भारत के इन मन्दिरो में रोज होते है बड़े-बड़े चमत्कार, जानकर कर चौक जायेंगे आप….

भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी शामिल हैं जो अपनी अमीरी के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। भारत एक धार्मिक देश है और यहां पर लोग अंधहीन भक्‍ति में मग्‍न रहते हैं।

भारत के कुछ मंदिरों में इतना अपार सोना और धन जमा है कि आम इंसान की आंखें चुंधिया जाएं। आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते कि भारत के इन चुनिंदा मंदिरों में कितना सोना है। एक सर्वे के अनुसार भारत के ऐसे कुछ चुनिंदा मंदिर हैं जिनमें इतना अपार सोना और धन रखा है कि देश एक बार फिर से सोने की चिडिया बन सकता है। ये मंदिर ना केवल धन के मामले में अमीर हैं बल्कि यहां आए दिन कोई ना कोई चमत्‍कार भी होते रहते हैं।

आज हम आपको भारत के ऐसे 2 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर बेशुमार दौलत रखी है।

तो चलिए जानते हैं इन भारत के सबसे अमीर और चमत्कारिक मंदिर के बारे में।

पद्मनाभास्‍वामी मंदिर

जब भी भारत के धनी मंदिरों का जिक्र होता है तो केरल के इस मंदिर का जिक्र जरूर आता है। इस मंदिर में भगवान विष्‍णु की मूर्ति स्‍थापित है लेकिन ये मूर्ति यहां कैसे आई, ये कोई नहीं जानता। प्राचीन काल से त्रावणकोर परिवार इस मंदिर की देखरेख करता आ रहा है। साल 2011 में इस मंदिर की ख्‍याति विदेशों तक पहुंच गई थी। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस मंदिर के सोने से भरे खजानों के तहखानों को खोलने के लिए कहा था।

आपको बता दें कि इस चमत्कारिक मंदिर के नीचे 6 तहखाने हैं जिनमें से पांच को खोला गया था और 5 दिनों के अंदर ही तकरीबन एक लाख करोड़ का खजाना मिल गया था। ये बहुत बड़ी रकम है और इससे बड़ा खजाना आज तक सरकार के हाथ नहीं लगा था। अभी भी एक तहखाना नहीं खुल पाया है और कहा जाता है कि इसे खोला तो पृथ्‍वी पर सर्वनाश हो जाएगा। बस इसी के डर से इस तहखाने को नहीं खोला जा रहा है। इस चमत्कारिक मंदिर में भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैा।

ज्‍वालामुखी मंदिर

ज्‍वालामुखी मंदिर यानि की वो मंदिर जहां पर हर समय ज्‍वाला जलती रहती है।

इस मंदिर में बिना घी और बाती के चौबीासों घंटे लगातार ज्‍वाला जलती रहती है। खुद वैज्ञानिक भी इस मंदिर की महिमा का पता नहीं लगा पाए हैं। इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी। मान्‍यता है कि अग्निकुंड में आत्‍मदाह करने के बाद माता सती की जीभ यहां पर गिरी थी। अब आप माता सती के दर्शन यहां ज्‍वाला के रूप में कर सकते हैं। प्राचीन समय में यहां कई चमत्‍कार हुआ करते थे। ज्‍वाला देवी की महिमा कुछ ऐसी है कि मुस्लिम होने के बावजूद बादशाह अकबर ने भी यहां माथा टेका था। अकबर ने बहुत कोशिश की इस ज्‍वाला को बुझाने की लेकिन वो नाकाम रहे। इस चमत्कारिक मंदिर का निर्माण भूमि चंद ने करवाया था और इसके बाद महाराजस रणजीत सिंह और राजा संसार चंद ने साल 1835 में इसे पुर्ननिर्मित करवाया।

कई सालों से इस चमत्कारिक मंदिर में ज्‍योति जल रही है और इसका रहस्‍य आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है। इस मंदिर की महिमा के आगे विज्ञान भी हार मान चुका है।

अगर आप भी स्‍वयं अपनी आंखों से कलियुग में चमत्‍कार के साक्षी बनना चाहते हैं तो इन दो मंदिरों के दर्शन जरूर करें।

Back to top button
E-Paper