एससी-एसटी एक्ट का लगातार विरोध कर रहे देवकीनंदन महाराज पर पुलिस का शिकंजा

नई दिल्ली। एससी/एसटी एक्ट को मूल रूप में बहाल करने के विरोध का मामला लगातार जोर पकड़ता जा रहा है। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज एससी-एसटी एक्ट के विरोध में लगातार सरकार पर हमला बोल रहे हैं।

देवकीनंदन ठाकुर ने साधा सरकार पर हमला 

देवकीनंदन ठाकुर ने सरकार को ललकारते हुए कहा था कि दो महीने का वक्त है, वरना हम वह करके दिखाएंगे जो भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ। मथुरा के रहने वाले देवकीनंदन ठाकुर मूल रूप से एक कथावाचक और एक आध्यात्मिक गुरु हैं। वह भारत के विभिन्न राज्यों के आलावा विदेशों में श्रीकृष्ण की कथाओं का प्रवचन करते हैं।

देवकीनंदन ठाकुर मथुरा के रहने वाले हैं

देवकीनंदन ठाकुर का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा (भगवान कृष्ण के जन्मस्थान) के ओहवा गांव में 12 सितंबर 1978 को हुआ था। एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए देवकीनंदन के पिता का नाम राजवीर शर्मा है। परिवार में देवकीनंदन कुल 6 भाई-बहन हैं। घर में पहले से व्याप्त धार्मिक माहौल का उनके जीवन पर काफी असर पड़ा। छह साल की उम्र से ही उन्होंने अपने घर को छोड़ दिया और श्रीधाम वृंदावन में रहने लगे। निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत अपनी आध्यात्मिक शिक्षा दीक्षा ली।

भारत के अलावा विदेशों में भी करते हैं प्रवचन

भारत के अलावा विदेशों में भी करते हैं प्रवचन

ऐसा कहा जाता है कि, 13 वर्ष की अल्पायु में ही देवकीनंदन को श्रीमद् भागवत महापुराण को कंठस्थ कर लिया था। देवकीनंदन ठाकुर का वृंदावन में एक विशाल आश्रम है। जहां पर वह अपना प्रवास करते हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने देश के बाहर पहली बार हांगकांग में श्रीमद् भागवत महापुराण का प्रवचन किया था। वह अमेरिका, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे और हॉलैंड जैसे देशों में अपने कथा वाचन का प्रोग्राम कर चुके हैं।

एससी-एसटी एक्ट का लगातार कर रहे हैं विरोध

एससी-एसटी एक्ट का लगातार कर रहे हैं विरोध

देवकीनंदन ठाकुर का मथुरा में विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट है। आश्रम गतिविधियों में संस्कृत छत्र विकास, गरीब, विकलांग,बुजुर्ग नागरिकों की मदद ,गोशाला, वृधा आश्रम, अनाथ बच्चों की सेवा आदि शामिल हैं। एससी-एसटी एक्ट में किए बदलाव को समाज बांटने वाला बताते हुए भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा है कि केंद्र सरकार अगले दो महीने में इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रूप में बदल दे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम सब मिलकर देश को जातिगत राजनीति वाले दलों से स्थाई समाधान देंगे।

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