Quad की बैठक से एक बात पूरी तरह साफ़ है- ड्रैगन का फार्मा उद्योग पूरी तरह बर्बाद होने वाला है

इसमें किसी भी प्रकार का कोई शक नहीं है कि क्वाड की एकता से सबसे ज्यादा नुकसान चीन को ही होगा। विश्व को कोरोनावायरस जैसी महामारी देकर चीन पहले ही वैश्विक स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है, लेकिन अब Quad देशों का समूह (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका) चीन को फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में बर्बाद करने की तैयारी कर चुका है। इसकी बड़ी वजह ये है कि सभी भारत को कोरोनावायरस की वैक्सीन के प्रोडक्शन का हब बनाने की तैयारी कर चुके है। इन सभी ने मिलकर ये तय किया है कि वो 2022 तक 2 बिलियन कोरोना वायरस की वैक्सीन के डोज बनाकर एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में उसके आपूर्ति करेंगे।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने Quad का गुट बनाकर पिछले साल चीन के लिए कोरोनावायरस को लेकर मुश्किलें खड़ी की थीं, और अब ये देश उन्हीं नीतियों को और अधिक सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं। बाइडन के सत्ता संभालने के बाद Quad देशों की पहली वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, आस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मॉरिसन और जापानी पीएम योशिहिदे सुगा ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दुनिया को जल्द-से-जल्द कोरोना की महामारी से मुक्त कराने का था। हालांकि इस बैठक के बाद जो बयान निकल कर सामने आए हैं वो चीन के लिए बेहद ही खतरनाक हैं क्योंकि इसमें चीन को वैश्विक स्तर पर किनारे करने के संकेत मिलें हैं। 

इस बैठक के बाद आए बयानों में सबसे महत्वपूर्ण बात ये सामने आई है कि भारत दुनिया में कोरोनावायरस के लिए विकसित हुई वैक्सीन के प्रोडक्शन का हब बनने वाला है। अमेरिका और जापान के राष्ट्र प्रमुखों ने तय किया है कि अपने यहां विकसित गईं वैक्सीनों का प्रोडक्शन भारत में ही किया जाएगा। इन देशों ने तय किया है कि 2022 तक एशिया और दुनिया भर में एक बिलियन वैक्सीन को सप्लाई किया जाएगा, जिनका प्रोडक्शन भारत में ही होगा।खास बात ये भी है कि Quad की बैठक में इस बात पर भी सहमति भी जताई गई है कि अमेरिका की सबसे कारगर कोरोना की वैक्सीन जो कि जॉनसन एण्ड जॉनसन द्वारा बनाई गई है, उसका प्रोडक्शन भी भारत में ही हैदराबाद की एक कंपनी बायोलॉजिकल–ई के साथ करार के जरिए होगा। इस मामले में ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वो ऑस्ट्रेलिया पैसेफिक क्षेत्रों और साउथ ईस्ट एशिया में भी जॉनसन एण्ड जॉनसन की वैक्सीन की सप्लाई करेगा। खास बात ये भी है कि जॉनसन एण्ड जॉनसन द्वारा विकसित कोरोनावायरस की वैक्सीन एक डोज में ही असरदार है और ये कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन पर भी पूर्ण रूप से कारगर है।  

भारत हमेशा से ही वैश्विक स्तर पर वैक्सीन प्रोडक्शन का गढ़ रहा है। ऐसे में क्वाड के इस फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस की वैक्सीन से जुड़ी कमी दूर होगी और भारत में इनके प्रोडक्शन के जरिए पूरी दुनिया में बेहद ही सहज तरीके से वैक्सीन की उपलब्धता होगी, लेकिन इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा झटका चीन को लगने वाला है जो कि हमेशा ही खुद को भारत से आगे दिखाने की कोशिशों में जुटा रहता है क्योंकि कोरोना की वैक्सीन के अलावा प्रोडक्शन में सहजता और भारत के रवैए को देखकर अन्य कंपनियां को भी यहां प्रोडक्शन करने का उत्साह मिलेगा और ये भारत के लिए कारगर होगा।

Quad के इस फैसले के बाद न केवल कोरोनावायरस की वैक्सीन बल्कि अन्य बीमारियों की वैक्सीन और दवाएं भी भारत में अधिक मात्रा में उत्पादित होंगी और भारत फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्री में अग्रणी देशों की सूची में शीर्ष पायदान पर होगा जो कि चीन के लिए एक झटका है। चीन  के खिलाफ पहले ही पूरी दुनिया में आक्रोश की स्थिति है। ऐसे में कोई चीन की वैक्सीन नहीं खरीद रहा है। इससे इतर भारत की फार्मास्यूटिकल्स कंपनियां भी चीन के से आने वाले प्रोडक्ट्स से अपनी निर्भरता खत्म कर रही हैं जिससे चीन के फार्मास्यूटिकल्स मार्केट पर एक बड़ी चोट पड़ने वाली है। वहीं अब Quad के इस फैसले के बाद दवाओं और वैक्सीन के प्रोडक्शन के क्षेत्र में लोगों की जुबान पर पहला नाम भारत का ही होगा।

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