पैगंबर टिप्पणी से मुसीबत में आए कतर भारतीय, भारत को हेट स्पीच पर लगानी चाहिए पाबंदी

कतर की राजधानी दोहा है। कतर एक छोटा देश है, जिसकी आबादी 28 लाख के आसपास है। तीन लाख की आबादी ही स्थानीय लोगों की है। उससे अधिक भारतीय यहां रहते हैं। लगभग सात से आठ लाख भारतीय कतर में रहते हैं। इनमें बिजनेसमैन, नौकरी करने वालों से लेकर श्रमिक तक शामिल हैं, जिनकी जड़ें आज भी भारत में किसी न किसी रूप में जुड़ी हैं।

एक तरह से कतर में सबसे अधिक आबादी भारतीय मूल के लोगों की है, लेकिन जैसे ही भारत में कोई छोटा या बड़ा नेता हेट स्पीच देता है, किसी धर्म या समुदाय विशेष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करता है, उसका सीधा असर कतर जैसे छोटे देश में रह रहे भारतीयों पर पड़ता है।

यहां काम करने वाला हर भारतीय खुद को दबाव में महसूस करने लगता है। वह चाहे हिंदू हो या सिख, मुस्लिम या ईसाई। विदेश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए केवल एक धर्म होता है, वह भारतीय। वह खुद को भारत से जोड़ कर देखता है, लेकिन हेट स्पीच और आपत्तिजनक टिप्पणी से वह चाह कर भी खुद को अलग नहीं कर पाता। न चाहते हुए भी ऐसे हेट स्पीच के कारण उसे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।

पिछले दिनों भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने जिस तरह से पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी की, उसके बाद से ही कतर की सोसाइटी में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। पूरे कतर में भारत को लेकर सोशल मीडिया पर बातें होने लगीं। यहां पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सहित दूसरे देश के लोग भी रहते हैं। काम करते हैं।

इसलिए उन देशों के लोगों के बीच में भी वर्कप्लेस में ऐसे बयानों और हेट स्पीच की चर्चाएं होती हैं, जिससे भारतीय खुद को असहज महसूस करते हैं। सोसाइटी के दबाव का असर यह हुआ कि दो दिन पहले ही कतर सरकार को भारतीय राजदूत को बुलाकर नाराजगी जाहिर करनी पड़ी।

नूपुर शर्मा को पार्टी से निकाल कर भाजपा ने एक अच्छा संदेश दिया

कतर में तो भारतीय उत्पादों का बहिष्कार करना तो संभव नहीं है, क्योंकि बड़ी संख्या में यहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं, लेकिन खाड़ी के दूसरे देशों से भारतीय उत्पादों के बहिष्कार की सूचनाएं आ रही हैं। भाजपा ने नूपुर शर्मा को पार्टी से निकाल कर एक अच्छा संदेश तो दिया है। इसका कतर में अच्छा रिएक्शन भी हुआ है, लेकिन ऐसे बयानों पर भारत सरकार को पूरी तरह से पाबंदी लगानी चाहिए।

भारत सरकार को कोड ऑफ कंडक्ट बनाना चाहिए

भारत सरकार को यह तय करना चाहिए कि ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसा कंडक्ट बनाना चाहिए, जिससे हेट स्पीच देने वालों पर पूरी तरह रोक लगे। हेट स्पीच कौन देता है? उससे भारत के बाहर देश की किस तरह की छवि बन रही होती है, उसके बारे में हेट स्पीच देने वालों को कतई अंदाजा नहीं होता। उन्हें अपने रोजगार, नौकरी और मजदूरी प्रभावित होने की आशंका रहती है। उन्हें घबराहट होती है कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी नौकरी चली जाए, उनका बिजनेस प्रभावित हो जाए, मजदूरी छूट जाए। उस पीड़ा को हेट स्पीच देने वाले महसूस नहीं कर सकते।

हेट स्पीच देने वाले किसी भी धर्म, समुदाय के हो सकते हैं, लेकिन उन पर पूरी तरह अंकुश लगना चाहिए। बेशक कतर एक छोटा देश है, लेकिन यह देश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गैस एक्सपोर्टर है। भारत कतर से ही सबसे अधिक गैस आयात करता है। देश की सरकार को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब विदेशों में रह रहे भारतीय मजबूत होंगे तभी भारत दुनिया में मजबूत होगा।

57 देशों के संगठन OIC ने जताई आपत्ति

एक न्यूज डिबेट में भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसका मुस्लिम समुदाय लगातार विरोध कर रहा है। पिछले दिनों शर्मा ने बयान जारी कर कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। शर्मा पर महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

OIC ने शर्मा की कथित टिप्पणी की निंदा की

विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि 57 मुस्लिम देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने शर्मा की कथित टिप्पणी की निंदा की। संगठन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा- भारत में बीते दिनों में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं। कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर बैन के साथ मुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय ने OIC के बयान पर ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत OIC सचिवालय की गैरजरूरी और छोटी सोच वाली टिप्पणियों को साफ तौर पर खारिज करता है। भारत सरकार सभी धर्मों को सम्मान देती है।

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