बहेड़ी विधानसभा में समाजवादी पार्टी दिखा रही है दम

नसीम अहमद अताउल रहमान

भास्कर ब्यूरो
बहेड़ी।  बरेली विधानसभा में एक और विधानसभा बहेड़ी धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा हैं। हमेशा से ही चर्चित रही विधानसभा से बड़े-बड़े दिग्गजों ने अपने -अपने दांव आजमाए हैं। जिसमें प्रमुख रूप से हाजी मंजूर अहमद कई बार विधायक चुने गये, विधायक मंजूर अहमद के निधन के बाद समाजवादी पार्टी इस विधानसभा में राजनीतिक तौर पर शून्य हो गई, जिसके बाद राजनीतिक शून्यता बहुजन समाज पार्टी से अताउर रहमान ने जीतकर ख़त्म कर बहेड़ी मे अपना अलग राजनीतिक मुकाम बना लिया।

मगर जब समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में बनी तो उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और वह लगातार विधायक बनते रहे एक बार समाजवादी पार्टी ने उन्हें मंत्री भी बनाया मगर जैसे-जैसे पार्टी में उनका कद बढ़ता गया वैसे वैसे वह बहेड़ी की जनता से दूर होते चले गए और इसी बात का प्रभाव कहे या फिर जनता की नाराजगी कि सामाजवादी पार्टी की लहर मे वो अपना 2012 का चुनाव बमुश्किल 18 वोटों से ही जीत पाए अब इसे चुनाव जीतना कहा जाए या कुछ और वह अलग बात है इतना सब होने के बाद भी समाजवादी पार्टी के इस दिग्गज के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया और 2017 का चुनाव वह बुरी तरह से हार गए तीसरे नंबर पर पहुंच गए और यह उस समय हुआ जब समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में बहुमत के साथ थी इसी चुनाव में अपना पहला चुनाव लड़ रहे वन विभाग से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले कर आए नसीम अहमद एक बड़ी राजनीतिक हस्ती के तौर पर उभरे उन्होंने बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ कर दूसरे नंबर का स्थान प्राप्त किया और यह उस समय दूसरे स्थान पर रहे जब बहुजन समाज पार्टी प्रदेश में लगभग मृतप्राय हो चुकी थी अब इसे पार्टी के वोट कि सपोर्ट कहा जाए या फिर उनकी साफ-सुथरी छवि को देखकर वोट मिला यह तो जनता के मन की बात है फिलहाल बहेड़ी विधानसभा में 1 नए सितारे का उदय हो चुका था चुनाव हारने के नसीम अहमद लगातार जनता के बीच रहे और अपनी पत्नी फौजु़ल नसीम को पहली बार में ही नगरपालिका बहेड़ी का अध्यक्ष बना दिया जैसे-जैसे समय बीता वैसे ही नसीम अहमद अपनी छवि को मजबूत करते चले गए उधर अता उर रहमान चुनाव हारने के बाद बहेड़ी विधानसभा से कटकर रह गए। 

उन्होंने लखनऊ पॉलिटिक्स में हाथ आजमाना शुरू कर दिया और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बन गए उनकी दौड़ लखनऊ बरेली के बीच सिमट कर रह गई इधर अपना कद बढ़ाते जा रहे नसीम अहमद ने जनता को विश्वास दिला दिया कि वह उनके बीच के नेता हैं इसी क्रम में अब बहेड़ी विधानसभा मैं दो राजनीतिक ध्रुव हो गए जिसमें एक का नेतृत्व अताउर रहमान करते थे और एक का नेतृत्व नसीम अहमद, राजनीतिक तौर पर मजबूत होते नसीम अहमद ने जुलाई 2021 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम कर समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी ठोक दी और अताउर रहमान की मुश्किलें बढ़ा दी लगातार जनता के बीच जाकर समाजवादी पार्टी का कुनबा बढ़ाने लगे और पार्टी हाईकमान को संदेश देने लगे कि वह समाजवादी पार्टी के सच्चे सिपाही बनकर पार्टी के लिए काम कर रहे हैं 

लगातार जनसंपर्क कर उन्होंने भाजपा कि सरकार में ग्राम पंचायत चुनाव में अपने समर्थन से बहुत से प्रधानों को जिताया और जिला पंचायत क्षेत्र पंचायत चुनाव में अपने समर्थकों को चुनाव जिता कर यह साबित कर दिया कि वह राजनीति में माहिर हो चुके हैं इसी को लेकर राजनीतिक पंडितों की माने लगातार नसीम अहमद के बढ़ते कद से पुराने दिग्गजों को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही हैैं फिलहाल तो अपना-अपना दावा अपने अपने राजनीतिक दांव पेंच में दोनों ही टिकट के दावेदार नजर आते हैं मगर अखिलेश यादव के टिकट बांटने को लेकर जमीनी सर्वे कराकर टिकट देने वाले बयान के मुताबिक नसीम अहमद का ही पलड़ा भारी नजर आता है फिलहाल देखना यह है कि अब समाजवादी पार्टी हाईकमान बहेड़ी की राजनीति में एक अलग मुकाम बनाते जा रहे हैं नसीम अहमद को टिकट देकर चुनाव लड़ाती है या फिर अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से तलाश रहे पुराने दिग्गज अताउर रहमान पर ही दांव लगाती है बहेड़ी विधानसभा राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस बार समाजवादी पार्टी को साफ-सुथरी छवि और जनता में रहने वाले व्यक्ति को ही टिकट देना चाहिए कहीं ना कहीं इस बार चेहरे पर ही वोटिंग होगी पार्टी किसे टिकट देती है पार्टी हाईकमान की प्राथमिकता मैं कौन फिट बैठता है यह तय करेगा टिकट किसका होता है

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