता से मुलाकात के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक एक कांग्रेस नेता ने नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने की काफी कोशिश की और कहा कि उन्हें अब सरकार में लौटना चाहिए, लेकिन सिद्धू नहीं माने. सिद्धू ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का उन पर विश्वास नहीं है. वे सार्वजनिक तौर पर भी इस बात को प्रकट करने से नहीं चूकते.
बहरहाल, दिल्ली के नतीजों के बाद आम आदमी पार्टी सिद्धू को अपने पाले में लाने की तैयारी में जुट गई है. कांग्रेस नेता ने बताया कि यह बात उनकी जानकारी में है कि दोनों ओर से बातचीत चल रही है, लेकिन यह किस स्तर पर पहुंची है, इसकी जानकारी नहीं है. कांग्रेस में भी इस बात की चर्चा है कि पार्टी में हाशिए पर लगे सिद्धू आप का झाड़ू थाम सकते हैं. इसीलिए स्टार प्रचारक होने के बावजूद सिद्धू ने कांग्रेस के पक्ष में एक भी रैली नहीं की, क्योंकि वह जानते थे कि उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ ही बोलना पड़ेगा. हालांकि, आप की तरफ से किसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान भी आप ने उन्हें पार्टी में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी उन्हें केवल स्टार प्रचारक बनाकर ही रखना चाहती थी. ऐसे में उनकी बात नहीं बनी. अब आप और सिद्धू , दोनों के लिए स्थितियां बदल गई हैं.
दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद आप की नजरें एक बार फिर पंजाब पर लग गई है. पार्टी इस बार वह गलतियां दोहराना नहीं चाहती, जो पिछले चुनाव के दौरान हुई थीं. आम आदमी पार्टी और नवजोत सिंह सिद्धू दोनों के लिए यह काफी उपयुक्त मौका है. पंजाब में आम आदमी पार्टी का झाड़ू लगातार तीन बार से बिखर रहा है. पार्टी के आधा दर्जन से ज्यादा विधायक मुख्य ग्रुप को छोड़ चुके हैं. सुखपाल खैहरा, कंवर संधू, सरीखे नेता पार्टी लाइन से अलग चल रहे हैं. पार्टी के पास भगवंत मान को छोड़कर कोई बड़ा चेहरा नहीं है. ऐसे में उन्हें एक बड़े जाट सिख चेहरे की तलाश है, जो सिद्धू पूरा कर सकते हैं.