श्रीराम कथा के मध्य कथा पंडाल में कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

भास्कर समाचार सेवा
हाथरस/सिकंदराराव। निकटवर्ती गांव महामई में श्रीराम कथा के मध्य राम कथा पंडाल में कवि सम्मेलन का आयोजन हिंदी प्रोत्साहन समिति के सहयोग से संपन्न हुआ।
कथा वाचक ओम प्रकाश शर्मा के सानिध्य में तथा गजेंद्र सिंह चौहान परम संत की अध्यक्षता में आयोजित इस कवि सम्मेलन में कवियों ने भक्ति रस, वीर रस, हास्य व्यंग की रचनाओं से श्रोताओं को घंटों बांधे रखा। कर्म योग सेवा संघ के अध्यक्ष विवेक शील राघव विशिष्ट अतिथि रहे।
कवि सम्मेलन का संचालन हिंदी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष प्रसिद्ध कवि देवेन्द्र दीक्षित शूल ने किया।
माँ सरस्वती एवं भगवान श्रीराम के छवि चित्रों पर पुष्पार्चन के बाद पुर्दिलनगर के कवि सत्यप्रकाश शर्मा सत्य ने पढ़ा-‘” सत्य को सत्य कहने में बड़ा आनंद आता है सत्य होता बहुत कड़वा बाद आनंद पाता है।”
वहीं युवा हास्य कवि पंकज पंडा ने पढ़ा-” प्यार बतन से था जिन्हें, गए जान तक बार मरते दम तक जो लड़े उनको नमन हजार।'”
वहीं डॉ दत्तात्रेय द्विवेदी पुर्दिलनगर ने अपने काव्य पाठ से समा बांध दिया
” दो शब्द अपनेपन के कह कर तो देखिए।
जिंदगी जीने का मजा दोगुना होगा
परिवार में एक साथ रह कर तो देखिए ।”
व्यंग्यकार देवेन्द्र दीक्षित शूल ने रामचरितमानस के रचयिता संत कवि तुलसीदास को यूं प्रणाम किया- ” जन मन में बिठला दिए जिसने सीताराम।
ऐसे तुलसी संत को बारंबार प्रणाम ।”
कवि शूल की नई रचना “क्यों खिचड़ी अलग पकाता है”
भी खूब सराही गई ।
कवि विवेकशील राघव ने पढ़ा- ओ किसानों ,नौजवानों थाम लो कारीगरी।
हाथ से वरना तुम्हारे रोटियां उड़ जाएंगी ।
वहीं इगलास से पधार वरिष्ठ कवि गाफिल स्वामी की मां पर लिखी गई रचना बहुत सराही गई- “मां की ममता प्यार का है विशाल संसार। लिख ना पाया आज तक कोई रचनाकार।
प्रेम सिंह यादव की शराब पर पढ़ी गई रचना ने श्रोताओं को आनंदित किया – “क्यों रहता गमगीन, प्यारे खूब पिओ रंगीन।”
डॉक्टर सत्येंद्र भारद्वाज आभास ने श्रीराम और श्रीकृष्ण पर श्रेष्ठ रचनाएं पढीं।
आयोजक उमेश चंद्र शर्मा, जितेंद्र पचौरी, यशपाल सिंह चौहान, प्रबल प्रताप पुंडीर, दलबीर सिंह, रवि दुबे, पुष्पेंद्र भारद्वाज, राम शंकर भारद्वाज, विकास भारद्वाज आदि ने कवियों का सम्मान किया।
इस अवसर पर सैकड़ों श्रोताओं की उपस्थिति अंत तक रही।कथाचार्य ओ पी शर्मा का सम्मान हिंदी प्रोत्साहन समिति की ओर से शाल, माला व स्मृति चिन्ह देकर किया गया। इस अवसर पर विनय पचौरी, प्रदीप पचोरी, रविकांत शर्मा, योगेंद्र शर्मा, विवेक दुबे आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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