मिल-डे-मील घोटाला : विद्यालय में मीनू के मुताबिक नहीं मिल रहा भोजन, रोटी सब्जी की जगह मिल रही तहारी

  • सरकार की योजना व डीएम की महेनत पर पानी फेर रहा बेसिक शिक्षा विभाग

भास्कर समाचार सेवा
हापुड। नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे-मील में अनियमित्ता के सम्बन्ध मे मोहल्लावासियों सहित इसकी शिकायत शिक्षकाओ ने भी थी जिसके बाद बीएसए ने मामले में जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद प्रधान अध्यापक के अवकाश पर चले जाने के बाद बीएसए ने मिड-डे-मील की जिम्मेदारी विकास शर्मा को सौप दी, इस दौरान स्कूली बच्चों को मिड-डे-मील मेन्यू के हिसाब से मिलने लगा। लेकिन आज बृहस्पतिवार को प्रधानाध्यापक के दोबारा अवकाश से वापस आने से फिर से बच्चों को तहरी (खिचड़ी) दी गई, जबकि मेन्यू के हिसाब से आज बच्चों को रोटी सब्जी दी जानी चाहिए थी। बता दें कि जनपद के विद्यालयो में जिलाधिकारी मेधा रूपम स्वंम जाकर लगातार सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर प्रयासरत हैं। जिससे सरकार द्वारा चलाई जा रही मिड-डे-मील योजना व बेहतर शिक्षा बच्चों को मिल सके। लेकिन कुछ लापरवाह कर्मचारी अपनी मुठमर्दी के चलते डीएम की मेहनत पर पानी फेरते व सरकार की योजना को पलीता लगा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार नगर क्षेत्र के ग्राम शिवगढ़ी के प्राथमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना (मिड डे मील) चरमराने से अभिभावकों में गुस्सा था जिसकी शिकायत 04 मार्च 2022 जिलाधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित लखनऊ में अला अधिकारियों को की थी। उनके अनुसार शिवगढ़ी के प्राथमिक स्कूल में मिड्डे मील योजना नाममात्र को चलाई जा रही है। स्कूल में छात्र-छात्राओ की संख्या के हिसाब से मध्याह्न भोजन नहीं बनया जा रहा है। भोजन मीनू को भी दरकिनार कर दिया गया है। भोजन नियमानुसार नहीं बनाया जा रहा है, अभिभावकों की माने तो विद्यालय में फल और दूध वितरण नहीं किया जा रहा है सप्ताह में सातों दिन बच्चों को प्रतिदिन चावल की ताहरी ही परोसी जा रही थी। ताहरी में भी मानक के अनुरूप तेल मसाला नहीं डाला जा रहा था। शिकायती पत्र में द्वारा बताया गया कि प्रा० वि० शिवगढी में मिड-डे-मील भोजन मीनू के अनुसार नही बनता है। विद्यालय की शिक्षिकाओं व बच्चों के अभिभावकों ने इस मामले में पिछले दिनों जिलाधिकारी व बीएसए से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी अर्चना गुप्ता ने स्कूलों में नियमानुसार मध्याह्न भोजन न बनाये जाने की जांच खण्ड शिक्षा अधिकारी को सौपी गई। जिसके बाद नियम अनुसार कार्रवाई करने की बात कही गई। मामला ठंडे बस्ते में पहुचने के बाद अचानक प्रधान अध्यापक मेडिकल अवकाश पर चली गई। जिसके बाद मिड-डे-मील की जिम्मेदारी बेसिक विभाग के विकास शर्मा को दी गई। बच्चों द्वारा इस दौरान मिड-डे-मील की तारीफ की गई व मेन्यू के हिसाब से मिड-डे-मील मिलने लगा था। लेकिन आज बृहस्पतिवार को प्रधानाध्यापक के दोबारा आने से फिर से बच्चों को तहरी (खिचड़ी) दी गई। अब ऐसा दोबारा क्यो हुआ कि मि-डे-मिल बिना मेन्यू के बच्चों को फिर से दोबारा तहरी (खिचड़ी) दी जाने लगी। जब इस दौरान प्रधान अध्यापक से पूछा गया कि आपके रहते ही खिचड़ी क्यो दी जाती हैं तो उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि रसोइया की कई माह से तनखा के कारण रसोइया नही है। अब सवाल यह बनता हैं कि जब वह अवकाश पर थी तो मि-डे-मिल कार्यवाहक विकास शर्मा कैसे मेन्यू के हिसाब से बच्चों को भोजन दे रहे थे। मामले की जानकारी के लिए बीएसए से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन नही उठाया। जिससे प्रतीत होता है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मि-डे-मिल योजना को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पलीता लगाया जा रहा है।

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