राप्ती और घाघरा उफान पर, बाढ जैसी स्थिति 

गोपाल त्रिपाठी 
गोरखपुर । एक बार फिर राप्ती व घाघरा के जलस्तर में बढोत्तरी शुरू हो गई है। पिछले 48 घंटे के भीतर नदियों के जलस्तर में छह सेंटीमीटर की बढोत्तरी आंकी गई है। दोनों नदियां उफान पर हैं। जिसके चलते बाढ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदियों के रौद्र रूप को देख कर ग्रामीण अब पलायन के मूड में हैं। हालांकि प्रशासन अभी स्थिति को सामान्य बता रहा है।
राप्ती व घाघरा के जलस्तर में बढोत्तरी से आधा दर्जन गांवों के संपर्क मार्ग पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। जैतपुर गांव चारो ओर से घाघरा के पानी से घिरा हुआ है। जहां ग्रामीण अपनी व्यक्तिगत नाव के सहारे गांव से बाहर निकल रहे हैं। पौहरिया गांव में भी ग्रामीण नाव की व्यवस्था कर चुके हैं। कोलखास की नई बस्ती घाघरा की बाढ से घिर चुका है। डेरवा से खोहिया पट्टी गांव को जाने वाला मार्ग पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है। मैभरा, लखनौरी, लखनौरा, हिंगुहार, मच्छरगवा, खोहिया, अगिलगौवा, गोनघट राप्ती की पानी से घिरे हुए हैं।
हिंगुहार में निर्माणाधीन पंचायत भवन चारो तरफ से जलमग्न हो गया है। कैलाशपति, दुर्गविजय, राधेश्याम, मनोहर आदि ग्रामीणों का कहना है कि हिंगुहार, लखनौरी, लखनौरा, बिहुवा, खोहियापट्टी सहित कई दर्जन गांव हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। नदियों के जलस्तर में थोडी सी भी बढोत्तरी होने पर ये गांव बाढ से प्रभावित हो जाते हैं और सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। रामजानकी मार्ग से होकर जाने वाले लखनौरी, लखनौरा, हिंगुहार, खोहिया पट्टी, सूबेदार नगर माझा जगदीशपुर की सडकों को यदि उंचा करा दिया जाए तो कुछ हद तक बाढ से निजात मिल सकती है। बताया जाता है कि नदियों के जलस्तर में यदि और बढोत्तरी हुई तो पानी कभी भी गांवों में प्रवेश कर जाएगा। इसके इतर पौहरिया, जगदीशपुर, डेरवा, गोपलामार गांव में रह रह कर कटान हो रही है।
बाढ चैकियों की सक्रियता मात्र प्रशासन को रिपोर्ट सौंपने तक सीमित रह गई है। पटेल विश्वकर्मा, सोनू गुप्ता, इंद्रजीत आदि का कहना है कि हर साल कछार के दर्जनों गांव बाढ से प्रभावित हो जाते हैं मगर इसके स्थायी निदान का अब तक कोई प्रयास नहीं किया जा सका। जिसका परिणाम है कि ग्रामीणों को मुसीबत उठानी पडती है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी गोला अरूण सिंह का कहना है कि नदियों के जलस्तर में बढोत्तरी आंकी गई है फिर भी अभी संकट की कोई बात नहीं है। अभी किसी गांव में नाव चलवाने की नौबत नहीं आयी है। बाढ चैकियां पूरी तरह सक्रिय हैं। जो पल पल की रिपोर्ट दे रही हैं। यदि कहीं प्रशासनिक मदद की जरूरत पडी तो मुहैया कराया जाएगा।
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