बिहार में नीतीश कुमार के हौसले बुलंद, ‘इलेक्शन गुरू’ ने थामा जेडीयू का हाथ…

 Prashant kishor joins JDU

पटना : चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने जेडीयू का दामन थाम लिया है। वह बिहार की राजधानी पटना में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुई जेडीयू की राज्‍य कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी में शामिल हुए। इसे जेडीयू के लिए काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर के जुड़ने से पार्टी को बिहार में मजबूती मिलेगी। वह पार्टी को बेहतर चुनावी रणनीतियां बनाने में मदद दे सकते हैं।

नीतीश कुमार के साथ पूर्व में काम कर चुके प्रशांत किशोर के जेडीयू से जुड़ने की अटकलें पिछले कुछ समय से लगाई जा रही थीं। प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश के साथ काम किया था। तब उन्‍होंने जेडीयू के लिए जो चुनावी रणनीतियां बनाई थीं, वे बेहद कारगर रही थीं। अब वह एक नेता के तौर पर जेडीयू में शामिल हैं और नीतीश के साथ मिलकर पार्टी को मजबूती देने के लिए काम करेंगे।

प्रशांत किशोर पूर्व में नरेंद्र मोदी के साथ भी काम कर चुके हैं। 2012 में जब मोदी गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे, तब प्रशांत किशोर को काफी करीब से उनके साथ काम का मौका मिला था। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उन्‍होंने बीजेपी के लिए काम किया था और इस चुनाव में पार्टी को जबरदस्‍त सफलता मिली। लेकिन इसी चुनाव के बाद बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह से उनके मनमुटाव की बातें सामने आईं, जिसके बाद उन्‍होंने अपना रास्‍ता अलग कर लिया। बाद में उन्‍होंने कांग्रेस सहित कई ऐसे दलों के लिए भी चुनावी रणनीतियां बनाई, जो बीजेपी की प्रतिद्वंद्वी रहीं।

पिछले लगभग 6 वर्षों से विभिन्‍न राजनीतिक दलों के लिए सफल चुनावी रणनीतियां बना चुके प्रशांत किशोर ने करीब 6 दिन पहले ही कहा था कि वह अब किसी भी पार्टी के प्रचार रणनीति अभियान का हिस्‍सा नहीं होंगे। इसके बाद से ही प्रशांत किशोर के राजनीति से जुड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। इस बीच, जेडीयू से उनके जुड़ने की बातें सामने आईं, जिस पर आज मुहर लग गई।

जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसे निभाऊंगा: प्रशांत किशोर
जेडीयू ज्वाइन करने के फैसले के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह ऑफर काफी पहले से था पर अब समय आ गया जब मैंने फैसला लिया. नीतीश कुमार जो भी जिम्मेदारी सौंपेंगे उसे निभाउंगा, चाहे वो सरकार में हो या पार्टी में. दोनों के बीच पुल का भी काम करूंगा.

 

बीजेपी और कांग्रेस में मची ‘खलबली’
बीजेपी के साथ सीट बंटवारे को लेकर प्रशान्त ने कहा कि एक सप्ताह से दस दिन के अंदर सीटों का फैसला हो जाएगा. इतना तय है कि जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में ही रहेगी. माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर के आने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में खलबली है. जेडीयू की तरफ से प्रशांत किशोर बातचीत करेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि जहां अच्छी डील मिलेगी जेडीयू उसे मानेगा.

 


पीएम मोदी 48% लोगों की पसंद, 11% के साथ राहुल दूसरे नंबर पर: प्रशांत किशोर का सर्वे

हाल ही में प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा सर्वे किया था. आंकड़ों की बात करें तो पीएम मोदी 48 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हैं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं जो 11 प्रतिशत लोगों की पसंद है. राहुल से मोदी 400% से भी ज्यादा की बढ़त लिए हुए हैं. मोदी का मुकाबला करने निकले बाकी सिंगल डिजीट में ही नहीं बल्कि 3-4-5 प्रतिशत में हैं. सर्वे के नतीजे राजनीतिक हैं लेकिन इसके बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक और मौका मिल गया है.

 

बैठक से पहले बोले RCP सिंह- कोई छोटा या बड़ा भाई नहीं
बैठक से पहले जेडीयू के बड़े नेता आरसीपी सिंह ने ये कहकर सियासी खलबली मचा दी है कि बिहार में कोई बड़ा और कोई छोटा भाई नहीं है.  आरसीपी सिंह का ये बयान इस मायने में काफी अहम हो जाता है क्योंकि बीजेपी खुद को बड़ा भाई मानते हुए लोकसभा की ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है. जबकि जेडीयू पुराने रिश्तों की दुहाई देकर ज्यादा सीटों की मांग कर रही है. बिहार में लोकसभा की 40 सीट है, बीजेपी के पास अभी 22 सांसद हैं. चर्चा है कि जेडीयू 12 से 15 सीटों पर लड़ सकती है, ऐसे में बीजेपी को अपनी कुछ सीटें जेडीयू को देनी होगी.

 

कौन हैं प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर बड़े चुनावी रणनीतिकार हैं, बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू के लिए काम कर चुके हैं. 8 साल संयुक्त राष्ट्र में हेल्थ एक्सपर्ट रह चुके प्रशांत किशोर को पीके नाम से भी जाना जाता है. जंग का मैदान कितना भी बड़ा हो प्रशांत किशोर हमेशा पर्दे के पीछे से रहकर ही भूमिका निभाई है. 2012 में पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के लिए रणनीति बनाई.

 

2013 में सिटीजन फॉर अकाउंटबेल गवर्नेंस नाम की संस्था बनाई. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई. सोशल मीडिया कैंपन, चाय पर चर्चा, 3 डी प्रचार, रन पर यूनिटी से मोदी की मदद की.

 

2015 में जेडीयू के साथ आए, बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की मदद की. 2016 में नीतीश कुमार ने बिहार विकास मिशन का अध्यक्ष बनाया. 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई. 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद की लेकिन बीजेपी जीत गई.

जो भी जिम्मेदारी मिलेगी उसे निभाऊंगा: प्रशांत किशोर
जेडीयू ज्वाइन करने के फैसले के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह ऑफर काफी पहले से था पर अब समय आ गया जब मैंने फैसला लिया. नीतीश कुमार जो भी जिम्मेदारी सौंपेंगे उसे निभाउंगा, चाहे वो सरकार में हो या पार्टी में. दोनों के बीच पुल का भी काम करूंगा.

 

बीजेपी और कांग्रेस में मची ‘खलबली’
बीजेपी के साथ सीट बंटवारे को लेकर प्रशान्त ने कहा कि एक सप्ताह से दस दिन के अंदर सीटों का फैसला हो जाएगा. इतना तय है कि जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में ही रहेगी. माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर के आने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में खलबली है. जेडीयू की तरफ से प्रशांत किशोर बातचीत करेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि जहां अच्छी डील मिलेगी जेडीयू उसे मानेगा.

 


पीएम मोदी 48% लोगों की पसंद, 11% के साथ राहुल दूसरे नंबर पर: प्रशांत किशोर का सर्वे

हाल ही में प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी ने लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा सर्वे किया था. आंकड़ों की बात करें तो पीएम मोदी 48 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हैं, दूसरे नंबर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हैं जो 11 प्रतिशत लोगों की पसंद है. राहुल से मोदी 400% से भी ज्यादा की बढ़त लिए हुए हैं. मोदी का मुकाबला करने निकले बाकी सिंगल डिजीट में ही नहीं बल्कि 3-4-5 प्रतिशत में हैं. सर्वे के नतीजे राजनीतिक हैं लेकिन इसके बाद बीजेपी को कांग्रेस पर हमला बोलने का एक और मौका मिल गया है.

 

बैठक से पहले बोले RCP सिंह- कोई छोटा या बड़ा भाई नहीं
बैठक से पहले जेडीयू के बड़े नेता आरसीपी सिंह ने ये कहकर सियासी खलबली मचा दी है कि बिहार में कोई बड़ा और कोई छोटा भाई नहीं है.  आरसीपी सिंह का ये बयान इस मायने में काफी अहम हो जाता है क्योंकि बीजेपी खुद को बड़ा भाई मानते हुए लोकसभा की ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहती है. जबकि जेडीयू पुराने रिश्तों की दुहाई देकर ज्यादा सीटों की मांग कर रही है. बिहार में लोकसभा की 40 सीट है, बीजेपी के पास अभी 22 सांसद हैं. चर्चा है कि जेडीयू 12 से 15 सीटों पर लड़ सकती है, ऐसे में बीजेपी को अपनी कुछ सीटें जेडीयू को देनी होगी.

 

कौन हैं प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर बड़े चुनावी रणनीतिकार हैं, बीजेपी, कांग्रेस, जेडीयू के लिए काम कर चुके हैं. 8 साल संयुक्त राष्ट्र में हेल्थ एक्सपर्ट रह चुके प्रशांत किशोर को पीके नाम से भी जाना जाता है. जंग का मैदान कितना भी बड़ा हो प्रशांत किशोर हमेशा पर्दे के पीछे से रहकर ही भूमिका निभाई है. 2012 में पहली बार गुजरात विधानसभा चुनाव में मोदी के लिए रणनीति बनाई.

 

2013 में सिटीजन फॉर अकाउंटबेल गवर्नेंस नाम की संस्था बनाई. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई. सोशल मीडिया कैंपन, चाय पर चर्चा, 3 डी प्रचार, रन पर यूनिटी से मोदी की मदद की.

 

2015 में जेडीयू के साथ आए, बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की मदद की. 2016 में नीतीश कुमार ने बिहार विकास मिशन का अध्यक्ष बनाया. 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई. 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मदद की लेकिन बीजेपी जीत गई.

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