जम्मू कश्मीर : राष्ट्रपति ने राज्यपाल शासन को दी मंजूरी..

जम्मू कश्मीर में भाजपा के पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ने के साथ तीन साल पुरानी राज्य सरकार गिरने के बाद अब राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है।

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में भाजपा के पीडीपी के साथ गठबंधन तोड़ने के साथ तीन साल पुरानी राज्य सरकार गिरने के बाद अब राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा की रिपोर्ट को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। राज्य में 6 महीने तक राज्यपाल शासन रहेगा।

इससे पहले मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श करने के बाद राज्यपाल वोहरा ने जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्यपाल शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। यह चौथा मौका है जब एन एन वोहरा के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल के दौरान जम्मू कश्मीर में केन्द्रीय शासन लगाया गया है। पूर्व नौकरशाह एनएन वोहरा 25 जून 2008 को राज्यपाल बने थे।

वोहरा ने गठबंधन सरकार से भाजपा के बाहर होने और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा देने के बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। मंगलवार को ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आवास पर गृह सचिव राजीव गाबा और खुफिया ब्यूरो एवं उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करके जम्मू कश्मीर की जमीनी स्थिति का आकलन किया था।

जम्मू-कश्मीर में कब-कब लगा राज्यपाल शासन

  • जम्मू – कश्मीर में मार्च 1977 को पहली बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। उस समय एल के झा राज्यपाल थे। तब सईद की अगुवाई वाली राज्य कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख महमूद अब्दुल्ला की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
  • मार्च 1986 में एक बार फिर सईद के गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत की सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण राज्य में दूसरी बार राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था।
  • इसके बाद राज्यपाल के रूप में जगमोहन की नियुक्ति को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया था। इस कारण सूबे में तीसरी बार केंद्र का शासन लागू हो गया था।
  • अक्तूबर , 2002 में चौथी बार और 2008 में पांचवीं बार केंद्र का शासन लागू हुआ।
  • राज्य में छठीं बार साल 2014 में राज्यपाल शासन लागू हुआ था।
  • पिछली बार मुफ्ती सईद के निधन के बाद आठ जनवरी , 2016 को जम्मू – कश्मीर में राज्यपाल का शासन लागू हुआ था। उस दौरान पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार गठन को टालने का निर्णय किया था।

राज्यपाल ने भेजी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार, मंत्रालय को जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा से एक रिपोर्ट मिली है और इस पर आवश्यक कदम उठाया जा रहा है. श्रीनगर में राज भवन के एक प्रवक्ता ने बताया कि वोहरा ने गठबंधन सरकार से भाजपा के बाहर होने और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा देने के बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपनी रिपोर्ट भेजी है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आवास पर गृह सचिव राजीव गाबा और खुफिया ब्यूरो एवं उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करके जम्मू कश्मीर की जमीनी स्थिति का आकलन किया.

सख्ती से नहीं चलेगा काम
बीजेपी द्वारा समर्थन वापसी के ऐलान के साथ ही महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. महबूबा ने कहा, ‘‘ मैं हैरान नहीं हूं, क्योंकि यह गठबंधन कभी सत्ता के लिए था ही नहीं. पीडीपी कभी सत्ता की राजनीति में यकीन नहीं रखती और हमने लोगों के लिए काम किया है.’’ उन्होंने कहा, ‘’जम्मू-कश्मीर में किसी तरह की सख्ती कभी नहीं चलेगी. जम्मू-कश्मीर कोई दुश्मन क्षेत्र नहीं है, जैसा कि कुछ लोग मानते हैं. हमने हमेशा कहा है कि बाहुबल वाली सुरक्षा नीति जम्मू-कश्मीर में नहीं चलेगी. मेल-मिलाप से काम लेना होगा.’’

बीजेपी ने तोड़ा गठबंधन
इससे पहले मंगलवार को भाजपा ने पीडीपी के साथ तीन साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया. गठबंधन तोड़ने का ऐलान करते हुए बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि राज्य में बढ़ते आतंकवाद और कट्टरपंथ को देखते हुए सरकार में बने रहना असंभव हो गया था. राम माधव ने कहा, ‘‘यह ध्यान में रखते हुए कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और राज्य में मौजूदा हालात पर काबू पाना है, हमने फैसला किया है कि राज्य में सत्ता की कमान राज्यपाल को सौंप दी जाए.’’

 

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